गयाजी शहर में अल्पसंख्यक छात्रावास बदहाल हो चुका है। लगातार शिकायतें मिलने के बाद मामला ऊपर तक पहुंचा है। अब मगध प्रमंडल के आयुक्त एसएम शफिना ने जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हॉस्टल करीमगंज में है। दरअसल, छात्रों की शिकायतें छोटी नहीं हैं। छात्रावास में पानी की किल्लत है। शौचालय गंदे पड़े हैं। साफ-सफाई की हालत बेहद खराब है। रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं। छात्रावास में रहने वाले छात्र इन हालात में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा खतरा भवन की हालत को लेकर है। छात्रावास की इमारत जर्जर हो चुकी है। कभी भी हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद अब तक न मरम्मत हुई और न कोई ठोस पहल। इसके अलावा जिस काम को अधिकारी को करना चाहिए, वे स्टूडेंट से करवाया जा रहा लड़कों ने मेस के लिए कुक की डिमांड की थी, पर कल्याण विभाग ने ये काम स्टूडेंट्स को ही करने को कह दिया। अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी करेंगे जांच छात्रों की समस्या को लेकर जिला परिषद सदस्य गुलिस्ता खातून और सह-निवेदक मोहम्मद औरंगजेब ने शुक्रवार को आयुक्त को आवेदन देकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की। आवेदन में आरोप लगाया गया कि बार-बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। न समय पर निरीक्षण हुआ, न ही सुधार की दिशा में पहल दिखी। यही वजह है कि अब प्रशासन हरकत में आया है। आयुक्त ने अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी को खुद छात्रावास जाकर स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है, ताकि आगे की कार्रवाई तय हो सके। छात्रों का कहना है कि इस लापरवाही का सीधा असर उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई पर पड़ रहा है। गंदगी और पानी की कमी से परेशानी बढ़ रही है। ऐसे माहौल में पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है। वहीं, जर्जर भवन में रहना खुद को जोखिम में डालने जैसा है। गयाजी शहर में अल्पसंख्यक छात्रावास बदहाल हो चुका है। लगातार शिकायतें मिलने के बाद मामला ऊपर तक पहुंचा है। अब मगध प्रमंडल के आयुक्त एसएम शफिना ने जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हॉस्टल करीमगंज में है। दरअसल, छात्रों की शिकायतें छोटी नहीं हैं। छात्रावास में पानी की किल्लत है। शौचालय गंदे पड़े हैं। साफ-सफाई की हालत बेहद खराब है। रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं। छात्रावास में रहने वाले छात्र इन हालात में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा खतरा भवन की हालत को लेकर है। छात्रावास की इमारत जर्जर हो चुकी है। कभी भी हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद अब तक न मरम्मत हुई और न कोई ठोस पहल। इसके अलावा जिस काम को अधिकारी को करना चाहिए, वे स्टूडेंट से करवाया जा रहा लड़कों ने मेस के लिए कुक की डिमांड की थी, पर कल्याण विभाग ने ये काम स्टूडेंट्स को ही करने को कह दिया। अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी करेंगे जांच छात्रों की समस्या को लेकर जिला परिषद सदस्य गुलिस्ता खातून और सह-निवेदक मोहम्मद औरंगजेब ने शुक्रवार को आयुक्त को आवेदन देकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की। आवेदन में आरोप लगाया गया कि बार-बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। न समय पर निरीक्षण हुआ, न ही सुधार की दिशा में पहल दिखी। यही वजह है कि अब प्रशासन हरकत में आया है। आयुक्त ने अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी को खुद छात्रावास जाकर स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है, ताकि आगे की कार्रवाई तय हो सके। छात्रों का कहना है कि इस लापरवाही का सीधा असर उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई पर पड़ रहा है। गंदगी और पानी की कमी से परेशानी बढ़ रही है। ऐसे माहौल में पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है। वहीं, जर्जर भवन में रहना खुद को जोखिम में डालने जैसा है।


