भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार दोपहर अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बीएसई सेंसेक्स दोपहर 2 बजे करीब 1150 अंक गिरकर 71,307 पर आ गया। एनएसई के प्रमुख सूचकांक निफ्टी-50 में भी करीब 350 अंक की गिरावट देखने को मिली और यह गिरकर 22,270 पर आ गया। सेंसेक्स आज 288 अंक की गिरावट के साथ खुला था। दोपहर 12 बजे के बाद बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के संकेत मिलते ही बाजार में अचानक दबाव बढ़ गया। महज एक घंटे की तेज बिकवाली में BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये घट गया। इसके बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट और गहरा गई।
आखिर बाजार में इतनी तेज बिकवाली क्यों हुई?
बाजार की इस गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अविनाश मेंटर रिसर्च के फाउंडर अविनाश गोरक्षकर के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव में ताजा बढ़ोतरी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल आया है। साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी दिन के निचले स्तरों से ऊपर लौट गई है। इन दोनों घटनाओं ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया।
ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट में तनाव पहले से ही बाजार के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई के संकेत ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने स्थानीय पत्रकारों से बातचीत में ईरान पर कड़े एक्शन लेने का संकेत दिया। बाजार की चिंता इसलिए बढ़ी, क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा होता है। इसका असर सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहता। महंगा कच्चा तेल कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है और मुनाफे पर दबाव डाल सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी बनी बाजार की चिंता
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भारतीय शेयर बाजार की परेशानी और बढ़ा दी। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड दिन के निचले स्तरों से करीब 0.75% ऊपर आई, जबकि 30 साल की यील्ड में भी 0.70% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड करीब 0.65% बढ़कर 5.674 तक पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब यह है कि अमेरिकी बॉन्ड में निवेश से मिलने वाला रिटर्न आकर्षक हो सकता है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशकों के पैसे का रुख शेयरों से बॉन्ड की तरफ मुड़ने का दबाव बन सकता है।
सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने भी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में इस उछाल को भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता की वजह बताया। उनके मुताबिक, पहले से सतर्क विदेशी निवेशकों के बीच ऊंची अमेरिकी यील्ड शेयर बाजार से विदेशी पूंजी के बाहर निकलने का दबाव बढ़ा सकती है।
फिर से 100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
गुरुवार दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर ब्रेंट क्रूड 2.47 फीसदी की बढ़त के साथ 100.55 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। तेल महंगा होने का असर कई कंपनियों की लागत पर पड़ता है। खासकर ऐसी कंपनियां जिनके कारोबार में ईंधन या कच्चे तेल की खपत ज्यादा है, उनकी लागत बढ़ सकती है। अगर कंपनियां इस बढ़ी लागत को ग्राहकों तक पूरी तरह नहीं पहुंचा पातीं, तो मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
भारत के लिए महंगा कच्चा तेल एक और वजह से अहम है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने पर आयात बिल, महंगाई और रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है। भारत के वित्त मंत्रालय ने भी सितंबर की आर्थिक समीक्षा में भू-राजनीतिक तनाव और ऊंचे कच्चे तेल को आयातित महंगाई और पूंजी प्रवाह के लिए जोखिम बताया है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)


