राजस्थान का खूबसूरत शहर जैसलमेर, जिसे पूरी दुनिया ‘गोल्डन सिटी’ के नाम से जानती है, अब अपनी सफाई को लेकर एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि लोग सड़कों पर चलते-फिरते थूक देते हैं या घर का कचरा चुपके से गली के कोने में डाल देते हैं। लेकिन अब ऐसा करना भारी पड़ेगा, क्योंकि नगर परिषद ने पूरे शहर में 250 से ज्यादा आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला किया है। नगर परिषद के आयुक्त लजपाल सिंह सोढ़ा ने कहा कि शहर को साफ रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया, “हमने कैमरों का ऑर्डर दे दिया है और दो महीने में सिस्टम चालू हो जाएगा। हमारा मकसद लोगों को परेशान करना या उनसे पैसे वसूलना नहीं है, बल्कि हम चाहते हैं कि लोग खुद कचरा न फैलाएं और सफाई के नियम मानें। जो गंदगी फैलाएगा, उससे सख्ती से जुर्माना लिया जाएगा ताकि जैसलमेर आने वाले सीजन तक बिल्कुल चमकता हुआ नजर आए। नगर परिषद का ‘सवा तीन करोड़’ का प्लान नगर परिषद ने शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करीब 3.25 करोड़ रुपए का एक बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस पैसे से शहर के हर मुख्य चौराहे, गली और पर्यटन स्थलों पर हाई-टेक कैमरे लगाए जा रहे हैं। आयुक्त लजपाल सिंह का कहना है कि काम शुरू करने के आदेश दे दिए गए हैं और अगले 60 दिनों के अंदर पूरे शहर की निगरानी इन कैमरों के जरिए शुरू हो जाएगी। इसका मतलब है कि दो महीने बाद जैसलमेर का चप्पा-चप्पा ‘तीसरी आंख’ की नजर में होगा। कैसे कटेगा चालान? समझिए पूरी प्रक्रिया अक्सर लोग रात के अंधेरे में या सुनसान जगह देखकर खाली प्लाटों में कचरा फेंक देते हैं। कई दुकानदार भी अपनी दुकान की सफाई करके कचरा बाहर सड़क पर ही छोड़ देते हैं। अब इन कैमरों की मदद से ऐसे लोगों की पहचान करना बहुत आसान हो जाएगा। वीडियो से पहचान: अगर कोई व्यक्ति सड़क पर थूकते या कचरा फेंकते हुए कैमरे में कैद होता है, तो नगर परिषद की टीम उस वीडियो फुटेज को चेक करेगी। सीधे घर पहुंचेगा चालान: वीडियो के आधार पर उस व्यक्ति या दुकान की पहचान की जाएगी। जैसे ही पहचान पक्की होगी, नगर परिषद का स्टाफ सीधे उस व्यक्ति के घर या दुकान पर जाकर जुर्माने का नोटिस थमा देगा। नगर परिषद में बनेगा 24 घंटे चलने वाला ‘कंट्रोल रूम’ इन कैमरों को चलाने के लिए नगर परिषद के दफ्तर में ही एक बड़ा कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। यहाँ बड़ी-बड़ी स्क्रीन्स लगाई जाएंगी, जहाँ कर्मचारी शिफ्टों में बैठकर दिन-रात शहर की लाइव वीडियो देखेंगे। जैसे ही किसी स्क्रीन पर कचरे का ढेर दिखेगा, कंट्रोल रूम तुरंत सफाई टीम को सूचना देगा। खबर मिलते ही सफाई कर्मचारी कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुँचेंगे और उस जगह को साफ कर देंगे। इससे शहर में कहीं भी गंदगी जमा नहीं रह पाएगी। पर्यटन स्थलों पर रहेगी खास नजर जैसलमेर की कमाई का बड़ा हिस्सा पर्यटन से आता है। विदेशी मेहमानों के सामने शहर की गंदी छवि न बने, इसलिए परिषद ने उन जगहों को चुना है जहाँ सैलानी सबसे ज्यादा जाते हैं। इसमें शामिल हैं: सोनार किला और गड़सीसर झील: यहाँ सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। पटवों की हवेली: ऐतिहासिक इमारतों के पास सफाई को लेकर प्रशासन सख्त है। चौराहे: हनुमान चौराहा और गोपा चौक जैसे इलाकों में कैमरों से आवारा पशुओं पर भी नजर रखी जाएगी। 2 महीने में लग जाऐंगे कैमरे- आयुक्त लजपाल सिंह नगर परिषद के आयुक्त लजपाल सिंह सोढ़ा ने कहा कि शहर को साफ रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया, “हमने कैमरों का ऑर्डर दे दिया है और दो महीने में सिस्टम चालू हो जाएगा। हमारा मकसद लोगों को परेशान करना या उनसे पैसे वसूलना नहीं है, बल्कि हम चाहते हैं कि लोग खुद कचरा न फैलाएं और सफाई के नियम मानें। जो गंदगी फैलाएगा, उससे सख्ती से जुर्माना लिया जाएगा ताकि जैसलमेर आने वाले सीजन तक बिल्कुल चमकता हुआ नजर आए।”


