प्राइवेट अस्पताल में मरीज की मौत पर हंगामा:डॉक्टर फरार, गलत इंजेक्शन देने का आरोप; परिजन बोले- लापरवाही से जान चली गई

प्राइवेट अस्पताल में मरीज की मौत पर हंगामा:डॉक्टर फरार, गलत इंजेक्शन देने का आरोप; परिजन बोले- लापरवाही से जान चली गई

नालंदा के एक प्राइवेट अस्पताल इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। डॉक्टरों पर लापरवाही और गलत इंजेक्शन देने का आरोप लगाया है। मृतक की पहचान बेला गांव निवासी बाल बृंद नोनिया(45) के तौर पर हुई है। घटना दीपनगर थाना क्षेत्र की है। पुत्र बबलू कुमार ने बताया ने बताया कि एक साल पहले पिताजी के पैर में रॉड डाली गई थी। जिसे निकलवाने के लिए 16 अप्रैल को सिद्धि विनायक अस्पताल पहुंचे थे। जांच के बाद 17 तारीख को ऑपरेशन का समय तय किया। शाम करीब 5 बजे उनके ऑपरेशन थिएटर (OT) ले जाया गया। कुछ ही देर बाद परिवार के लोगों को अंदर बुलाया। मरीज के मुंह में पाइप लगा था, उन्हें कृत्रिम सांस दी जा रही थी। ऑपरेशन अभी शुरू भी नहीं हुआ था। सिर्फ एक इंजेक्शन देने के बाद ही स्थिति बिगड़ गई।
लापरवाही से ही जान गई है परिवार के सदस्य टिंकू चौहान ने कहा कि मरीज हंसता-खेलता अस्पताल आया था, लेकिन एक गलत इंजेक्शन ने उनकी जान ले ली। मौत के बाद से डॉक्टर अस्पताल से फरार हैं। सारा काम स्टाफ के भरोसे छोड़ दिया गया है। अपनी गलती छिपाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने पिछले दो दिनों से दवा और वेंटिलेटर का शुल्क माफ कर दिया था। उन्हें दिलासा देते रहे। सोमवार सुबह जब मौत की पुष्टि हुई, तो धैर्य टूट गया। जिसके बाद हंगामा शुरू कर दिया गया। डॉक्टर की तलाश जारी हंगामे की सूचना पर दीपनगर पुलिस मौके पर पहुंची।थानाध्यक्ष सुमन कुमार ने बताया कि परिजनों की ओर से आवेदन मिला है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। इस संबंध में वरीय अधिकारियों से भी मंतव्य मांगा गया है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ मॉडल अस्पताल भेज दिया गया है। मौत के सही कारणों का खुलासा रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। अस्पताल प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस फरार डॉक्टर की तलाश कर रही है। नालंदा के एक प्राइवेट अस्पताल इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। डॉक्टरों पर लापरवाही और गलत इंजेक्शन देने का आरोप लगाया है। मृतक की पहचान बेला गांव निवासी बाल बृंद नोनिया(45) के तौर पर हुई है। घटना दीपनगर थाना क्षेत्र की है। पुत्र बबलू कुमार ने बताया ने बताया कि एक साल पहले पिताजी के पैर में रॉड डाली गई थी। जिसे निकलवाने के लिए 16 अप्रैल को सिद्धि विनायक अस्पताल पहुंचे थे। जांच के बाद 17 तारीख को ऑपरेशन का समय तय किया। शाम करीब 5 बजे उनके ऑपरेशन थिएटर (OT) ले जाया गया। कुछ ही देर बाद परिवार के लोगों को अंदर बुलाया। मरीज के मुंह में पाइप लगा था, उन्हें कृत्रिम सांस दी जा रही थी। ऑपरेशन अभी शुरू भी नहीं हुआ था। सिर्फ एक इंजेक्शन देने के बाद ही स्थिति बिगड़ गई।
लापरवाही से ही जान गई है परिवार के सदस्य टिंकू चौहान ने कहा कि मरीज हंसता-खेलता अस्पताल आया था, लेकिन एक गलत इंजेक्शन ने उनकी जान ले ली। मौत के बाद से डॉक्टर अस्पताल से फरार हैं। सारा काम स्टाफ के भरोसे छोड़ दिया गया है। अपनी गलती छिपाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने पिछले दो दिनों से दवा और वेंटिलेटर का शुल्क माफ कर दिया था। उन्हें दिलासा देते रहे। सोमवार सुबह जब मौत की पुष्टि हुई, तो धैर्य टूट गया। जिसके बाद हंगामा शुरू कर दिया गया। डॉक्टर की तलाश जारी हंगामे की सूचना पर दीपनगर पुलिस मौके पर पहुंची।थानाध्यक्ष सुमन कुमार ने बताया कि परिजनों की ओर से आवेदन मिला है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। इस संबंध में वरीय अधिकारियों से भी मंतव्य मांगा गया है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ मॉडल अस्पताल भेज दिया गया है। मौत के सही कारणों का खुलासा रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। अस्पताल प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस फरार डॉक्टर की तलाश कर रही है।  

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