नालंदा जिले में कई साल से नासूर बनी ठोस कचरा प्रबंधन की समस्या से अब राहत मिलने की उम्मीद जगी है। जिले के सभी 15 नगर निकायों से निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक निपटारे के लिए कतरीसराय प्रखंड के भगवानपुर में एक विशाल मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) केंद्र स्थापित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने इसके लिए 44 एकड़ जमीन चिह्नित कर दी है, जिसकी मापी का काम नगर निगम की टीम ने पूरा कर लिया है। जमीन की मापी पूरी, जल्द बनेगी चारदीवारी नगर निगम के स्वच्छता प्रबंधक कुंदन कुमार ने बताया कि जमीन की पैमाइश का काम पूरा हो चुका है। अब परिसर को सुरक्षित करने के लिए चारों तरफ पिलर लगाकर पक्की चारदीवारी तैयार की जाएगी। इस केंद्रीय प्लांट में बिहारशरीफ नगर निगम सहित राजगीर, हिलसा, इस्लामपुर, चंडी, परवलपुर, एकंगरसराय, अस्थावां, रहुई, सरमेरा, हरनौत, पावापुरी, गिरियक और नालंदा नगर निकाय का कचरा प्रोसेस किया जाएगा। डंपिंग यार्डों में सड़ रहा हजारों टन कचरा वर्तमान में बिहारशरीफ शहर से रोजाना दो से तीन टन कचरा नालियों और घरों से निकलता है, लेकिन शहर में एक भी आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट नहीं है। नतीजा यह है कि चकरसलपुर स्थित डंपिंग यार्ड में अब तक 86 हजार टन कचरे का पहाड़ खड़ा हो चुका है। इसके अलावा कोसुक के पास भी 26 टन से अधिक कचरा खुले में जमा है। खुले में सड़ रहे इस कचरे से उठने वाली दुर्गंध और प्रदूषण ने आसपास के ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। कचरे से बिजली बनाने का दावा रहा हवा-हवाई कचरा प्रबंधन के मामले में शहर की व्यवस्था का इतिहास निराशाजनक रहा है। वर्ष 2007 में बिहारशरीफ को नगर निगम का दर्जा मिला था। इन 19 सालों में शहर ने 4 मेयर देखे और 11 नगर आयुक्त बदले, लेकिन कचरे के स्थायी समाधान का दावा हर बार फाइलों में ही दबा रहा। पूर्व में कचरे से बिजली पैदा करने और बिल्डिंग मटेरियल तैयार करने के दावे भी किए गए थे, जो अंततः कागजी ही साबित हुए। 800 करोड़ की स्मार्ट सिटी योजना के बाद भी नहीं बदला हाल वर्ष 2017 में जब बिहारशरीफ को ‘स्मार्ट सिटी’ परियोजना में शामिल किया गया और करीब 800 करोड़ रुपए की योजनाएं मंजूर हुईं, तब लोगों को ठोस कचरा प्रबंधन की आधुनिक तकनीक आने की उम्मीद बंधी थी। हालांकि जमीनी स्तर पर डंपिंग यार्डों की स्थिति जस की तस बनी रही। अब कतरीसराय के भगवानपुर में 44 एकड़ में प्रस्तावित इस एमआरएफ केंद्र से नालंदावासियों को एक बार फिर स्वच्छ और कचरामुक्त जिले की उम्मीद दिखने लगी है। नालंदा जिले में कई साल से नासूर बनी ठोस कचरा प्रबंधन की समस्या से अब राहत मिलने की उम्मीद जगी है। जिले के सभी 15 नगर निकायों से निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक निपटारे के लिए कतरीसराय प्रखंड के भगवानपुर में एक विशाल मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) केंद्र स्थापित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने इसके लिए 44 एकड़ जमीन चिह्नित कर दी है, जिसकी मापी का काम नगर निगम की टीम ने पूरा कर लिया है। जमीन की मापी पूरी, जल्द बनेगी चारदीवारी नगर निगम के स्वच्छता प्रबंधक कुंदन कुमार ने बताया कि जमीन की पैमाइश का काम पूरा हो चुका है। अब परिसर को सुरक्षित करने के लिए चारों तरफ पिलर लगाकर पक्की चारदीवारी तैयार की जाएगी। इस केंद्रीय प्लांट में बिहारशरीफ नगर निगम सहित राजगीर, हिलसा, इस्लामपुर, चंडी, परवलपुर, एकंगरसराय, अस्थावां, रहुई, सरमेरा, हरनौत, पावापुरी, गिरियक और नालंदा नगर निकाय का कचरा प्रोसेस किया जाएगा। डंपिंग यार्डों में सड़ रहा हजारों टन कचरा वर्तमान में बिहारशरीफ शहर से रोजाना दो से तीन टन कचरा नालियों और घरों से निकलता है, लेकिन शहर में एक भी आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट नहीं है। नतीजा यह है कि चकरसलपुर स्थित डंपिंग यार्ड में अब तक 86 हजार टन कचरे का पहाड़ खड़ा हो चुका है। इसके अलावा कोसुक के पास भी 26 टन से अधिक कचरा खुले में जमा है। खुले में सड़ रहे इस कचरे से उठने वाली दुर्गंध और प्रदूषण ने आसपास के ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। कचरे से बिजली बनाने का दावा रहा हवा-हवाई कचरा प्रबंधन के मामले में शहर की व्यवस्था का इतिहास निराशाजनक रहा है। वर्ष 2007 में बिहारशरीफ को नगर निगम का दर्जा मिला था। इन 19 सालों में शहर ने 4 मेयर देखे और 11 नगर आयुक्त बदले, लेकिन कचरे के स्थायी समाधान का दावा हर बार फाइलों में ही दबा रहा। पूर्व में कचरे से बिजली पैदा करने और बिल्डिंग मटेरियल तैयार करने के दावे भी किए गए थे, जो अंततः कागजी ही साबित हुए। 800 करोड़ की स्मार्ट सिटी योजना के बाद भी नहीं बदला हाल वर्ष 2017 में जब बिहारशरीफ को ‘स्मार्ट सिटी’ परियोजना में शामिल किया गया और करीब 800 करोड़ रुपए की योजनाएं मंजूर हुईं, तब लोगों को ठोस कचरा प्रबंधन की आधुनिक तकनीक आने की उम्मीद बंधी थी। हालांकि जमीनी स्तर पर डंपिंग यार्डों की स्थिति जस की तस बनी रही। अब कतरीसराय के भगवानपुर में 44 एकड़ में प्रस्तावित इस एमआरएफ केंद्र से नालंदावासियों को एक बार फिर स्वच्छ और कचरामुक्त जिले की उम्मीद दिखने लगी है।

