महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित नांदणी मठ की हथिनी माधुरी गुरुवार को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा से अपने घर नांदणी मठ के लिए रवाना हो गई। लंबे समय से चल रहे सामाजिक आंदोलन और कानूनी संघर्ष के बाद माधुरी की वापसी की खबर से जैन समाज के साथ सर्व समाज में खुशी का माहौल है। माधुरी की वापसी के लिए नांदणी मठ के पीठाधीश स्वस्ति श्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी के मार्गदर्शन में आंदोलन चलाया गया। धीरे-धीरे यह मुद्दा केवल जैन समाज तक सीमित नहीं रहा और सर्व समाज की भावना से जुड़ गया। मेरठ से सुदीप जैन ने उठाई आवाज मेरठ से विश्व श्रमण संस्कृति श्रीसंघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुदीप जैन ने भी माधुरी की वापसी के मुद्दे को लगातार उठाया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के साथ आंदोलन को सड़क से न्यायालय तक ले जाने में भूमिका निभाई। पिछले साल अगस्त में उन्होंने लखनऊ में प्रदर्शन भी किया था। हजरतगंज स्थित बापू की प्रतिमा के सामने धरना देकर रामधुन गाई थी। सुदीप जैन ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को केवल जैन समाज का विषय नहीं माना। यह अहिंसा, पशु संरक्षण, धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा और जनभावना से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि माधुरी की वापसी सिर्फ एक हथिनी की वापसी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से लंबे समय तक अपनी बात रखने वाली जनभावना की जीत है। संघर्ष में जैन समाज के साथ सर्व समाज की एकजुटता भी महत्वपूर्ण रही। 45 किमी पैदल मार्च निकाला पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में करीब 45 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च निकाला गया। इसमें जैन समाज के साथ सर्व समाज के लोग भी शामिल हुए। राजू शेट्टी ने आंदोलन को जमीन पर नेतृत्व देने के साथ कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने में भी भूमिका निभाई।

