रायपुर जिले के आरंग स्थित राव हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी NOC को लेकर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने नवीनीकरण कराने के बजाय कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से फर्जी NOC तैयार कर ली। अग्निशमन विभाग और SDRF की संयुक्त टीम के सुरक्षा ऑडिट में दस्तावेजों की गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद आरंग पुलिस ने अस्पताल संचालक के खिलाफ FIR दर्ज की है। QR कोड स्कैन करने पर सामने आई गड़बड़ी जानकारी के मुताबिक, नियमित सुरक्षा ऑडिट के दौरान टीम राव हॉस्पिटल पहुंची थी। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने अधिकारियों को फायर NOC की फोटोकॉपी दिखाई। दस्तावेजों की जांच में अधिकारियों को संदेह हुआ। प्रमाण पत्र पर जारी होने की तारीख 16 अप्रैल 2026 दर्ज थी, लेकिन QR कोड स्कैन करने पर सिस्टम में 16 अप्रैल 2025 की तारीख दिखाई दी। NOC में जांच अधिकारी के तौर पर पुरुषोत्तम सिंह का नाम दर्ज था, जबकि अग्निशमन विभाग में इस नाम का कोई अधिकारी कार्यरत नहीं होने की बात सामने आई। दस्तावेज पर हस्ताक्षर की तारीख के दौरान संबंधित पद पर अधिकारी की पदस्थापना को लेकर भी गड़बड़ी मिली। शासकीय पोर्टल से मिलान करने पर प्रमाण पत्र के कूटरचित होने का संदेह पुष्ट हुआ। BNS की धारा 318(4) में केस दर्ज न्यू रायपुर फायर ब्रिगेड के निरीक्षक पुष्पराज विनायक की शिकायत पर आरंग थाना पुलिस ने अस्पताल संचालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब जांच कर रही है कि कथित फर्जी NOC तैयार करने में किस कंप्यूटर सेंटर या ग्राफिक्स डिजाइनर की भूमिका थी। जिला सेनानी एवं फायर ऑफिसर के मुताबिक, व्यावसायिक और चिकित्सा संस्थानों के लिए सुरक्षा के लिहाज से हर साल फायर NOC लेना अनिवार्य है। अधिकारियों ने कहा कि अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजामों की अनदेखी मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

