सीकर में महिलाएं बोलीं-मांगें नहीं मानी तो काम बंद करेंगे:आशा सहयोगिनियों की बैठक, नई कार्यकारिणी गठित, आंदोलन की चेतावनी

सीकर में महिलाएं बोलीं-मांगें नहीं मानी तो काम बंद करेंगे:आशा सहयोगिनियों की बैठक, नई कार्यकारिणी गठित, आंदोलन की चेतावनी

सीकर में आज आशा सहयोगिनियों की बैठक हुई। बैठक में कार्यकर्ताओं ने मानदेय और पेंडिंग मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदेशाध्यक्ष अलका कीनिया ने कहा कि सरकार मांगें जल्द पूरी नहीं करती है, तो प्रदेश भर की आशा सहयोगिनियां काम बंद कर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगी और उग्र आंदोलन करेंगी। नई जिला कार्यकारिणी का हुआ गठन बैठक में 11 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। मुख्य अतिथि राजकुमार भास्कर और निर्वाचन मंडल की देखरेख में सर्वसम्मति से रोशन खूड़ को अध्यक्ष चुना गया। वहीं, भारती को मंत्री, ललिता पारीक और मंजू सेन को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। भगवती देवी को कोषाध्यक्ष, चंदा देवी को प्रचार-प्रसार मंत्री, मणि देवी को संगठन मंत्री, सुलोचना को सूचना मंत्री, मनभरी देवी को लेखाकार और विद्या शर्मा को सदस्य बनाया गया है। प्रदेशाध्यक्ष अलका कीनिया ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार बार-बार बिना वजह के सर्वे का काम आशा सहयोगिनियों पर थोप रही है। हाल ही में आउटरीच सर्वे भी उनसे करवाया जा रहा है। सर्वे से पहले होने वाले प्रशिक्षण के मानदेय रजिस्टर पर आशा सहयोगिनियों से हस्ताक्षर तो करवा लिए जाते हैं, लेकिन उन्हें एक पैसा भी नहीं दिया जाता। 6 महीने के इंतजार पर मिलता है सिर्फ 2 महीने का पैसा प्रदेशाध्यक्ष कीनिया ने बताया कि पीसीटीएस (PCTS) के माध्यम से जो पैसा पहले एकमुश्त मिलता था, अब उसे काटकर किश्तों में दिया जा रहा है। आशा वर्कर्स 24 घंटे काम करती हैं, लेकिन पूरा मानदेय नहीं मिलता। अधिकारियों के सामने बार-बार एप्लाई करने के बाद 6 महीने के बकाया मानदेय में से 2 महीने का भुगतान ही दिया जाता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि पीसीटीएस का पैसा एकमुश्त दिया जाए और मानदेय बढ़ाया जाए, अन्यथा वे सभी सरकारी कार्यों का बहिष्कार कर सड़कों पर उतरेंगी।

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