भोपाल के केरवा डैम की ‘हद’ और उस पर हुए कब्जों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) ने सुनवाई की है। एनजीटी ने बनी कमेटी को तीन सप्ताह में एफटीएल (फुल टैंक लेवल) के अंतिम निर्धारण का रिकॉर्ड समेत अन्य जानकारियों के साथ रिपोर्ट देने को कहा है। सुनवाई में NGT ने निर्देश दिया कि केरवा डैम के FTL का अंतिम निर्धारण उपलब्ध रिकॉर्ड, जलसंसाधन विभाग के कंटूर एवं टोपोग्राफिकल मैप, जलाशय की ऊंचाई के आधार पर किया जाए। समिति को एफटीएल एवं उसके बफर एरिया के अंतिम निर्धारण की प्रक्रिया तीन सप्ताह में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। एनजीटी ने यह कहा
एनजीटी ने स्पष्ट कहा कि एफटीएल और बफर एरिया को अंतिम रूप देने के लिए ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी, ग्राउंड ट्रूथिंग तथा उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड को आधार बनाया जाए। इसकी विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में प्रस्तुत की जाए। अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित है। उपलब्ध पूर्व रिकॉर्ड के अनुसार, केरवा डैम का जलमग्न क्षेत्र लगभग 462.150 हेक्टेयर है। इसकी सीमा को 1080 कंक्रीट ब्लॉकों/खंभों से चिह्नित किया गया था। अब ग्राउंड ट्रूथिंग एवं भौतिक सत्यापन के दौरान यह भी देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि इनमें से कितने सीमा-चिह्न वर्तमान में मौके पर मौजूद हैं। पूर्व जांच में केरवा जलाशय क्षेत्र में कुल 33 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। जिनमें 18 सरकारी भूमि और 15 निजी भूमि से संबंधित संरचनाएं बताई गई थीं। उक्त सभी अतिक्रमणकारियों का नाम, उनके द्वारा किए गए अतिक्रमण और उन्हें जारी किए गए नोटिस की विस्तृत जानकारी टेबल में संलग्न है। इसी अब ड्रोन सर्वे और जमीनी सत्यापन के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाएगा कि पूर्व में चिन्हित अतिक्रमणों में से वर्तमान में कितने मौके पर मौजूद हैं और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है।

