न्यूजीलैंड को रग्बी की दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों में गिना जाता है। उसकी पुरुष टीम तीन बार और महिला टीम छह बार वर्ल्ड कप जीत चुकी है। इसके मुकाबले रग्बी में भारत की पहचान लगभग जीरो है। भारत अब तक रग्बी वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर सका है। एशियाई स्तर पर भी भारत शीर्ष टीमों में शामिल नहीं रहा है। ऐसे में 27 अक्टूबर को बिहार के राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में भारतीय अंडर-20 महिला टीम ने जो किया, उसने सबका ध्यान खींचा। भारतीय लड़कियों ने न्यूजीलैंड की युवा माओरी टीम को रग्बी सेवन्स के मुकाबले में 17-0 से हरा दिया। भारत ने हाफ टाइम तक 12-0 की बढ़त बना ली थी। दूसरे हाफ में भी न्यूजीलैंड की टीम भारतीय डिफेंस को भेदने में नाकाम रही। आखिर रग्बी की इतनी मजबूत परंपरा वाले देश की टीम के खिलाफ भारत को इतनी बड़ी जीत कैसे मिली? क्या यह न्यूजीलैंड की कमजोर टीम थी या भारतीय खिलाड़ियों की तैयारी और प्रदर्शन ने अंतर पैदा किया? 5 फैक्टर में समझते हैं इस नतीजे की पूरी कहानी। 1. यह न्यूजीलैंड की नेशनल अंडर-20 टीम नहीं, माओरी खिलाड़ियों का सांस्कृतिक दल था इस जीत को समझने के लिए सबसे पहले न्यूजीलैंड की टीम की पहचान जानना जरूरी है। राजगीर में भारत के खिलाफ खेलने वाली टीम न्यूजीलैंड की नियमित राष्ट्रीय अंडर-20 महिला टीम नहीं थी। यह न्यूजीलैंड के अलग-अलग हिस्सों से चुनी गई माओरी समुदाय की 24 युवा खिलाड़ियों वाली इनविटेशनल टीम थी। माओरी न्यूजीलैंड का मूल निवासी समुदाय है। इस दौरे का उद्देश्य केवल मुकाबले खेलना नहीं, बल्कि खेल के जरिए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों और रग्बी के विकास को बढ़ावा देना भी था। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों के 100 साल पूरे होने पर यह सीरीज आयोजित की गई थी। इसलिए भारत की जीत को न्यूजीलैंड की सीनियर टीम या उसकी नियमित राष्ट्रीय अंडर-20 टीम पर जीत बताना सही नहीं होगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय रग्बी की मजबूत संस्कृति वाले देश की युवा खिलाड़ियों को 17-0 से हराना भारतीय टीम के लिए बड़ी उपलब्धि है। 2. भारतीय लड़कियां पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी थीं भारत की जीत को सिर्फ न्यूजीलैंड की टीम की पृष्ठभूमि से नहीं समझा जा सकता। भारतीय महिला रग्बी में भी पिछले कुछ समय से सुधार हुआ है। इसका उदाहरण अक्टूबर में हुए एशियन गेम्स में देखने को मिला। भारत की सीनियर महिला रग्बी सेवन्स टीम ने पिछले एशियन गेम्स में छठा स्थान हासिल किया। यह एशियन गेम्स में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इससे पहले भारत ने 2022 के हांगझोउ एशियन गेम्स में सातवां स्थान हासिल किया था। एशियन गेम्स में भारत ने मलेशिया को 26-5 और सिंगापुर को 22-5 से हराया था। ध्यान रहे, यह सीनियर टीम का प्रदर्शन है, इसे राजगीर में खेलने वाली अंडर-20 टीम का व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं समझना चाहिए। लेकिन इससे भारतीय महिला रग्बी के डेवलपमेंट का अंदाजा जरूर मिलता है। 3. मुकाबला रग्बी सेवन्स का था, 15 खिलाड़ियों वाला पारंपरिक रग्बी नहीं भारत की जीत में फॉर्मेट का भी महत्व रहा। राजगीर में मुकाबला रग्बी सेवन्स का था। इसमें एक टीम के सात खिलाड़ी मैदान पर उतरते हैं, जबकि पारंपरिक रग्बी यानी 15-ए-साइड में हर टीम के 15 खिलाड़ी होते हैं। सेवन्स का मुकाबला भी काफी छोटा होता है। सेवन्स मैच 14 मिनट का होता है, जिसमें सात-सात मिनट के दो हाफ होते हैं। इसके मुकाबले 15-ए-साइड रग्बी 80 मिनट खेला जाता है। सेवन्स में मैदान पर खाली जगह अधिक होती है। खिलाड़ियों की गति, पासिंग, टैकल और तेजी से पोजिशन बदलने की क्षमता ज्यादा मायने रखती है। कम समय में मैच का रुख बदल सकता है। इसलिए इसे पारंपरिक रग्बी की ताकत का सीधा पैमाना नहीं माना जा सकता। 4. भारतीय खिलाड़ियों ने मैदान पर बेहतरीन खेल दिखाया फॉर्मेट और विरोधी टीम की पहचान अपनी जगह है, लेकिन 17-0 का स्कोर भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी दिखाता है। टीम ने पहले हाफ में 12 अंक बनाकर न्यूजीलैंड पर दबाव बनाया। भारतीय टीम की सबसे बड़ी खासियत उसका अनुशासित डिफेंस रहा। न्यूजीलैंड की खिलाड़ी एक भी अंक नहीं बना सकीं। रग्बी में विरोधी को स्कोर करने से रोकना आसान नहीं होता, क्योंकि खिलाड़ियों को लगातार टैकल, पोजिशनिंग और गेंद पर नियंत्रण बनाए रखना पड़ता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय टीम ने बेहतर टैकलिंग और रणनीतिक अनुशासन का प्रदर्शन किया। भारतीय खिलाड़ी अक्षया एनएस ने इसे अपने लिए जिंदगी में एक बार मिलने वाला अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने न्यूजीलैंड की टीमों को पहले सिर्फ वीडियो में खेलते देखा था। 5. न्यूजीलैंड के साथ प्रशिक्षण और अनुभव का भी मिला फायदा इस सीरीज को सिर्फ दो टीमों के बीच एक मैच के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत और न्यूजीलैंड के बीच रग्बी को विकसित करने के लिए सहयोग भी चल रहा है। मई 2026 में न्यूजीलैंड रग्बी के कोचिंग विशेषज्ञों ने भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में 35 भारतीय कोचों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था। इसका उद्देश्य भारत में कोचिंग की गुणवत्ता और रग्बी की तकनीकी समझ को बेहतर बनाना था। राजगीर दौरे में भी दोनों देशों की युवा टीमों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। खिलाड़ियों को एक-दूसरे की खेल शैली समझने और अनुभव साझा करने का अवसर मिला। ऐसे कार्यक्रम भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय रग्बी की गति, तकनीक और रणनीति से परिचित कराने में मदद करते हैं। भारत के लिए इस जीत के क्या मायने हैं? राजगीर की 17-0 की जीत को न्यूजीलैंड की रग्बी ताकत पर भारत की जीत कहना अतिशयोक्ति होगी। लेकिन इसे सामान्य मुकाबला मानकर नजरअंदाज करना भी सही नहीं होगा। भारत की महिला टीम ने दिखाया कि सही तैयारी, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बेहतर कोचिंग के जरिए वह मजबूत रग्बी संस्कृति वाले देशों की युवा टीमों को चुनौती दे सकती है। खास बात यह है कि भारत की सीनियर महिला टीम भी एशियन गेम्स में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुकी है। अब चुनौती इस प्रदर्शन को निरंतरता देने की है। भारत को ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मुकाबले, मजबूत घरेलू प्रतियोगिताएं, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं और युवा खिलाड़ियों के लिए स्पष्ट विकास प्रणाली तैयार करनी होगी। राजगीर में मिली जीत भारतीय महिला रग्बी के लिए एक अच्छा संकेत है। इसे मंजिल नहीं, बल्कि उस दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जाना चाहिए। ————————————————— भारत की महिला खिलाड़ियों की अचीवमेंट्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… मनीषा विमेंस वर्ल्ड रेसलिंग जीतने वाली पहली भारतीय, आखिरी 3 मिनट में जीता गोल्ड मनीषा भानवाला विमेंस वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उन्होंने शुक्रवार को कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में अमेरिका की एबिगेल नेट को 59 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में 8-6 से हराया। पढ़ें पूरी खबर
भारत ने रग्बी सुपरपावर न्यूजीलैंड को कैसे हरा दिया:राजगीर में भारतीय लड़कियां 17-0 से जीती, जानिए बड़े उलटफेर के टॉप-5 फैक्टर्स

