बारां जिले के आदिवासी क्षेत्र में प्रस्तावित बिजली के स्टोरेज प्लांट को अंतिम मंजूरी मिलने से पहले वन विभाग ने पेड़ों की कटाई पर आपत्ति जताई है। एपीसीसीएफ और एफसीए की नोडल अधिकारी टीजे कविता ने सरकार को रिपोर्ट भेजी है। इसमें कहा गया है कि पहाड़ी ढलान पर पेड़ काटने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। इस प्रोजेक्ट के लिए शाहाबाद के घने जंगल में 1 लाख 19 हजार से ज्यादा पेड़ काटे जाने हैं। इसमें से अकेले वाटर कंडक्टिंग सिस्टम और पावर हाउस के लिए 18 हजार 809 पेड़ काटने का प्रस्ताव है। इस प्रोजेक्ट का पूरे राजस्थान में विरोध हो रहा है। तेलंगाना की कंपनी को पेड़ नहीं काटने के सुझाव
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने तेलंगाना की कंपनी ग्रीनको को सुझाव दिया था। इसमें कहा गया था कि वाटर कंडक्टिंग सिस्टम को अंडरग्राउंड किया जाए, ताकि 18 हजार 809 पेड़ बच सकें। कंपनी ने जवाब दिया कि कुछ हिस्सा अंडरग्राउंड करके 44 प्रतिशत यानी करीब 8258 पेड़ बचाए जा सकते हैं। हालांकि 10 हजार 551 पेड़ तो काटने ही पड़ेंगे। एपीसीसीएफ ने कंपनी के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में लिखा है कि ढलान पर इतनी बड़ी संख्या में पेड़ कटने से मिट्टी का कटाव और भूस्खलन का गंभीर खतरा होगा। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधे रखती हैं। कटाई से बारिश में ऊपरी मिट्टी बह जाएगी और पास के जल स्रोतों में तलछट जमा होगी। इससे स्थानीय इकोलॉजी बिगड़ जाएगी। अब तक राज्य सरकार ने इस पर कोई आपत्ति नहीं की थी। उसने पॉजिटिव रिपोर्ट भेजी थी, जिसके आधार पर प्लांट को स्टेज-1 यानी सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। अब स्टेज-2 यानी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। इससे पहले वन विभाग की इस आपत्ति ने पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया है।

