पानी नहीं पहुंचा तो धोरों को काट बना दी सड़क… अब पहुंचेंगे टैंकर

पानी नहीं पहुंचा तो धोरों को काट बना दी सड़क… अब पहुंचेंगे टैंकर

पानी की बूंद-बूंद को मोहताज गड़स गांव में टैंकर लाने के लिए धोरे काटकर बिछाईं झाड़ियां

पेयजल संकट और प्रशासनिक अनदेखी से जूझ रहे बाड़मेर जिले के गडरारोड के गड़स गांव के ग्रामीणों ने आखिरकार खुद ही समाधान निकाल लिया। पानी का टैंकर गांव तक लाने के लिए उन्होंने श्रमदान कर 7 किलोमीटर धोरे काटे और उन पर झाड़ियां बिछाकर कच्चा रास्ता बना दिया।

गड़स गांव में पेयजल का कोई स्त्रोत नहीं है। यहां लोग मीलों दूर बेरियों से पानी सींचकर लाते हैं। बॉर्डर पर बढ़ते तापमान और गर्मी ने ग्रामीणों के सामने दोहरा संकट खड़ा कर दिया। बढ़ती गर्मी से बेरियों का पानी रीतने लगा। दूसरी तरफ गांव तक आने-जाने के लिए कोई सड़क नहीं होने से टैंकर भी नहीं मंगवा पा रहे थे। गर्मी में तड़पते पशुओं को देखकर पशुपालक चिंतित हो गए। पानी का अन्य कोई विकल्प नहीं था और टैंकर मंगवाने के लिए सड़क नहीं होने से ग्रामीणों ने कच्चा रास्ता बनाने का निर्णय किया।

चंदा कर मंगवाए ट्रैक्टर, खुद बनाया रास्ता:-

जिम्मेदारों को कई बार अवगत करवाने के बाद भी जब कोई मदद नहीं मिली तो ग्रामीणों ने आपस में विचार-विमर्श कर कच्ची सड़क बनाने की ठानी। परिवारों ने चंदा कर धनराशि एकत्रित की और ट्रैक्टर मंगवाए। इसके बाद सभी ग्रामीणों ने मिलकर 7 किलोमीटर धोरे हटाए और उन पर झाड़ियां बिछाकर कच्चा रास्ता तैयार कर दिया।

:कुछ ग्रेवल मिल जाए तो हो अस्थायी समाधान:-

ग्रामीण गेनसिंह सोढ़ा ने बताया कि अभी वैकल्पिक इंतजाम के तौर पर पानी का टैंकर लाने के लिए यह रास्ता बनाया है। अगर ज्यादा नहीं तो कुछ ग्रेवल की गाड़ियां मिल जाएं तो सड़क का अस्थायी समाधान हो जाए। गौरतलब हो आजादी के 78 साल बाद भी सरहदी गांव बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। ग्रामीणों का यह संघर्ष सिस्टम पर बड़ा सवाल है। ग्रामीणों का आरोप है गडस गांव को जान बूझकर वंचित रखा गया है। अन्य कई गांव ढाणियों तक ग्रेवल सड़क बन गई तो उन्हें ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है।

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