मधेपुरा के भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) में रसायन विज्ञान विभाग की ओर से दूसरा राष्ट्रीय सम्मेलन ‘नेक्स्ट जेन केमिस्ट्री: ड्राइविंग द फ्यूचर’ शुक्रवार से शुरू हुआ। सम्मेलन का आयोजन इंडियन केमिकल सोसायटी और कौंसिल ऑफ केमिकल साइंसेज के सहयोग से किया गया। उद्घाटन कुलपति प्रो. बीएस झा ने किया। स्वास्थ्य से लेकर ऊर्जा तक रसायन विज्ञान की भूमिका कुलपति प्रो. बीएस झा ने कहा कि रसायन विज्ञान अब केवल प्रयोगशाला और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य, दवा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, जल शुद्धिकरण, नैनो तकनीक और औद्योगिक उत्पादन सहित कई क्षेत्रों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। नई तकनीक के साथ वैज्ञानिक सोच जरूरी उन्होंने कहा कि ‘नेक्स्ट जेन केमिस्ट्री’ का उद्देश्य नई तकनीकों के साथ ऐसी वैज्ञानिक सोच विकसित करना है, जिसमें नवाचार, निरंतर विकास और सामाजिक उपयोगिता साथ-साथ आगे बढ़े। शोध को प्रयोगशाला से समाज तक पहुंचाएं कुलपति ने युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों से अपने शोध को प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रखने की अपील की। उन्होंने स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान तलाशने पर जोर दिया। कहा कि बिहार में बाढ़, पानी की गुणवत्ता, पर्यावरण प्रदूषण, कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों से निपटने में रसायन विज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बहुविषयक शोध को मिलेगा बढ़ावा डॉ. सीके यादव ने कहा कि भविष्य में अलग-अलग विषयों को जोड़कर शोध करने का चलन बढ़ेगा। रसायन विज्ञान का संबंध भौतिकी, जीव विज्ञान, चिकित्सा, पर्यावरण विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग से लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने शोधार्थियों से नई तकनीकों को अपनाने और गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशित करने पर ध्यान देने को कहा। शोध का लाभ समाज और अर्थव्यवस्था तक पहुंचे वाणिज्य संकाय के डीन डॉ. पीएन सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक शोध तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज और अर्थव्यवस्था तक पहुंचे। सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. केपी यादव ने वैज्ञानिक प्रगति को मानव जीवन से जोड़ने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। ग्रीन और सस्टेनेबल केमिस्ट्री भविष्य का आधार रसायन विज्ञान विभाग के एचओडी डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि रसायन विज्ञान का भविष्य ग्रीन केमिस्ट्री, सस्टेनेबल केमिस्ट्री, नैनोकेमिस्ट्री, मेडिकल केमिस्ट्री, एडवांस्ड मैटेरियल्स, एनर्जी केमिस्ट्री और एनवायरमेंटल केमिस्ट्री जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है। उन्होंने कम ऊर्जा खपत, कम कचरे और कम जहरीले पदार्थों वाली प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। राष्ट्रीय सम्मेलन शोधार्थियों के लिए अहम मंच डीएसडब्ल्यू प्रो. उमाशंकर चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन छात्रों और शोधार्थियों के लिए ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। तकनीकी सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से आए वैज्ञानिकों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने नवीन शोध और तकनीकी विकास से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। मधेपुरा के भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) में रसायन विज्ञान विभाग की ओर से दूसरा राष्ट्रीय सम्मेलन ‘नेक्स्ट जेन केमिस्ट्री: ड्राइविंग द फ्यूचर’ शुक्रवार से शुरू हुआ। सम्मेलन का आयोजन इंडियन केमिकल सोसायटी और कौंसिल ऑफ केमिकल साइंसेज के सहयोग से किया गया। उद्घाटन कुलपति प्रो. बीएस झा ने किया। स्वास्थ्य से लेकर ऊर्जा तक रसायन विज्ञान की भूमिका कुलपति प्रो. बीएस झा ने कहा कि रसायन विज्ञान अब केवल प्रयोगशाला और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य, दवा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, जल शुद्धिकरण, नैनो तकनीक और औद्योगिक उत्पादन सहित कई क्षेत्रों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। नई तकनीक के साथ वैज्ञानिक सोच जरूरी उन्होंने कहा कि ‘नेक्स्ट जेन केमिस्ट्री’ का उद्देश्य नई तकनीकों के साथ ऐसी वैज्ञानिक सोच विकसित करना है, जिसमें नवाचार, निरंतर विकास और सामाजिक उपयोगिता साथ-साथ आगे बढ़े। शोध को प्रयोगशाला से समाज तक पहुंचाएं कुलपति ने युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों से अपने शोध को प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रखने की अपील की। उन्होंने स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान तलाशने पर जोर दिया। कहा कि बिहार में बाढ़, पानी की गुणवत्ता, पर्यावरण प्रदूषण, कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों से निपटने में रसायन विज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बहुविषयक शोध को मिलेगा बढ़ावा डॉ. सीके यादव ने कहा कि भविष्य में अलग-अलग विषयों को जोड़कर शोध करने का चलन बढ़ेगा। रसायन विज्ञान का संबंध भौतिकी, जीव विज्ञान, चिकित्सा, पर्यावरण विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग से लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने शोधार्थियों से नई तकनीकों को अपनाने और गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशित करने पर ध्यान देने को कहा। शोध का लाभ समाज और अर्थव्यवस्था तक पहुंचे वाणिज्य संकाय के डीन डॉ. पीएन सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक शोध तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज और अर्थव्यवस्था तक पहुंचे। सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. केपी यादव ने वैज्ञानिक प्रगति को मानव जीवन से जोड़ने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। ग्रीन और सस्टेनेबल केमिस्ट्री भविष्य का आधार रसायन विज्ञान विभाग के एचओडी डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि रसायन विज्ञान का भविष्य ग्रीन केमिस्ट्री, सस्टेनेबल केमिस्ट्री, नैनोकेमिस्ट्री, मेडिकल केमिस्ट्री, एडवांस्ड मैटेरियल्स, एनर्जी केमिस्ट्री और एनवायरमेंटल केमिस्ट्री जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है। उन्होंने कम ऊर्जा खपत, कम कचरे और कम जहरीले पदार्थों वाली प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। राष्ट्रीय सम्मेलन शोधार्थियों के लिए अहम मंच डीएसडब्ल्यू प्रो. उमाशंकर चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन छात्रों और शोधार्थियों के लिए ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। तकनीकी सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से आए वैज्ञानिकों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने नवीन शोध और तकनीकी विकास से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।

