राष्ट्रीय लोक जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार को अपने आवास पर पीसी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को उनका अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया था। हमारी पार्टी भी इस बात की पक्षधर है कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिले। पार्टी सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर कायम है और महिलाओं के साथ-साथ एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को भी बराबरी का हक मिलना चाहिए। कुशवाहा ने कहा कि वर्तमान बिल में ओबीसी वर्ग के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं था, लेकिन उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि इस मुद्दे को बहाना बनाकर महिला आरक्षण बिल का विरोध किया गया। केंद्र सरकार भविष्य में इस दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। अभी जातिगत गणना की प्रक्रिया चल रही है और रिपोर्ट आने के बाद ओबीसी वर्ग को लेकर ठोस निर्णय लिया जाएगा। विपक्ष इस तथ्य को समझने में असफल रहा और जल्दबाजी में विरोध कर दिया, जिससे बिल पारित नहीं हो सका। कुशवाहा ने घोषणा की कि उनकी पार्टी 22 अप्रैल को पूरे बिहार में “धिक्कार मार्च” निकालेगी। यह मार्च राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में आयोजित किया जाएगा। इस मार्च के जरिए जनता के बीच जाकर विपक्ष की “वास्तविक मंशा” को उजागर किया जाएगा और यह बताया जाएगा कि किस तरह महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीति की गई। जातीय गणना के बाद होगा बड़ा फैसला कुशवाहा ने कहा कि जब जनगणना और जातीय सर्वेक्षण की पूरी रिपोर्ट सामने आएगी, तब सभी वर्गों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इसके आधार पर ओबीसी को प्रतिनिधित्व देने का रास्ता भी तय किया जाएगा। यह एक प्रक्रिया है और सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना चाहती है, लेकिन विपक्ष ने राजनीतिक लाभ के लिए इसे बाधित किया।
परिसीमन का समर्थन, बढ़ सकती थीं सीटें कुशवाहा ने परिसीमन का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से इसकी मांग करती रही है। उन्होंने कहा कि संविधान ने यह अधिकार दिया है, इसलिए इसे लागू होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अगर परिसीमन लागू होता तो बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 हो सकती थी, वहीं विधानसभा सीटें भी बढ़कर लगभग 365 तक पहुंच सकती थीं। उनके अनुसार, इससे महिलाओं को भी अधिक प्रतिनिधित्व मिलता, लेकिन विपक्ष ने इस प्रक्रिया को भी बाधित कर दिया। विपक्ष पर ‘अन्याय’ का आरोप कुशवाहा ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों के साथ अन्याय किया है। विपक्ष की मंशा साफ नहीं है और वह सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए जरूरी विधेयकों का विरोध करता है। टाइमिंग और मंशा को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवाल सिर्फ जनता को भ्रमित करने के लिए हैं। राष्ट्रीय लोक जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार को अपने आवास पर पीसी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को उनका अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया था। हमारी पार्टी भी इस बात की पक्षधर है कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिले। पार्टी सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर कायम है और महिलाओं के साथ-साथ एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को भी बराबरी का हक मिलना चाहिए। कुशवाहा ने कहा कि वर्तमान बिल में ओबीसी वर्ग के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं था, लेकिन उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि इस मुद्दे को बहाना बनाकर महिला आरक्षण बिल का विरोध किया गया। केंद्र सरकार भविष्य में इस दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। अभी जातिगत गणना की प्रक्रिया चल रही है और रिपोर्ट आने के बाद ओबीसी वर्ग को लेकर ठोस निर्णय लिया जाएगा। विपक्ष इस तथ्य को समझने में असफल रहा और जल्दबाजी में विरोध कर दिया, जिससे बिल पारित नहीं हो सका। कुशवाहा ने घोषणा की कि उनकी पार्टी 22 अप्रैल को पूरे बिहार में “धिक्कार मार्च” निकालेगी। यह मार्च राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में आयोजित किया जाएगा। इस मार्च के जरिए जनता के बीच जाकर विपक्ष की “वास्तविक मंशा” को उजागर किया जाएगा और यह बताया जाएगा कि किस तरह महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीति की गई। जातीय गणना के बाद होगा बड़ा फैसला कुशवाहा ने कहा कि जब जनगणना और जातीय सर्वेक्षण की पूरी रिपोर्ट सामने आएगी, तब सभी वर्गों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इसके आधार पर ओबीसी को प्रतिनिधित्व देने का रास्ता भी तय किया जाएगा। यह एक प्रक्रिया है और सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना चाहती है, लेकिन विपक्ष ने राजनीतिक लाभ के लिए इसे बाधित किया।
परिसीमन का समर्थन, बढ़ सकती थीं सीटें कुशवाहा ने परिसीमन का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से इसकी मांग करती रही है। उन्होंने कहा कि संविधान ने यह अधिकार दिया है, इसलिए इसे लागू होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अगर परिसीमन लागू होता तो बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 हो सकती थी, वहीं विधानसभा सीटें भी बढ़कर लगभग 365 तक पहुंच सकती थीं। उनके अनुसार, इससे महिलाओं को भी अधिक प्रतिनिधित्व मिलता, लेकिन विपक्ष ने इस प्रक्रिया को भी बाधित कर दिया। विपक्ष पर ‘अन्याय’ का आरोप कुशवाहा ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों के साथ अन्याय किया है। विपक्ष की मंशा साफ नहीं है और वह सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए जरूरी विधेयकों का विरोध करता है। टाइमिंग और मंशा को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवाल सिर्फ जनता को भ्रमित करने के लिए हैं।


