International Labour Day : तपती दोपहरी में जिम्मेदारियों का बोझ उठाते 70 साल के तीरथदास, इस दिल छू लेने वाले दृश्य में छिपा है बड़ा संदेश

International Labour Day : तपती दोपहरी में जिम्मेदारियों का बोझ उठाते 70 साल के तीरथदास, इस दिल छू लेने वाले दृश्य में छिपा है बड़ा संदेश

International Labour Day : आज 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस है। राजस्थान सहित पूरे देश में आज 1 मई को मजदूर उत्सव मना रहे हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस से एक दिन पहले यानि 30 अप्रेल को एक कमाल का मार्मिक दृश्य दिखा, जिसे देखकर लोग भावुक हो गए। पर इस दृश्य में हौसले के आगे उम्र हारी है और जीवन से जंग है जारी…।

आसमान से बरसती आग, चेहरे पर गहरी झुर्रियां, माथे से टपकता पसीना और तपती सड़क पर पिघलती चप्पलों के बीच बढ़ते कदम… कुछ ऐसा ही मार्मिक दृश्य गुरुवार दोपहर पड़ाव क्षेत्र में नजर आया। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस से एक दिन पहले 70 वर्षीय तीरथदास तुलसानी हाथ ठेले में कबाड़ का सामान ढोते दिखे। उम्र की थकान और भीषण गर्मी भी उनके हौसलों को थाम नहीं पाई। जिंदगी की गाड़ी खींचने का उनका यह संघर्ष हर गुजरने वाले को ठहरकर सोचने पर मजबूर कर रहा था।

माली मोहल्ला में किराए के मकान में रहने वाले तीरथदास के लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता है। पत्नी सुनिता (65 वर्ष) के साथ उनका जीवन सीमित आय में गुजर रहा है। परिवार की जिम्मेदारियों का भार भी कम नहीं। एक बेटे की बीमारी से मृत्यु हो चुकी है, दूसरा अलग रहता है, जबकि तीसरा बेटा कुछ वर्ष पहले लकवाग्रस्त हो गया। वह अब दरगाह क्षेत्र में कपड़े के थैले बेचकर किसी तरह अपना गुजारा करता है।

दिनभर में मुश्किल से 300 रुपए तक की हो पाती है आमदनी

तीरथदास ठेले पर कबाड़ी का सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते हैं। वे कहते हैं कि एक चक्कर के 50 रुपए मिलते हैं और दिनभर में मुश्किल से 300 रुपए तक की आमदनी हो पाती है। इसी से घर का किराया, राशन और अन्य जरूरतें पूरी करनी होती हैं।

लेकिन जीवन है तो संघर्ष भी जरूरी है…

तीरथदास कहते हैं, ‘महंगाई के इस दौर में इतना कमाना काफी नहीं, लेकिन जीवन है तो संघर्ष भी जरूरी है।’ उनके माथे से टपकता पसीना केवल श्रम नहीं, बल्कि उस जज्बे की कहानी कहता है जो हर विपरीत परिस्थिति में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस

1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है। यह दिन मजदूरों की मेहनत और अधिकारों को सम्मान देने के लिए है। इसकी शुरुआत 19वीं सदी के आंदोलन से हुई। यह हमें समानता, सुरक्षित कामकाजी माहौल और श्रमिक अधिकारों के महत्व की याद दिलाता है।

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