Gold Investment: सितंबर का महीना सोने के लिए अच्छा नहीं रहा। इस दौरान सोने की कीमत करीब 6.5 फीसदी गिर गई। यह जून के बाद सोने की सबसे खराब मंथली परफॉर्मेंस है। अब अक्टूबर शुरू हो चुका है और भारत में त्योहारों के साथ शादी का सीजन भी दस्तक दे रहा है। ऐसे में बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या सोना फिर से रफ्तार पकड़ पाएगा। सोने के लिए अक्टूबर में कई चीजें अहम रहेंगी। एक तरफ भारत में नवरात्रि, दशहरा, धनतेरस और दिवाली के दौरान सोने की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। दूसरी तरफ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर, कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर संकेत सोने की दिशा तय कर सकते हैं।
सितंबर में सोना क्यों टूटा?
सोने में सितंबर की गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी बॉन्ड मार्केट रहा। अमेरिका में सरकारी कर्ज और राजकोषीय घाटे को लेकर चिंता बढ़ने से बॉन्ड यील्ड में तेजी आई। जब बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो सोने जैसे ऐसे एसेट, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता, उनकी आकर्षकता कम हो जाती है। Giottus.com के सीईओ विक्रम सुब्बुराज के मुताबिक, 29 सितंबर को अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 5.293 फीसदी तक पहुंच गई। यह 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। उन्होंने कहा कि ऊंची रियल यील्ड से सोना और चांदी रखने की ऑपोर्च्युनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका सीधा दबाव कीमतों पर देखने को मिलता है।
डॉलर की मजबूती ने भी बढ़ाई परेशानी
अमेरिकी डॉलर में मजबूती भी सोने के लिए अच्छी खबर नहीं रही। सितंबर के अंत में डॉलर इंडेक्स तीन महीने से ज्यादा समय के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग पर दबाव बन सकता है। यानी सितंबर में सोने के सामने दोहरी चुनौती थी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊपर गई और डॉलर भी मजबूत हुआ। दोनों ने मिलकर सोने की कीमतों पर दबाव बनाया।
भू-राजनीतिक तनाव से भी बाजार में उथल-पुथल
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने भी बाजार को असमंजस में रखा। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत और संघर्ष विराम से जुड़े घटनाक्रम लगातार बदलते रहे। इसके साथ ही ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव ने भी महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ाई। आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर खरीदारी का फायदा मिलता है। लेकिन इस बार अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती जैसे फैक्टर सोने पर भारी पड़े।
अब अक्टूबर में सोने को किन चीजों से सपोर्ट मिल सकता है?
सितंबर की गिरावट के बावजूद जानकारों का मानना है कि सोने के लिए अक्टूबर में कई सपोर्टिंग फैक्टर मौजूद हैं। सबसे बड़ा घरेलू फैक्टर त्योहारी और शादी का सीजन है। भारत में दशहरा, धनतेरस और दिवाली के दौरान सोने और आभूषणों की खरीदारी बढ़ती है। इसके बाद शादी का सीजन भी शुरू होता है। सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की मांग, महंगाई और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी सोने को सपोर्ट दे रही है। हालांकि, फेड की सख्त नीति और मजबूत डॉलर सोने में तेज बढ़त को सीमित कर सकते हैं।
अक्टूबर में अमेरिकी फेड का फैसला भी अहम
अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर भी है। अगस्त की PCE महंगाई के आंकड़ों ने दरों को लेकर तस्वीर को थोड़ा जटिल बनाया है। Monarch PMS के असिस्टेंट फंड मैनेजर ध्रुव जोगलेकर के मुताबिक, अगस्त के कोर PCE महंगाई आंकड़े उम्मीद से नरम रहे। इससे अक्टूबर में फेड की ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कुछ कम हुई है। उनके मुताबिक, अक्टूबर में सोने की दिशा तय करने में अमेरिका का रोजगार डेटा महत्वपूर्ण रहेगा। इसके अलावा महंगाई के आंकड़े और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पर भी बाजार की नजर रहेगी।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
डॉ रवि के मुताबिक, सोने में लंबे समय के लिए निवेश करने वाले लोगों के लिए एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना बेहतर तरीका हो सकता है। इससे किसी एक कीमत पर पूरा पैसा लगाने का जोखिम कम किया जा सकता है। निवेशकों को बहुत ज्यादा उधार लेकर या लीवरेज के साथ सोने में दांव लगाने से बचना चाहिए।
फिलहाल सोने के लिए तस्वीर मिली-जुली है। भारत का त्योहारी सीजन और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी कीमतों को सपोर्ट दे सकती है, लेकिन अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर और फेड की नीति सोने की तेजी के रास्ते में रोड़ा बन सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

