गजराज की अगवानी और हंस वाली नाव पर विहार:इस्कॉन में राधा-माधव ने भक्तों को दिए शाही दर्शन, 2009 से जारी है यह अनूठी परंपरा

गजराज की अगवानी और हंस वाली नाव पर विहार:इस्कॉन में राधा-माधव ने भक्तों को दिए शाही दर्शन, 2009 से जारी है यह अनूठी परंपरा

शहर के बिठूर रोड स्थित इस्कॉन मंदिर में रविवार को भक्ति और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। मौका था श्री श्री राधा-माधव जी के वार्षिक ‘नौका विहार महोत्सव’ का। तपती गर्मी में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए आयोजित इस उत्सव में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। इस बार का आकर्षण दक्षिण भारत से आया विशेष ‘यांत्रिक गजराज’ (हाथी) रहा, जिस पर सवार होकर भगवान ने मंदिर परिसर में भ्रमण किया। गजराज पर शाही सवारी, शंखनाद से गूंजा परिसर महोत्सव की शुरुआत शाम 5 बजे मंदिर परिक्रमा और शोभायात्रा के साथ हुई। मृदंग और शंख की मंगल ध्वनि के बीच जब यांत्रिक गजराज पर विराजमान होकर राधा-माधव निकले, तो भक्त भावविभोर हो गए। शोभायात्रा में गोपाल के वेश में सजे नन्हे बालक और सिर पर कलश धारण किए पीतांबर धारी महिलाएं आकर्षण का केंद्र रहीं। बैंड की मधुर धुनों पर भक्त ‘हरे कृष्णा-हरे रामा’ के महामंत्र पर झूमते नजर आए। वृंदावन सा नजारा,हंस वाली नाव में विराजे प्रभु शाम होते ही मंदिर परिसर स्थित ‘कृष्ण कालिया कुंड’ रोशनी से जगमगा उठा। भगवान के विहार के लिए विशेष रूप से हंस के आकार की सुंदर नौका तैयार की गई थी। फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजी इस नौका में जब राधा-माधव को विराजित कर जल विहार कराया गया, तो पूरा नजारा वृंदावन के घाटों जैसा जीवंत हो उठा। कुंड के चारों ओर खड़े श्रद्धालु पुष्प वर्षा कर भगवान का जयघोष कर रहे थे। जानिए क्यों खास है यह उत्सव… इस्कॉन कानपुर के ट्रस्टी और जोनल सेक्रेटरी देवकी नंदन दास ने बताया कि इस्कॉन में यह परंपरा 2009 से निरंतर चली आ रही है। उन्होंने कहा कि ‘उत्सव’ का वास्तविक अर्थ वही है जो मनुष्य को संसार के दुखों से ऊपर उठाकर आनंद में ले जाए। इस बार भगवान की प्रसन्नता के लिए गजराज को शामिल किया गया, क्योंकि हाथी को शुभता और राजसी ठाठ का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार राजा अपनी प्रजा का हाल जानने निकलते हैं, वैसे ही भगवान गजराज पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। भक्त बोले- ऐसी अलौकिक सुंदरता पहले नहीं देखी
उत्सव में शामिल होने आई स्थानीय निवासी श्वेता ने बताया, “मैं हर साल यहां आती हूं, लेकिन इस बार गजराज द्वारा भक्तों का स्वागत और नौका विहार की सजावट वाकई बेमिसाल थी।” वहीं नियमित दर्शनार्थी विनोद कुमार पाल ने कहा कि दक्षिण भारत से खास तौर पर बुलाए गए गजराज और भगवान की विशेष पोशाक ने इस बार के आयोजन को यादगार बना दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
नौका विहार के साथ-साथ शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ। कलाकारों ने कृष्ण लीलाओं पर आधारित नृत्य और भजनों की ऐसी प्रस्तुति दी कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर देर रात तक जमे रहे। महोत्सव में उन्नाव के जिलाधिकारी घनश्याम मीणा समेत शहर के कई गणमान्य लोग भी शामिल हुए। मंदिर अध्यक्ष प्रेम हरिनाम प्रभु ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों को केसरिया हलवा और महाप्रसाद वितरित किया गया।

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