पलामू के छतरपुर में जिस बच्ची ने अभी दुनिया में आंखें खोली भी नहीं थीं, उसे जिंदगी की पहली रात में ही मौत के मुहाने पर छोड़ दिया गया। न शरीर पर कपड़े थे और न ठंड व बारिश से बचने का कोई इंतजाम। तेज बारिश के बीच धान के खेत की मेढ़ पर पड़ी नवजात ठंड से तड़प रही थी। पास ही देवी मंदिर था और पूजा की सामग्री लेकर कुछ महिलाएं मौजूद थीं। बच्ची को इस तरह सुनसान जगह पर छोड़ने की वजह सामने नहीं आई है, लेकिन परिस्थितियां ऐसी थीं कि ग्रामीणों को उसकी बलि दिए जाने की आशंका हुई। समय रहते युवकों की नजर बच्ची पर पड़ गई। उन्होंने शोर मचाया तो दो महिलाएं मौके से भाग गईं, जबकि बच्ची की मां को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। इसके बाद बच्ची को गर्म कपड़े में लपेटकर मां के साथ अस्पताल पहुंचाया। गंभीर हालत में बच्ची को आईसीयू में भर्ती किया गया है। घटना शुक्रवार रात करीब नौ बजे छतरपुर थाना क्षेत्र के मनहूं गांव की है। बच्ची को मेढ़ पर छोड़ पूजा की तैयारी कर रही थीं महिलाएं ग्रामीणों के अनुसार, तीन महिलाएं एक झोले में नवजात बच्ची को लेकर गांव से दूर स्थित देवी मंदिर के पास पहुंची थीं। लगातार बारिश के कारण मंदिर के आसपास धान के खेतों में पानी भर गया था। खेतों में मछलियां आने के चलते कुछ युवक वहां मछली पकड़ रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर मंदिर के पास मौजूद महिलाओं पर पड़ी। महिलाओं की गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो युवकों ने ध्यान से देखा। बताया जाता है कि महिलाएं बच्ची को खेत की मेढ़ पर रखकर झोले से पूजा सामग्री निकाल रही थीं। बच्ची को बिना कपड़ों के बारिश और ठंड के बीच पड़ा देखकर युवकों ने शोर मचा दिया। इसके बाद दो महिलाएं मौके से भाग निकलीं, जबकि एक महिला वहीं बैठी रही। ग्रामीणों ने उसे पकड़कर पूछताछ शुरू की। उसकी पहचान छतरपुर नगर पंचायत के मंदेया गांव स्थित भल्ही टोला निवासी रविंद्र उरांव की पत्नी मंजू देवी के रूप में हुई। ग्रामीणों का दावा है कि बच्ची को जन्म भी उसी ने दिया था। महिला के पास पॉलीथिन में सिंदूर, टिकली, कंघी और पूजा-पाठ से जुड़ी अन्य सामग्री मिली। इन्हीं परिस्थितियों के कारण ग्रामीणों को बच्ची की बलि दिए जाने का संदेह हुआ। दंपती के पहले से हैं चार बच्चे ग्रामीणों के मुताबिक, मंजू देवी के पति रविंद्र उरांव मजदूरी करते हैं। दंपती के पहले से दो बेटे और दो बेटियां हैं। नवजात बच्ची उनकी पांचवीं संतान है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बच्ची को मंदिर के पास ले जाने के पीछे बलि देने की मंशा थी या कोई दूसरी वजह। मौके से फरार हुई दोनों महिलाएं कौन थीं, उनकी मंजू देवी से क्या संबंध है और इस पूरे घटनाक्रम में उनकी क्या भूमिका थी।
पुलिस अब सभी पहलुओं की जांच कर रही है। गौरतलब है कि हाल ही में मेदिनीनगर स्थित पीएमसीएच अस्पताल के पास एक नवजात बच्चे का शव कुत्ते के मुंह में देखा गया था। वीडियो वायरल होने के बाद उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने जांच कराई थी। इसके बाद संबंधित निजी अस्पताल को सील किया गया और चिकित्सक समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। अब छतरपुर में नवजात बच्ची के संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की घटना ने एक बार फिर इलाके में सनसनी फैला दी है। फिलहाल बच्ची और उसकी मां चिकित्सकों की निगरानी में हैं। पलामू के छतरपुर में जिस बच्ची ने अभी दुनिया में आंखें खोली भी नहीं थीं, उसे जिंदगी की पहली रात में ही मौत के मुहाने पर छोड़ दिया गया। न शरीर पर कपड़े थे और न ठंड व बारिश से बचने का कोई इंतजाम। तेज बारिश के बीच धान के खेत की मेढ़ पर पड़ी नवजात ठंड से तड़प रही थी। पास ही देवी मंदिर था और पूजा की सामग्री लेकर कुछ महिलाएं मौजूद थीं। बच्ची को इस तरह सुनसान जगह पर छोड़ने की वजह सामने नहीं आई है, लेकिन परिस्थितियां ऐसी थीं कि ग्रामीणों को उसकी बलि दिए जाने की आशंका हुई। समय रहते युवकों की नजर बच्ची पर पड़ गई। उन्होंने शोर मचाया तो दो महिलाएं मौके से भाग गईं, जबकि बच्ची की मां को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। इसके बाद बच्ची को गर्म कपड़े में लपेटकर मां के साथ अस्पताल पहुंचाया। गंभीर हालत में बच्ची को आईसीयू में भर्ती किया गया है। घटना शुक्रवार रात करीब नौ बजे छतरपुर थाना क्षेत्र के मनहूं गांव की है। बच्ची को मेढ़ पर छोड़ पूजा की तैयारी कर रही थीं महिलाएं ग्रामीणों के अनुसार, तीन महिलाएं एक झोले में नवजात बच्ची को लेकर गांव से दूर स्थित देवी मंदिर के पास पहुंची थीं। लगातार बारिश के कारण मंदिर के आसपास धान के खेतों में पानी भर गया था। खेतों में मछलियां आने के चलते कुछ युवक वहां मछली पकड़ रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर मंदिर के पास मौजूद महिलाओं पर पड़ी। महिलाओं की गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो युवकों ने ध्यान से देखा। बताया जाता है कि महिलाएं बच्ची को खेत की मेढ़ पर रखकर झोले से पूजा सामग्री निकाल रही थीं। बच्ची को बिना कपड़ों के बारिश और ठंड के बीच पड़ा देखकर युवकों ने शोर मचा दिया। इसके बाद दो महिलाएं मौके से भाग निकलीं, जबकि एक महिला वहीं बैठी रही। ग्रामीणों ने उसे पकड़कर पूछताछ शुरू की। उसकी पहचान छतरपुर नगर पंचायत के मंदेया गांव स्थित भल्ही टोला निवासी रविंद्र उरांव की पत्नी मंजू देवी के रूप में हुई। ग्रामीणों का दावा है कि बच्ची को जन्म भी उसी ने दिया था। महिला के पास पॉलीथिन में सिंदूर, टिकली, कंघी और पूजा-पाठ से जुड़ी अन्य सामग्री मिली। इन्हीं परिस्थितियों के कारण ग्रामीणों को बच्ची की बलि दिए जाने का संदेह हुआ। दंपती के पहले से हैं चार बच्चे ग्रामीणों के मुताबिक, मंजू देवी के पति रविंद्र उरांव मजदूरी करते हैं। दंपती के पहले से दो बेटे और दो बेटियां हैं। नवजात बच्ची उनकी पांचवीं संतान है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बच्ची को मंदिर के पास ले जाने के पीछे बलि देने की मंशा थी या कोई दूसरी वजह। मौके से फरार हुई दोनों महिलाएं कौन थीं, उनकी मंजू देवी से क्या संबंध है और इस पूरे घटनाक्रम में उनकी क्या भूमिका थी।
पुलिस अब सभी पहलुओं की जांच कर रही है। गौरतलब है कि हाल ही में मेदिनीनगर स्थित पीएमसीएच अस्पताल के पास एक नवजात बच्चे का शव कुत्ते के मुंह में देखा गया था। वीडियो वायरल होने के बाद उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने जांच कराई थी। इसके बाद संबंधित निजी अस्पताल को सील किया गया और चिकित्सक समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। अब छतरपुर में नवजात बच्ची के संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की घटना ने एक बार फिर इलाके में सनसनी फैला दी है। फिलहाल बच्ची और उसकी मां चिकित्सकों की निगरानी में हैं।

