8 महीने बाद मिली पेंशन, कलेक्टर को गले लगाया:बुजुर्गों को सौंपे स्वीकृति आदेश, दमोह में महिलाओं से माफी भी मांगी

8 महीने बाद मिली पेंशन, कलेक्टर को गले लगाया:बुजुर्गों को सौंपे स्वीकृति आदेश, दमोह में महिलाओं से माफी भी मांगी

दमोह के वृद्धाश्रम में पिछले 8 महीने से पेंशन का इंतजार कर रहे बुजुर्गों के लिए शुक्रवार की शाम खुशियां लेकर आई। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव खुद आश्रम पहुंचे और सभी बुजुर्गों को पेंशन मंजूरी के कागज सौंपे। पेंशन शुरू होने की खबर सुनकर बुजुर्ग इतने भावुक हो गए कि उन्होंने कलेक्टर को गले लगा लिया और खूब आशीर्वाद दिया। आश्रम की कुछ महिलाओं ने तो कलेक्टर को प्यार से ‘कन्हैया’ तक कह डाला और भगवान से उनकी तरक्की की दुआ मांगी। बुजुर्गों का यह प्यार देखकर कलेक्टर भी भावुक हो गए। उन्होंने बड़े बड़प्पन के साथ बुजुर्गों से माफी भी मांगी कि प्रशासन की गलती की वजह से उन्हें 8 महीने तक परेशान होना पड़ा। उन्होंने कहा, “अच्छा काम करने पर जब माता-पिता जैसा आशीर्वाद मिलता है, तो बहुत सुकून मिलता है।” कैसे सुलझा मामला? कुछ दिन पहले जब कलेक्टर आश्रम के दौरे पर आए थे, तब बुजुर्गों ने उन्हें बताया था कि कई बार फॉर्म भरने के बाद भी उनकी पेंशन नहीं बन पा रही है। इस पर कलेक्टर ने तुरंत एक अधिकारी को आश्रम भेजा, सबका ई-केवाईसी (जरूरी कागजी काम) करवाया और पेंशन पास करवाई। ‘सेवा और आशीर्वाद’ अभियान की शुरुआत कलेक्टर ने बताया कि एक सर्वे में पता चला है कि जिले में करीब 1664 बुजुर्ग ऐसे हैं जो हकदार तो हैं, पर उन्हें पेंशन नहीं मिल रही। इसके लिए उन्होंने ‘सेवा एवं आशीर्वाद’ नाम से एक प्रोग्राम शुरू करने का फैसला लिया है। अब गांव-गांव और शहरों में कैंप लगाकर ऐसे सभी बुजुर्गों की पेंशन शुरू करवाई जाएगी। अस्पताल में अचानक पहुंचे कलेक्टर, मचा हड़कंप वृद्धाश्रम के बाद कलेक्टर अचानक जिला अस्पताल पहुंच गए, जिससे वहां हड़कंप मच गया। हालांकि, पिछली बार के मुकाबले इस बार उन्हें व्यवस्थाएं काफी अच्छी मिलीं। जो कमियां उन्होंने पहले बताई थीं, उन्हें सुधार लिया गया था। बस कुछ बिस्तरों पर बेडशीट नहीं मिली, जिसके लिए उन्होंने अस्पताल मैनेजमेंट को सख्त निर्देश दिए कि और सुधार करें ताकि मरीजों को कोई दिक्कत न हो।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *