असम CM हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणी पर बांग्लादेश में नाराजगी, भारतीय उच्चायुक्त के समक्ष दर्ज कराई आपत्ति

असम CM हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणी पर बांग्लादेश में नाराजगी, भारतीय उच्चायुक्त के समक्ष दर्ज कराई आपत्ति

Bangladesh protest Assam CM Himanta Biswa Sarma Statement: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की हालिया टिप्पणी को लेकर बांग्लादेश ने कार्यवाहक भारतीय उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब किया और अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। स्थानीय अखबार ‘ढाका ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह राजनयिक कदम असम राज्य से लोगों की कथित स्वदेश (बांग्लादेश) वापसी से संबंधित बयानों के बाद उठाया गया है। बांग्लादेशी अधिकारियों ने हालिया सार्वजनिक टिप्पणियों की प्रकृति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे बयान द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करते समय संयम बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।

क्या है मामला?

भारत और बांग्लादेश के बीच यह राजनयिक तनाव 26 अप्रैल को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा दिए गए एक बयान के बाद उत्पन्न हुआ। उन्होंने कहा था कि असम में 20 विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया और बाद में उन्हें बांग्लादेश वापस भेज दिया गया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा की गई एक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘लातों के भूत बातों से नहीं मानते। हम असम से ऐसे घुसपैठियों को बाहर निकालते हैं जब वे स्वयं नहीं जाते।’

उन्होंने ‘X’ पोस्ट में आगे लिखा, ‘कल रात 20 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को ‘धक्का देकर वापस’ भेज दिया गया। असम लड़ेगा, यह प्रक्रिया जारी रहेगी।’

बांग्लादेश ने क्या कहा?

बांग्लादेश का कहना है कि इस प्रकार के सार्वजनिक बयान दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में तनाव पैदा कर सकते हैं। ‘ढाका ट्रिब्यून’ के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करते समय संयम और जिम्मेदारी बनाए रखना आवश्यक है, ताकि सहयोग की भावना प्रभावित न हो।

बांग्लादेश से मधुर संबंध क्यों नहीं चाहते सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि वे प्रार्थना करते हैं कि मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध वैसी ही स्थिति में रहें, जैसे पहले थे, और उनमें कोई विशेष सुधार न हो। उन्होंने दावा किया कि भारत से कई बार ‘घुसपैठियों’ को रात के समय बांग्लादेश में वापस भेजा जाता है।

उनका यह भी कहना था कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) कई बार ऐसे लोगों को 10 से 40 दिनों तक अपने पास रखता है और जब बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (BGB) के जवान मौजूद नहीं होते, तब उन्हें सीमा पार ‘पुश-बैक’ किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि यदि दोनों देशों के संबंध अधिक बेहतर हो जाते हैं, तो इस प्रकार की कार्रवाइयों में कठिनाई आ सकती है। उनके अनुसार, वर्तमान स्थिति में सीमा पर सख्ती बनाए रखना असम के हित में है।

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