Patrika Exclusive: छत्तीसगढ़ के 34 हजार जल स्रोतों की मैपिंग, चित्रकोट-तीरथगढ़ समेत झरनों का डेटाबेस तैयार, देखें

Patrika Exclusive: छत्तीसगढ़ के 34 हजार जल स्रोतों की मैपिंग, चित्रकोट-तीरथगढ़ समेत झरनों का डेटाबेस तैयार, देखें

रायपुर@सुबोध झा। Water Bodies Mapping: केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जारी देश की पहली जल निकाय गणना और राष्ट्रीय जल संसाधन रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के 34000 जल निकायों को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया है। इनमें राज्य के वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों में बहने वाले प्राकृतिक झरने, जलप्रपात, सोता, तालाब, बांध और जलाशय शामिल हैं। राष्ट्रीय स्तर पर तैयार इस व्यापक डेटाबेस में छत्तीसगढ़ के बहुमूल्य जल संसाधनों की स्थिति का विस्तृत विवरण दर्ज किया गया है, जिससे राज्य में जल संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक इको-टूरिज्म को भी नया संबल मिलेगा।

आंकड़ों के आईने में छत्तीसगढ़ के जल स्रोत

  • कुल जल निकाय : 34000
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति: 33519
  • जल निकाय (98.6%) ग्रामीण और वनांचल बेल्ट में स्थित हैं।
  • नक्सल/संवेदनशील और आदिवासी क्षेत्र: 13647
  • जल स्रोत (40.1%) नक्सल प्रभावित अंदरूनी क्षेत्रों में और 12355 (36.3%) जनजातीय बहुल इलाकों में दर्ज किए गए हैं।
  • सक्रिय उपयोग में जल स्रोत: इनमें से 28976 (85.2%) जल निकाय पेयजल, निस्तारी, मत्स्य पालन और सिंचाई के लिए नियमित उपयोग में हैं।

छत्तीसगढ़ के प्रमुख झरने और जलप्रपात

चित्रकोट जलप्रपात (बस्तर): भारत का ‘नाइग्रा’ कहे जाने वाले इस प्राकृतिक जलप्रपात के मुख्य जलग्रहण क्षेत्र और इंद्रावती नदी के सोतों का डेटा शामिल है।

तीरथगढ़ एवं कांगेर धारा (बस्तर): कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान स्थित प्राकृतिक झरनों की जलधारा और गुफा जल-स्रोतों का आंकलन।

अमृतधारा एवं अकुरी नाला (मनेंद्रगढ़): हसदेव नदी बेसिन से जुड़े इन प्राकृतिक झरनों के पुनरुद्धार और बारहमासी प्रवाह प्रबंधन को केंद्र में रखा गया है।

रक्सगंडा जलप्रपात (सूरजपुर/सरगुजा): रिहंद नदी पर स्थित इस प्राकृतिक जलप्रपात के आसपास के जलग्रहण क्षेत्र की मैपिंग।

चिरमिरी व जशपुर के प्राकृतिक सोते: जशपुर (रानी दाह, कोटमी) और चिरमिरी के पहाड़ी इलाकों में स्थित उन 17 से अधिक दूरस्थ आदिवासी बस्तियों के प्राकृतिक झरनों को शामिल किया गया है।

तामड़ा घूमर एवं महादेव घूमर (चित्रकूट बेल्ट): वर्षा ऋतु के बाद भी प्रवाह बनाए रखने के लिए स्प्रिंगशेड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट में शामिल।

झरनों का जलस्तर घटने की समस्या

पहाड़ी इलाकों में मानसूनी बारिश के बाद झरनों का जलस्तर घटने की समस्या को देखते हुए जलशक्ति मंत्रालय अपने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत इन झरनों के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में विशेष संरचनाएं बनाएगा। कंटूर ट्रेंच और चेक डैम के जरिए बारिश के पानी को भूगर्भ में उतारा जाएगा, जिससे प्राकृतिक झरनों में साल भर पानी का बहाव बना रहेगा।

पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़त

34000 जल निकायों और प्राकृतिक झरनों का वैज्ञानिक डेटाबेस तैयार होने से राज्य सरकार के लिए संरक्षण की नीतियां बनाना आसान होगा। जब सुदूर वनांचल के ये झरने बारहमासी बहेंगे, तो स्थानीय आदिवासी युवाओं को गाइड, होम-स्टे और टूरिज्म से आजीविका के नए साधन मिलेंगे। केंद्र की यह रिपोर्ट छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक जल संसाधनों के वैज्ञानिक संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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