हजारीबाग में महिला किसानों ने बनाया सोलर कोल्ड स्टोरेज:15 दिनों तक सुरक्षित रख रहीं सब्जियों को, दोगुनी हुई आमदनी

हजारीबाग में महिला किसानों ने बनाया सोलर कोल्ड स्टोरेज:15 दिनों तक सुरक्षित रख रहीं सब्जियों को, दोगुनी हुई आमदनी

हजारीबाग के सुदूरवर्ती गोसी गांव की महिला किसानों ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने एक सोलर कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया है, जिससे वे अपने कृषि उत्पादों को सुरक्षित रख पा रही हैं और अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव का प्रतीक बन रही है। कटकमसांडी प्रखंड के डांड पंचायत स्थित गोसी गांव में ‘परी सखी मंडल’ नामक 12 महिला सदस्यों के समूह ने इस कोल्ड स्टोरेज को तैयार किया है। समूह की अध्यक्ष ममता कुमारी ने बताया कि गांव में बिजली की कमी को देखते हुए सोलर कोल्ड स्टोरेज बनाने का निर्णय लिया गया था। 6 टन क्षमता का है सोलर कोल्ड स्टोरेज
इस परियोजना को वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टिट्यूट के सहयोग से लीड्स संस्था द्वारा साकार किया गया है। लगभग 6 टन क्षमता वाला यह सोलर कोल्ड स्टोरेज टमाटर, गोभी, शिमला मिर्च, गाजर, करेला, बैंगन, परवल सहित अन्य सब्जियों और फलों को सुरक्षित रखने में सक्षम है। यह कोल्ड स्टोरेज किसानों और सब्जी उत्पादकों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसके माध्यम से उत्पाद 15 दिनों तक ताजे और हरे-भरे रहते हैं, जिससे सब्जियों या फलों के खराब होने का खतरा समाप्त हो गया है। अब प्रति माह 35 से 40 हजार रुपए तक कमा रहे हैं, जिससे महिलाएं सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह कोल्ड स्टोरेज ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में भी एक मिसाल पेश करता है। इसे सोलर ऊर्जा और बिजली दोनों से संचालित किया जाता है। सोलर पैनलों से उत्पन्न ऊर्जा स्टोरेज को ठंडा बनाए रखती है, जिससे सब्जियों की गुणवत्ता और ताजगी लंबे समय तक बरकरार रहती है। यह गांव अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। वहीं, कोल्ड स्टोरेज में सब्जियों को मात्र एक रुपए प्रति किलो की दर से सुरक्षित रखा जाता है, जो किसानों के लिए बेहद फायदामंद हैं। लीड्स संस्था के परियोजना पदाधिकारी आलोक कुमार कहते हैं कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करने की उद्देश्य से सोलर कोल्ड स्टोरेज बनाया गया है। इससे महिला किसानों को विशेष लाभ मिल रहा है। हजारीबाग के सुदूरवर्ती गोसी गांव की महिला किसानों ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने एक सोलर कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया है, जिससे वे अपने कृषि उत्पादों को सुरक्षित रख पा रही हैं और अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव का प्रतीक बन रही है। कटकमसांडी प्रखंड के डांड पंचायत स्थित गोसी गांव में ‘परी सखी मंडल’ नामक 12 महिला सदस्यों के समूह ने इस कोल्ड स्टोरेज को तैयार किया है। समूह की अध्यक्ष ममता कुमारी ने बताया कि गांव में बिजली की कमी को देखते हुए सोलर कोल्ड स्टोरेज बनाने का निर्णय लिया गया था। 6 टन क्षमता का है सोलर कोल्ड स्टोरेज
इस परियोजना को वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टिट्यूट के सहयोग से लीड्स संस्था द्वारा साकार किया गया है। लगभग 6 टन क्षमता वाला यह सोलर कोल्ड स्टोरेज टमाटर, गोभी, शिमला मिर्च, गाजर, करेला, बैंगन, परवल सहित अन्य सब्जियों और फलों को सुरक्षित रखने में सक्षम है। यह कोल्ड स्टोरेज किसानों और सब्जी उत्पादकों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसके माध्यम से उत्पाद 15 दिनों तक ताजे और हरे-भरे रहते हैं, जिससे सब्जियों या फलों के खराब होने का खतरा समाप्त हो गया है। अब प्रति माह 35 से 40 हजार रुपए तक कमा रहे हैं, जिससे महिलाएं सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह कोल्ड स्टोरेज ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में भी एक मिसाल पेश करता है। इसे सोलर ऊर्जा और बिजली दोनों से संचालित किया जाता है। सोलर पैनलों से उत्पन्न ऊर्जा स्टोरेज को ठंडा बनाए रखती है, जिससे सब्जियों की गुणवत्ता और ताजगी लंबे समय तक बरकरार रहती है। यह गांव अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। वहीं, कोल्ड स्टोरेज में सब्जियों को मात्र एक रुपए प्रति किलो की दर से सुरक्षित रखा जाता है, जो किसानों के लिए बेहद फायदामंद हैं। लीड्स संस्था के परियोजना पदाधिकारी आलोक कुमार कहते हैं कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करने की उद्देश्य से सोलर कोल्ड स्टोरेज बनाया गया है। इससे महिला किसानों को विशेष लाभ मिल रहा है।  

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