पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के नर्सिंग कॉलेज में गुरुवार को छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बीएससी नर्सिंग की लगभग 450 छात्राएं कॉलेज गेट के बाहर धरने पर बैठ गईं। छात्राओं ने प्रिंसिपल अनुजा डैनियल और वाइस प्रिंसिपल रुपाश्री दासगुप्ता पर मानसिक प्रताड़ना, अभद्र व्यवहार, पक्षपात और जानबूझकर फेल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। सुबह शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। छात्राओं के समर्थन में कॉलेज की कई फैकल्टी टीचर भी धरने में शामिल हो गईं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। पूरे दिन कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज रही। सुबह से देर रात तक किया विरोध प्रदर्शन धरने में वर्ष 2021 से 2025 तक के विभिन्न बैचों की लगभग 450 छात्राएं शामिल थीं। छात्राओं ने सुबह से ही कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया और कॉलेज के मुख्य गेट पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। उनके हाथों में “मानसिक प्रताड़ना बंद करो”, “हमें न्याय चाहिए” और “प्रिंसिपल व वाइस प्रिंसिपल को बर्खास्त करो” जैसे नारे लिखे पोस्टर और तख्तियां थीं। छात्राओं ने प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। मानसिक प्रताड़ना के लगाए आरोप एक छात्रा ने बताया कि वे पढ़ने के लिए कॉलेज आई हैं, लेकिन यहां डर और तनाव का माहौल बना दिया गया है। उन्हें छोटी-छोटी बातों पर अपमानित किया जाता है और लगातार मानसिक दबाव में रहना पड़ता है। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल में भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है और वहां सिर्फ प्रताड़ना दी जाती है। वाइस प्रिंसिपल पर जानबूझ कर फेल करने के आरोप धरना दे रहीं छात्राओं ने विशेष रूप से वाइस प्रिंसिपल रुपाश्री दासगुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए। छात्राओं का कहना है कि उनका व्यवहार तानाशाही पूर्ण है और वे छात्राओं से अपमानजनक तरीके से बात करती हैं। उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां दी जाती है, मेंटली टॉर्चर किया जाता है। कॉलेज से लेकर हॉस्टल में किसी प्रकार की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। लंबे समय से सिर्फ प्रताड़ना के अलावा और कुछ मिला। छात्राओं के मुताबिक, रुपाश्री दासगुप्ता पांचवें सेमेस्टर में IMNCI और नर्सिंग मैनेजमेंट एंड लीडरशिप जैसे विषय पढ़ाती हैं। आरोप है कि इन विषयों में असामान्य रूप से बड़ी संख्या में छात्राओं को जानबूझ कर फेल किया गया।
छात्राओं ने दावा किया कि कई बार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें कम अंक दिए गए। इससे छात्राओं में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। जानबूझकर रिजल्ट खराब किया जाता है- छात्राएं कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि जानबूझकर रिजल्ट खराब किया जाता है, ताकि छात्राओं पर दबाव बनाया जा सके। एक छात्रा ने कहा, हम मेहनत करके परीक्षा देते हैं, लेकिन रिजल्ट आने के बाद समझ नहीं आता कि इतने कम नंबर कैसे आ गए। कई छात्राएं लगातार फेल होने के कारण डिप्रेशन में चली गई हैं। कुछ ने आत्महत्या करने की कोशिश भी की, कुछ छात्राओं ने प्रताड़ना से तंग आ कर खुदकुशी भी की है। 10 महीने पहले भी की थी शिकायत छात्राओं ने बताया कि, यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई हो। करीब 10 महीने पहले भी वाइस प्रिंसिपल के खिलाफ लिखित शिकायत की गई थी। उस समय संस्थान प्रशासन ने जांच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी भी बनाई थी। लेकिन कारवाई नहीं की गई। छात्राओं का आरोप है कि आज तक उस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। उनका कहना है कि शिकायतों को दबाने की कोशिश की गई और किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एक छात्रा ने कहा,हमने पहले भी शिकायत की थी। हमें भरोसा दिलाया गया था कि निष्पक्ष जांच होगी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। इसलिए अब मजबूर होकर धरना देना पड़ रहा है। फैकल्टी टीचर भी छात्राओं के समर्थन में उतरीं शाम होते-होते आंदोलन को नया मोड़ तब मिला, जब नर्सिंग कॉलेज की कई फैकल्टी टीचर भी छात्राओं के समर्थन में धरने पर बैठ गईं। फैकल्टी सदस्यों ने भी कॉलेज प्रशासन के रवैए पर नाराजगी जताई। टीचरों ने आरोप लगाया कि उनके साथ भी सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता। ड्यूटी लगाने, कार्य विभाजन और प्रशासनिक मामलों में जानबूझकर परेशान किया जाता है। एक फैकल्टी सदस्य ने कहा, हमने भी कई बार संस्थान प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब छात्राओं की स्थिति देखकर हम भी उनके समर्थन में खड़े हैं। फैकल्टी के धरने में शामिल होने के बाद आंदोलन ने और गंभीर रूप ले लिया। इससे यह मामला केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे कॉलेज के प्रशासनिक माहौल पर सवाल खड़े होने लगे। कॉलेज परिसर में पूरे दिन बना रहा तनाव धरने और नारेबाजी के कारण पूरे दिन कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। छात्राओं की संख्या बढ़ने के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की गतिविधियां भी तेज हो गईं। कॉलेज परिसर में कई बार अधिकारियों और छात्राओं के बीच बातचीत की कोशिश हुई, लेकिन देर रात तक कोई समाधान नहीं निकल सका। छात्राएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं और लगातार प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल को बर्खास्त करने की मांगों पर अड़ी रही।
IGIMS नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं की प्रमुख मांगें कई छात्राएं तनाव और डिप्रेशन में होने का दावा धरने के दौरान कई छात्राएं भावुक भी दिखीं। कुछ छात्राओं ने दावा किया कि लगातार दबाव और भय के माहौल के कारण वे मानसिक तनाव से गुजर रही हैं। छात्राओं का कहना है कि कॉलेज में ऐसा वातावरण बन गया है जहां छात्राएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पातीं। उन्हें डर रहता है कि विरोध करने पर परीक्षा और इंटरनल मार्क्स में नुकसान पहुंचाया जा सकता है। एक छात्रा ने कहा, हम पढ़ाई के लिए घर से दूर आए हैं, लेकिन यहां हर समय डर बना रहता है। मानसिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कई छात्राएं काउंसलिंग लेने को मजबूर हैं। मीडिया के सवालों से बचती नजर आई वाइस प्रिंसिपल मामले में प्रिंसिपल अनुजा डैनियल ने दैनिक भास्कर डिजिटल से खास बातचीत में बताया कि, ‘छात्राओं की लिखित शिकायत मिली हैं, जिसमें 6 सदस्यीय कमिटी बनाई गई है। जो मामले की जांच कर रही।’ वाइस प्रिंसिपल ने रुपाश्री दासगुप्ता मीडिया के सवालों से बचती नजर आई। सवाल पूछने पर अपना चेहरा पूरी तरह मोबाइल से ढंक लिया। काफी कोशिश के बावजूद उन्होंने अपना पक्ष रखने से इंकार कर दिया।
हालांकि सूत्रों के अनुसार, संस्थान में पूरे मामले को लेकर भीतरखाने चर्चा चल रही है।
प्रिंसिपल का गोल मोल जवाब से भड़की छात्राएं छात्राओं ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। छात्राओं का कहना है कि यह केवल रिजल्ट या किसी एक शिक्षक का मामला नहीं, बल्कि पूरे कॉलेज के वातावरण और छात्राओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। फिलहाल IGIMS नर्सिंग कॉलेज का यह विवाद राजधानी के शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर संस्थान प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के नर्सिंग कॉलेज में गुरुवार को छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बीएससी नर्सिंग की लगभग 450 छात्राएं कॉलेज गेट के बाहर धरने पर बैठ गईं। छात्राओं ने प्रिंसिपल अनुजा डैनियल और वाइस प्रिंसिपल रुपाश्री दासगुप्ता पर मानसिक प्रताड़ना, अभद्र व्यवहार, पक्षपात और जानबूझकर फेल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। सुबह शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। छात्राओं के समर्थन में कॉलेज की कई फैकल्टी टीचर भी धरने में शामिल हो गईं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। पूरे दिन कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज रही। सुबह से देर रात तक किया विरोध प्रदर्शन धरने में वर्ष 2021 से 2025 तक के विभिन्न बैचों की लगभग 450 छात्राएं शामिल थीं। छात्राओं ने सुबह से ही कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया और कॉलेज के मुख्य गेट पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। उनके हाथों में “मानसिक प्रताड़ना बंद करो”, “हमें न्याय चाहिए” और “प्रिंसिपल व वाइस प्रिंसिपल को बर्खास्त करो” जैसे नारे लिखे पोस्टर और तख्तियां थीं। छात्राओं ने प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। मानसिक प्रताड़ना के लगाए आरोप एक छात्रा ने बताया कि वे पढ़ने के लिए कॉलेज आई हैं, लेकिन यहां डर और तनाव का माहौल बना दिया गया है। उन्हें छोटी-छोटी बातों पर अपमानित किया जाता है और लगातार मानसिक दबाव में रहना पड़ता है। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल में भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है और वहां सिर्फ प्रताड़ना दी जाती है। वाइस प्रिंसिपल पर जानबूझ कर फेल करने के आरोप धरना दे रहीं छात्राओं ने विशेष रूप से वाइस प्रिंसिपल रुपाश्री दासगुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए। छात्राओं का कहना है कि उनका व्यवहार तानाशाही पूर्ण है और वे छात्राओं से अपमानजनक तरीके से बात करती हैं। उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां दी जाती है, मेंटली टॉर्चर किया जाता है। कॉलेज से लेकर हॉस्टल में किसी प्रकार की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। लंबे समय से सिर्फ प्रताड़ना के अलावा और कुछ मिला। छात्राओं के मुताबिक, रुपाश्री दासगुप्ता पांचवें सेमेस्टर में IMNCI और नर्सिंग मैनेजमेंट एंड लीडरशिप जैसे विषय पढ़ाती हैं। आरोप है कि इन विषयों में असामान्य रूप से बड़ी संख्या में छात्राओं को जानबूझ कर फेल किया गया।
छात्राओं ने दावा किया कि कई बार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें कम अंक दिए गए। इससे छात्राओं में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। जानबूझकर रिजल्ट खराब किया जाता है- छात्राएं कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि जानबूझकर रिजल्ट खराब किया जाता है, ताकि छात्राओं पर दबाव बनाया जा सके। एक छात्रा ने कहा, हम मेहनत करके परीक्षा देते हैं, लेकिन रिजल्ट आने के बाद समझ नहीं आता कि इतने कम नंबर कैसे आ गए। कई छात्राएं लगातार फेल होने के कारण डिप्रेशन में चली गई हैं। कुछ ने आत्महत्या करने की कोशिश भी की, कुछ छात्राओं ने प्रताड़ना से तंग आ कर खुदकुशी भी की है। 10 महीने पहले भी की थी शिकायत छात्राओं ने बताया कि, यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई हो। करीब 10 महीने पहले भी वाइस प्रिंसिपल के खिलाफ लिखित शिकायत की गई थी। उस समय संस्थान प्रशासन ने जांच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी भी बनाई थी। लेकिन कारवाई नहीं की गई। छात्राओं का आरोप है कि आज तक उस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। उनका कहना है कि शिकायतों को दबाने की कोशिश की गई और किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एक छात्रा ने कहा,हमने पहले भी शिकायत की थी। हमें भरोसा दिलाया गया था कि निष्पक्ष जांच होगी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। इसलिए अब मजबूर होकर धरना देना पड़ रहा है। फैकल्टी टीचर भी छात्राओं के समर्थन में उतरीं शाम होते-होते आंदोलन को नया मोड़ तब मिला, जब नर्सिंग कॉलेज की कई फैकल्टी टीचर भी छात्राओं के समर्थन में धरने पर बैठ गईं। फैकल्टी सदस्यों ने भी कॉलेज प्रशासन के रवैए पर नाराजगी जताई। टीचरों ने आरोप लगाया कि उनके साथ भी सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता। ड्यूटी लगाने, कार्य विभाजन और प्रशासनिक मामलों में जानबूझकर परेशान किया जाता है। एक फैकल्टी सदस्य ने कहा, हमने भी कई बार संस्थान प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब छात्राओं की स्थिति देखकर हम भी उनके समर्थन में खड़े हैं। फैकल्टी के धरने में शामिल होने के बाद आंदोलन ने और गंभीर रूप ले लिया। इससे यह मामला केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे कॉलेज के प्रशासनिक माहौल पर सवाल खड़े होने लगे। कॉलेज परिसर में पूरे दिन बना रहा तनाव धरने और नारेबाजी के कारण पूरे दिन कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। छात्राओं की संख्या बढ़ने के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की गतिविधियां भी तेज हो गईं। कॉलेज परिसर में कई बार अधिकारियों और छात्राओं के बीच बातचीत की कोशिश हुई, लेकिन देर रात तक कोई समाधान नहीं निकल सका। छात्राएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं और लगातार प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल को बर्खास्त करने की मांगों पर अड़ी रही।
IGIMS नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं की प्रमुख मांगें कई छात्राएं तनाव और डिप्रेशन में होने का दावा धरने के दौरान कई छात्राएं भावुक भी दिखीं। कुछ छात्राओं ने दावा किया कि लगातार दबाव और भय के माहौल के कारण वे मानसिक तनाव से गुजर रही हैं। छात्राओं का कहना है कि कॉलेज में ऐसा वातावरण बन गया है जहां छात्राएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पातीं। उन्हें डर रहता है कि विरोध करने पर परीक्षा और इंटरनल मार्क्स में नुकसान पहुंचाया जा सकता है। एक छात्रा ने कहा, हम पढ़ाई के लिए घर से दूर आए हैं, लेकिन यहां हर समय डर बना रहता है। मानसिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कई छात्राएं काउंसलिंग लेने को मजबूर हैं। मीडिया के सवालों से बचती नजर आई वाइस प्रिंसिपल मामले में प्रिंसिपल अनुजा डैनियल ने दैनिक भास्कर डिजिटल से खास बातचीत में बताया कि, ‘छात्राओं की लिखित शिकायत मिली हैं, जिसमें 6 सदस्यीय कमिटी बनाई गई है। जो मामले की जांच कर रही।’ वाइस प्रिंसिपल ने रुपाश्री दासगुप्ता मीडिया के सवालों से बचती नजर आई। सवाल पूछने पर अपना चेहरा पूरी तरह मोबाइल से ढंक लिया। काफी कोशिश के बावजूद उन्होंने अपना पक्ष रखने से इंकार कर दिया।
हालांकि सूत्रों के अनुसार, संस्थान में पूरे मामले को लेकर भीतरखाने चर्चा चल रही है।
प्रिंसिपल का गोल मोल जवाब से भड़की छात्राएं छात्राओं ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। छात्राओं का कहना है कि यह केवल रिजल्ट या किसी एक शिक्षक का मामला नहीं, बल्कि पूरे कॉलेज के वातावरण और छात्राओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। फिलहाल IGIMS नर्सिंग कॉलेज का यह विवाद राजधानी के शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर संस्थान प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।


