20 नवंबर से शुरू होगा मशाल कार्यक्रम:बिहार के 37 हजार स्कूलों तक पहुंचेगी खेल प्रतिभा पहचान पहल, इस बार CBSE स्कूल भी होंगे शामिल

20 नवंबर से शुरू होगा मशाल कार्यक्रम:बिहार के 37 हजार स्कूलों तक पहुंचेगी खेल प्रतिभा पहचान पहल, इस बार CBSE स्कूल भी होंगे शामिल

बिहार में स्कूली स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए ‘मशाल’ कार्यक्रम का आयोजन 20 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक किया जाएगा। इसके तहत राज्य के करीब 37 हजार मध्य और उच्च विद्यालयों के विद्यार्थियों को खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस बार CBSE स्कूल भी शामिल होंगे। बुधवार को खेल मंत्री श्रेयसी सिंह की अध्यक्षता में मशाल कार्यक्रम और एकलव्य खेल केंद्रों के संचालन की समीक्षा बैठक हुई। इसमें कार्यक्रम की तैयारियों, अधिक से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी और स्कूल स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान पर चर्चा की गई। पिछले साल 27 लाख विद्यार्थियों ने लिया था हिस्सा खेल विभाग के मुताबिक, पिछले वर्ष मशाल कार्यक्रम में राज्य के करीब 27 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था। इस बार कार्यक्रम की पहुंच और भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका संचालन शिक्षा विभाग और खेल विभाग संयुक्त रूप से करेंगे। कार्यक्रम के तहत विद्यालय स्तर से प्रतियोगिताएं शुरू होंगी। इसके बाद संकुल संसाधन केंद्र (सीआरसी), जिला और राज्य स्तर पर मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को अलग-अलग स्तरों पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। पांच खेलों में अंडर-14 और अंडर-16 के विद्यार्थी लेंगे हिस्सा फिलहाल मशाल कार्यक्रम में एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी, साइक्लिंग और वॉलीबॉल को शामिल किया गया है। इन खेलों में अंडर-14 और अंडर-16 आयु वर्ग के विद्यार्थी हिस्सा ले सकते हैं। समीक्षा बैठक में खेल मंत्री ने प्रतियोगिताओं में अन्य खेल विधाओं को भी शामिल करने पर जोर दिया, ताकि विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार खेल चुनने का मौका मिल सके। कार्यक्रम का उद्देश्य कम उम्र में प्रतिभाओं की पहचान करना, खिलाड़ियों के कौशल को विकसित करना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके जरिए भविष्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मजबूत श्रृंखला तैयार करने की भी योजना है। 44 एकलव्य केंद्रों में 800 से अधिक खिलाड़ी ले रहे प्रशिक्षण बैठक में एकलव्य खेल केंद्रों के संचालन की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में वर्तमान में 44 एकलव्य खेल केंद्र संचालित हैं, जहां 800 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। बैठक में खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, बेहतर खेल सुविधाएं और अपनी प्रतिभा निखारने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य इन केंद्रों के माध्यम से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार का नाम रोशन करने का लक्ष्य खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने विद्यार्थियों से मशाल कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह विद्यार्थियों के लिए अपनी खेल प्रतिभा दिखाने और उसे निखारने का महत्वपूर्ण अवसर है। राज्य सरकार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उनकी खेल यात्रा में हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर से ही खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें उचित प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन कर सकें। बिहार में स्कूली स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए ‘मशाल’ कार्यक्रम का आयोजन 20 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक किया जाएगा। इसके तहत राज्य के करीब 37 हजार मध्य और उच्च विद्यालयों के विद्यार्थियों को खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस बार CBSE स्कूल भी शामिल होंगे। बुधवार को खेल मंत्री श्रेयसी सिंह की अध्यक्षता में मशाल कार्यक्रम और एकलव्य खेल केंद्रों के संचालन की समीक्षा बैठक हुई। इसमें कार्यक्रम की तैयारियों, अधिक से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी और स्कूल स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान पर चर्चा की गई। पिछले साल 27 लाख विद्यार्थियों ने लिया था हिस्सा खेल विभाग के मुताबिक, पिछले वर्ष मशाल कार्यक्रम में राज्य के करीब 27 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था। इस बार कार्यक्रम की पहुंच और भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका संचालन शिक्षा विभाग और खेल विभाग संयुक्त रूप से करेंगे। कार्यक्रम के तहत विद्यालय स्तर से प्रतियोगिताएं शुरू होंगी। इसके बाद संकुल संसाधन केंद्र (सीआरसी), जिला और राज्य स्तर पर मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को अलग-अलग स्तरों पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। पांच खेलों में अंडर-14 और अंडर-16 के विद्यार्थी लेंगे हिस्सा फिलहाल मशाल कार्यक्रम में एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी, साइक्लिंग और वॉलीबॉल को शामिल किया गया है। इन खेलों में अंडर-14 और अंडर-16 आयु वर्ग के विद्यार्थी हिस्सा ले सकते हैं। समीक्षा बैठक में खेल मंत्री ने प्रतियोगिताओं में अन्य खेल विधाओं को भी शामिल करने पर जोर दिया, ताकि विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार खेल चुनने का मौका मिल सके। कार्यक्रम का उद्देश्य कम उम्र में प्रतिभाओं की पहचान करना, खिलाड़ियों के कौशल को विकसित करना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके जरिए भविष्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मजबूत श्रृंखला तैयार करने की भी योजना है। 44 एकलव्य केंद्रों में 800 से अधिक खिलाड़ी ले रहे प्रशिक्षण बैठक में एकलव्य खेल केंद्रों के संचालन की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में वर्तमान में 44 एकलव्य खेल केंद्र संचालित हैं, जहां 800 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। बैठक में खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, बेहतर खेल सुविधाएं और अपनी प्रतिभा निखारने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य इन केंद्रों के माध्यम से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार का नाम रोशन करने का लक्ष्य खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने विद्यार्थियों से मशाल कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह विद्यार्थियों के लिए अपनी खेल प्रतिभा दिखाने और उसे निखारने का महत्वपूर्ण अवसर है। राज्य सरकार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उनकी खेल यात्रा में हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर से ही खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें उचित प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन कर सकें।  

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