जहानाबाद के नवादा गांव स्थित डॉ. विनयन आश्रम में शुक्रवार को कामरेड डॉ. विनयन की 79वीं जयंती मनाई गई। इस मौके पर जन मुक्ति आंदोलन के महासचिव हरिलाल प्रसाद सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। जहानाबाद को अपनी कर्मभूमि बनाया आंदोलन से जुड़े पुराने साथी, नौजवान और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने डॉ. विनयन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की शुरुआत ‘डॉ. विनयन अमर रहें’ के नारों के साथ हुई। वक्ताओं ने डॉ. विनयन के संघर्ष भरे जीवन और बिहार के वंचित-शोषित वर्गों के लिए किए गए आंदोलनों को याद किया। डॉ. विनयन का जन्म 1947 में आगरा में हुआ था। डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे जेपी आंदोलन के समय बिहार आए और जहानाबाद को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन ग्रामीण और वंचित समाज के अधिकारों की लड़ाई में लगाया। जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर लंबी लड़ाई डॉ. विनयन ने डोली प्रथा, जमींदारी व्यवस्था, मजदूरों के शोषण और सामाजिक अत्याचार के खिलाफ कई आंदोलन चलाए। उन्होंने बोधगया के महंत के खिलाफ अभियान से लेकर मजदूरी से जुड़े मुद्दों तक संघर्ष किया। इसके अलावा, विदेशी कंपनियों से जुड़े डंकल प्रस्ताव, बाबरी मस्जिद विध्वंस और दुर्गावती जलाशय परियोजना में कामगारों के समर्थन में भी उन्होंने आंदोलन किए। वक्ताओं ने बताया कि कैमूर के पहाड़ी इलाकों में डॉ. विनयन ने जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर लंबी लड़ाई लड़ी। बड़ी संख्या में जुटते हैं लोग मजदूर किसान संग्राम समिति बनाने से लेकर जन मुक्ति आंदोलन के गठन तक उनकी अहम भूमिका रही। यही वजह है कि आज भी ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोग उनकी जयंती पर इकट्ठा होकर उन्हें याद करते हैं। जन मुक्ति आंदोलन आज भी भूमिहीन लोगों को आवास के लिए पांच डिसमिल जमीन, मजदूरी, सामाजिक अत्याचार, शोषण और दमन जैसे मुद्दों पर संघर्ष कर रहा है। इस कार्यक्रम में जन मुक्ति आंदोलन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संत प्रसाद समेत कई कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे। जहानाबाद के नवादा गांव स्थित डॉ. विनयन आश्रम में शुक्रवार को कामरेड डॉ. विनयन की 79वीं जयंती मनाई गई। इस मौके पर जन मुक्ति आंदोलन के महासचिव हरिलाल प्रसाद सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। जहानाबाद को अपनी कर्मभूमि बनाया आंदोलन से जुड़े पुराने साथी, नौजवान और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने डॉ. विनयन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की शुरुआत ‘डॉ. विनयन अमर रहें’ के नारों के साथ हुई। वक्ताओं ने डॉ. विनयन के संघर्ष भरे जीवन और बिहार के वंचित-शोषित वर्गों के लिए किए गए आंदोलनों को याद किया। डॉ. विनयन का जन्म 1947 में आगरा में हुआ था। डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे जेपी आंदोलन के समय बिहार आए और जहानाबाद को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन ग्रामीण और वंचित समाज के अधिकारों की लड़ाई में लगाया। जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर लंबी लड़ाई डॉ. विनयन ने डोली प्रथा, जमींदारी व्यवस्था, मजदूरों के शोषण और सामाजिक अत्याचार के खिलाफ कई आंदोलन चलाए। उन्होंने बोधगया के महंत के खिलाफ अभियान से लेकर मजदूरी से जुड़े मुद्दों तक संघर्ष किया। इसके अलावा, विदेशी कंपनियों से जुड़े डंकल प्रस्ताव, बाबरी मस्जिद विध्वंस और दुर्गावती जलाशय परियोजना में कामगारों के समर्थन में भी उन्होंने आंदोलन किए। वक्ताओं ने बताया कि कैमूर के पहाड़ी इलाकों में डॉ. विनयन ने जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर लंबी लड़ाई लड़ी। बड़ी संख्या में जुटते हैं लोग मजदूर किसान संग्राम समिति बनाने से लेकर जन मुक्ति आंदोलन के गठन तक उनकी अहम भूमिका रही। यही वजह है कि आज भी ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोग उनकी जयंती पर इकट्ठा होकर उन्हें याद करते हैं। जन मुक्ति आंदोलन आज भी भूमिहीन लोगों को आवास के लिए पांच डिसमिल जमीन, मजदूरी, सामाजिक अत्याचार, शोषण और दमन जैसे मुद्दों पर संघर्ष कर रहा है। इस कार्यक्रम में जन मुक्ति आंदोलन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संत प्रसाद समेत कई कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे।

