इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के लोनी थाने से जुड़े एस सी एस टी एक्ट केस में आरोपी राजू कुरैशी उर्फ उमरदराज के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस रद कर दिया है।
न्यायमूर्ति संतोष राय की एकलपीठ ने कहा कि जब तक किसी विवाद में पीड़ित की जाति के कारण उसे जानबूझकर अपमानित करने का इरादा न हो और घटना सार्वजनिक रूप से न हुई हो, तब तक एससी/एसटी एक्ट लागू नहीं हो सकता। जानिये क्या है मामला यह मामला गाजियाबाद जिले के लोनी थाना क्षेत्र के ग्राम बंथला से जुड़ा है, जहां जमीन सौदे के तहत 2,41,000 रुपये अग्रिम लेने और बैनामा न कर धोखाधड़ी करने,व एस सी एस टी एक्ट अपराध के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गाजियाबाद की विशेष एससी/एसटी अदालत ने आरोपी के खिलाफ सम्मन जारी किया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड और केस डायरी में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो दर्शाता हो कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया या सार्वजनिक स्थल पर अपमानित किया। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि विशुद्ध रूप से सिविल या संपत्ति विवाद को आपराधिक या जातिगत मोड़ देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। हाईकोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत समन आदेश को निरस्त कर आरोपी को इस कानून से बरी कर दिया, हालांकि धोखाधड़ी और अमानत में खयानत से जुड़ी आईपीसी की धाराओं के तहत मुकदमे की सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत के समक्ष उपस्थित होकर जमानत याचिका दाखिल करने का अवसर प्रदान किया है।

