प्रदेश भर मे बाल विवाह रोकने के लिए शिक्षा विभाग डायरेक्टर ललित कुमार ने आदेश जारी किए हैं। स्कूल के प्रिंसिपल, प्रधानाध्यापक, VDO और पटवारियों को पुलिस जैसी जिम्मेदारी दी गई है। सरकार ने इन सभी को आधिकारिक तौर पर ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी’ (CMPO) नियुक्त कर दिया है। अब ये पुलिस की तरह इस मामले में कार्रवाई कर सकेंगे. हालांकि, इस फैसले से कई शिक्षक संगठन नाराज हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और मुख्य सचिवों की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस से मिले निर्देशों के बाद सरकार ने जमीनी स्तर पर निगरानी का पूरा ढांचा ही बदल दिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार के स्तर से जारी आदेशों के मुताबिक, अब ग्रामीण और शहरी इलाकों में बाल विवाह रोकने के लिए केवल पुलिस का इंतजार नहीं करना होगा। सरकार ने सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल्स, प्रधानाध्यापकों, ग्राम विकास अधिकारियों (VDO) और पटवारियों को आधिकारिक तौर पर ये हक दिया है। सबसे बड़ा मोड़ यह है कि ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023’ के प्रावधानों के तहत इन सभी अधिकारियों को संज्ञेय अपराधों की जांच करने के लिए सीधे तौर पर पुलिस अधिकारियों जैसी ताकत दे दी गई है। पढ़ें किसे कहां की जिम्मेदारी
ग्रामीण क्षेत्रों में संस्था प्रधान जिस स्कूल में कार्यरत है, वहां की ग्राम पंचायत में और शहरी क्षेत्रों में जिस नगरपालिका वार्ड के अंतर्गत आता है, वहां के प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक पूरी निगरानी रखेंगे। इसी तरह ग्राम विकास अधिकारी , पटरियों को अपनी पूरी ग्राम पंचायत और पटवारी अपने पटवार मंडल के दायरे में बाल विवाह के मामलों की सीधी जांच करेंगे। शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि सभी संभागीय संयुक्त निदेशक और जिला शिक्षा अधिकारी इस आदेश की सख्त पालना सुनिश्चित करवाएंगे। हालांकि इस निर्णय से कई शिक्षक संगठन नाराज हैं, उनका मानना है कि इस व्यवस्था से शिक्षण कार्य प्रभावित होगा।

