बेगूसराय जिले के गढ़पुरा स्थित बाबा हरिगिरि धाम के प्रबंधन और विकास को लेकर बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने बड़ा फैसला लिया है। परिषद ने मंदिर के सुचारू संचालन और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अगले 5 साल के लिए एक नई स्थायी न्यास समिति का गठन किया है। इस नई व्यवस्था के तहत प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करते हुए बखरी के SDO को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। बखरी DSP को उपाध्यक्ष और विकास कुमार सिंघानिया को सचिव बनाया गया है। कोषाध्यक्ष शशिकांत प्रसाद वर्मा और सदस्य दीपांशु कुमार, चंदन यादव, रंजीत कुमार, अशोक सहनी, कमल किशोर झा, संजीत चौधरी, शिवनारायण झा बने हैं। धार्मिक न्यास परिषद की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार बाबा हरिगिरि धाम के लिए पूर्व में गठित समिति का कार्यकाल समाप्त हो गया था। इसी बीच समिति के अध्यक्ष रहे सुभाष यादव सहित चार सदस्यों के निधन के कारण प्रबंधन में रिक्तता आ गई थी। श्रावणी मेला और पटना हाईकोर्ट के निर्देशों के आलोक में पुरानी समिति को भंग कर नई कार्य योजना तैयार की गई है। धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन की ओर से जारी आदेश में मंदिर संचालन के लिए कड़े नियम और प्रबंधन के लिए सख्त मास्टर प्लान और नियमावली तैयार की गई है। जिससे पारदर्शिता बनी रहे। मंदिर का वित्तीय लेन-देन अब केवल अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। बैंक खाते का अपडेटेड विवरण हर महीने एसडीओ के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। हर तीन महीने पर समीक्षा होगी समिति को हर तीन महीने में अपनी आय और व्यय का पूरा ब्योरा परिषद को भेजना होगा। परिषद इन विवरणों की त्रैमासिक समीक्षा करेगी। मंदिर परिसर में रखे दान-पात्रों को निर्धारित तिथि पर केवल अधिकृत सदस्यों की मौजूदगी में खोला जाएगा और राशि तुरंत बैंक में जमा कराई जाएगी। नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि पूजा के नाम पर भक्तों से कोई जबरन वसूली नहीं होगी। महिला दर्शनार्थियों की सुविधा और मंदिर की गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। न्यास समिति ही मंदिर के पुजारी की अर्हता(एलिजिबिलिटी) तय करेगी और उनकी नियुक्ति करेगी। पुजारियों का वेतन न्यास कोष से दिया जाएगा। मनमानी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी परिषद ने आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी है कि न्यास समिति या उसका कोई भी सदस्य मंदिर की किसी भी चल-अचल संपत्ति या भूमि का हस्तांतरण, बिक्री या लीज पर देने का अधिकार नहीं रखेगा। यदि ऐसा किया जाता है, तो उसे अवैध माना जाएगा और संबंधित सदस्यों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शपथ-पत्र में बताना होगा कि कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है समिति में शामिल सभी सदस्यों का पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया है। सभी सदस्यों को एक शपथ-पत्र देना होगा कि वे मंदिर क्षेत्र के निवासी हैं। उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अगर भविष्य में कोई जानकारी गलत पाई जाती है या कोई सदस्य न्यास के हितों के प्रतिकूल कार्य करता है, तो उसकी सदस्यता तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। नई समिति को निर्देश दिया गया है कि वे मंदिर के विकास, बजट और ऑडिट रिपोर्ट समय-समय पर परिषद को भेजें। किसी भी नए निर्माण कार्य के लिए परिषद से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह नई व्यवस्था बाबा हरिगिरि धाम के बुनियादी ढांचे को सुधारने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बेगूसराय जिले के गढ़पुरा स्थित बाबा हरिगिरि धाम के प्रबंधन और विकास को लेकर बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने बड़ा फैसला लिया है। परिषद ने मंदिर के सुचारू संचालन और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अगले 5 साल के लिए एक नई स्थायी न्यास समिति का गठन किया है। इस नई व्यवस्था के तहत प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करते हुए बखरी के SDO को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। बखरी DSP को उपाध्यक्ष और विकास कुमार सिंघानिया को सचिव बनाया गया है। कोषाध्यक्ष शशिकांत प्रसाद वर्मा और सदस्य दीपांशु कुमार, चंदन यादव, रंजीत कुमार, अशोक सहनी, कमल किशोर झा, संजीत चौधरी, शिवनारायण झा बने हैं। धार्मिक न्यास परिषद की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार बाबा हरिगिरि धाम के लिए पूर्व में गठित समिति का कार्यकाल समाप्त हो गया था। इसी बीच समिति के अध्यक्ष रहे सुभाष यादव सहित चार सदस्यों के निधन के कारण प्रबंधन में रिक्तता आ गई थी। श्रावणी मेला और पटना हाईकोर्ट के निर्देशों के आलोक में पुरानी समिति को भंग कर नई कार्य योजना तैयार की गई है। धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन की ओर से जारी आदेश में मंदिर संचालन के लिए कड़े नियम और प्रबंधन के लिए सख्त मास्टर प्लान और नियमावली तैयार की गई है। जिससे पारदर्शिता बनी रहे। मंदिर का वित्तीय लेन-देन अब केवल अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। बैंक खाते का अपडेटेड विवरण हर महीने एसडीओ के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। हर तीन महीने पर समीक्षा होगी समिति को हर तीन महीने में अपनी आय और व्यय का पूरा ब्योरा परिषद को भेजना होगा। परिषद इन विवरणों की त्रैमासिक समीक्षा करेगी। मंदिर परिसर में रखे दान-पात्रों को निर्धारित तिथि पर केवल अधिकृत सदस्यों की मौजूदगी में खोला जाएगा और राशि तुरंत बैंक में जमा कराई जाएगी। नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि पूजा के नाम पर भक्तों से कोई जबरन वसूली नहीं होगी। महिला दर्शनार्थियों की सुविधा और मंदिर की गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। न्यास समिति ही मंदिर के पुजारी की अर्हता(एलिजिबिलिटी) तय करेगी और उनकी नियुक्ति करेगी। पुजारियों का वेतन न्यास कोष से दिया जाएगा। मनमानी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी परिषद ने आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी है कि न्यास समिति या उसका कोई भी सदस्य मंदिर की किसी भी चल-अचल संपत्ति या भूमि का हस्तांतरण, बिक्री या लीज पर देने का अधिकार नहीं रखेगा। यदि ऐसा किया जाता है, तो उसे अवैध माना जाएगा और संबंधित सदस्यों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शपथ-पत्र में बताना होगा कि कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है समिति में शामिल सभी सदस्यों का पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया है। सभी सदस्यों को एक शपथ-पत्र देना होगा कि वे मंदिर क्षेत्र के निवासी हैं। उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अगर भविष्य में कोई जानकारी गलत पाई जाती है या कोई सदस्य न्यास के हितों के प्रतिकूल कार्य करता है, तो उसकी सदस्यता तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। नई समिति को निर्देश दिया गया है कि वे मंदिर के विकास, बजट और ऑडिट रिपोर्ट समय-समय पर परिषद को भेजें। किसी भी नए निर्माण कार्य के लिए परिषद से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह नई व्यवस्था बाबा हरिगिरि धाम के बुनियादी ढांचे को सुधारने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


