दमोह की बेटियों के संघर्ष ने किया साबित, बेटों से कहीं आगे हैं वह

दमोह. जिले से ४० किमी दूर कुलुवा गांव में रहने वाले किसान सुखनंदन कुर्मी की बेटी निधि ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई की और कला संकाय से कक्षा बारहवीं में ४८४ अंकर लाकर प्रदेश में छटवा स्थान प्राप्त किया। निधि ने दमोह से ८ किमी दूर अपने मामा भागीरथ कुर्मी के घर रहकर पढ़ाई की। वह ऑटो से रोज दमोह के एक्सीलेंस स्कूल आती-जाती थी, लेकिन कभी पढ़ाई को बोझ नहीं समझा। निधि घर में एक बहन और एक भाई में सबसे बड़ी हैं।

निधि कहती है कि ५-६ घंटे की पढ़ाई, विषय को समझना और नोट्स तैयार करना उनकी सफलता का मुख्य बिंदू रहा। अब आगे बीए बीएड कर प्रोफेसर की तैयारी करेंगी। साथ ही कॉम्पिटिशन एग्जाम में हिस्सा लेगी। निधि कहती है कि उनके गांव के पास भी स्कूल है, लेकिन उनके माता-पिता चाहते थे कि दमोह में पढ़ो और कुछ बनकर दिखाओं, उनका ही सपना पूरा करना चाहती हूं।


मां के संघर्ष और पिता के सम्मान को बढ़ाएगी बेटी

दमोह. शहर के असाटी वार्ड में रहने वाले सुभाष असाटी की बेटी प्रगति असाटी ने विज्ञान गणित समूह में
४८५ अंक प्राप्त कर बारहवीं में प्रदेश में आठवां स्थान प्राप्त किया है। एक्सीलेंस स्कूल दमोह की छात्रा प्रगति ने हाईस्कूल में भी प्रदेश में रैंक बनाई थी। प्रगति की मां पोस्ट ऑफिस में एजेंट है, जबकि पिता मां के काम में ही सहयोग कर बेटियों को पढ़ाते आ रहे हैं। विषय परिस्थितियों में भी माता-पिता ने बेटी का संबल बनाए रखा। प्रगति कहती है कि अब सीबीटी का एग्जाम के बाद सिविल सर्विस में जाना चाहती हूं। माता पिता से सबसे ज्यादा प्रेरणा मिली है, मां पुलिस में जाना चाहती थी, लेकिन किसी कारणवश नहीं जा सकी। मां चाहती है कि उनकी बेटियां उनका सपना पूरा करें। अब सरकारी जॉब ही सपना है।


सीए बनना चाहती है मेडिकल संचालक की बेटी

दमोह. शहर के फुटेरा वार्ड २ में रहने वाले संजय अग्रवाल की पुत्री छवि ने वाणिज्य समूह में कक्षा बारहवीं में ४८८ अंक लाकर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। नवजागृति स्कूल की छात्रा छवि के पिता मेडिकल दुकान संचालक है। छवि कहती है कि वह आगे अब सीए की तैयारी कर रही हैं, यह उनका लक्ष्य है। छवि अपनी पढ़ाई में परिजनों के साथ स्कूल स्टाफ को श्रेय देती हैं। उन्होंने रोजाना ४ से ५ घंटे की पढ़ाई करने के बाद यह मुकाम हासिल किया है।


मां-पापा के लिए मेहनत बढ़ाई, नाना के घर में रहकर बनी टॉपर

दमोह. शहर के विवेकानंद नगर में अपने नाना के घर रहकर पढ़ाई करने वाले राजनंदनी लोधी ने जीव विज्ञान समूह में ४८२ अंक प्राप्त कर प्रदेश में दसवां स्थान प्राप्त किया है। उनके पिता लाखन लाल फर्नीचर कॉरपेंटर है और सागर जिले में रहते हैं, उनकी सोच थी कि उनकी पढ़कर लिखकर अच्छा मुकाम पाए, इसीलिए उन्होंने उसे नाना के यहां भेज दिया था। बेटी ने जब मां-पापा के सपनों उसमें देखा तो पढ़ाई मेहनत बढ़ाई और आज उसका नाम मैरिट में हैं। राजनंदनी बताती है कि वह खुद भी नंबर पर ज्यादा भरोसा नहीं करती है, लेकिन इन नंबर्स में आज मां-पापा सबसे ज्यादा खुश है। उनके सपनों पर खरा उतरूंगी। आगे नीट की तैयारी करने जा रही हूं।


पापा सरकारी शिक्षक, बेटी ने निजी स्कूल में पढ़कर बनाई रैंक

दमोह. शहर ही नहीं गांव के बच्चों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। हिंडोरिया के वार्ड नंबर ८ में रहने वाली उजमा फातिमा हिंडोरिया के राजेंद्र पाठक मेमोरियल हायर सेकेंडरी स्कूल में अध्ययनरत थी। उजमा के पिता मुबश्शीर खान हिंडोरिया में ही शासकीय स्कूल में शिक्षक है। उजमा ने जीव विज्ञान समूह से ४८७ अंक पाकर प्रदेश में पांचवा स्थान बनाया है। उजमा बताती है कि शिक्षा ही उनका उद्देश्य रहा है, इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की। हालांकि, वह पिता की तरह शिक्षक नहीं बनना चाहती है। उजमा अब नीट की तैयारी कर रही है और डॉक्टर बनना उसका लक्ष्य है।


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