महाराष्ट्र के ठाणे महानगरपालिका चुनाव (TMC Election) में मुंब्रा के वार्ड 30 से जीत हासिल करने के बाद सुर्खियों में आने वाली एआईएमआईएम (AIMIM) पार्षद सहर शेख (Sahar Shaikh) एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। सहर शेख पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे चुनाव लड़ने का आरोप है, हालांकि इस मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पिछले कुछ दिनों से ‘नॉट रिचेबल’ सहर शेख के पिता यूनुस शेख अचानक मुंब्रा पुलिस स्टेशन में हाजिर हुए।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों से करीब 15-20 मिनट बातचीत करने के बाद यूनुस शेख थाने से बाहर निकल आये। इस दौरान उन्होंने सभी आरोपों को खारिज कर दिया और कहा, हम इसका करारा जवाब देंगे, दो दिनों में हम अपनी भूमिका स्पष्ट करेंगे।
बता दें कि ठाणे के तहसीलदार कार्यालय ने यूनुस शेख पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने और उसके आधार पर अपनी बेटी सहर शेख का जाति प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
‘कैसा हराया…’ से चर्चा में आई थीं सहर शेख
दरअसल सहर शेख इसी साल जनवरी में हुए महानगरपालिका चुनावों के बाद उस वक्त सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में एनसीपी (शरद पवार) के वरिष्ठ नेता व स्थानीय विधायक जितेंद्र आव्हाड समर्थित उम्मीदवार को हरा दिया था। शेख ने तब विजय जुलूस में आव्हाड पर ‘कैसा हराया…’ तंज कसा था और पूरे मुंब्रा को हरा रंग से रंगने का वादा किया था। लेकिन जब उनकी इस टिप्पणी पर खूब विवाद होने लगा तो उन्होंने माफी मांग ली।
क्या है पूरा मामला?
तहसीलदार उमेश पाटिल ने यूनुस शेख के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। दरअसल चुनाव में हारी एनसीपी (अजित गुट) उम्मीदवार सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद ने सहर शेख के जाति प्रमाण पत्र की वैधता को चुनौती दी है।
पिछले महीने इस संबंध में सब-डिवीजन अधिकारी (एसडीओ) को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि यूनुस शेख ने प्रथम दृष्टया चुनाव आयोग सहित चार सरकारी एजेंसियों को गुमराह किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि यूनुस शेख का 2011 का ओबीसी प्रमाण पत्र आधिकारिक प्रारूप के अनुरूप नहीं था।
जांच के दौरान पाया गया कि सहर शेख के पिता और चाचा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के निवासी थे। उन्हें नियमों के तहत प्रवासियों वाला फॉर्म-10 प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। लेकिन शेख ने कथित तौर पर महाराष्ट्र के मूल निवासियों के लिए आरक्षित फॉर्म-8 के तहत प्रमाण पत्र प्राप्त किया। आरोप है कि इसके लिए शेख ने दस्तावेजों में हेरफेर की।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में इसी कथित फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके सहर शेख के लिए भी जाति प्रमाण पत्र बनवाया गया था। इसके अलावा, परिवार ठाणे जिले में रहता है, लेकिन सहर शेख का प्रमाण पत्र मुंबई शहर कलेक्टर कार्यालय से बनवाया गया है।
तहसीलदार ने प्रमाणपत्रों को तुरंत रद्द करने और यूनुस शेख के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है।
क्या छिन जाएगा पार्षद पद?
इस पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जो सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद ने दर्ज कराई थी। वह भी मुंब्रा के वार्ड-30 से चुनावी मैदान में थीं और एनसीपी (अजित पवार गुट) की उम्मीदवार थीं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सहर शेख ने फर्जी दस्तावेजों से बनवाए गए जाति प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ा। इसलिए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसलिए अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो सहर शेख की नगरसेविका की कुर्सी खतरे में आ सकती है।


