किसान रजिस्ट्रेशन की रफ्तार सुस्त, 20% पर सिमटा

भास्कर न्यूज | लखीसराय| जिले में किसान रजिस्ट्रेशन की रफ्तार फिलहाल काफी धीमी बनी हुई है। जिले के करीब 54 हजार किसानों में से अब तक केवल 25 से 30 प्रतिशत किसानों का ही पंजीकरण हो पाया है, जिससे बड़ी संख्या में किसान अभी भी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। प्रखंड स्तर पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है, जहां अधिकांश जगहों पर रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 20 से 40 प्रतिशत के बीच ही सिमटा हुआ है। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, जमाबंदी, भूमि कागजात की कमी और तकनीकी दिक्कतें इस धीमी प्रगति के मुख्य कारण हैं। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक किसान को डिजिटल फार्मर आईडी से जोड़ना है, ताकि उन्हें पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लाभ मिल सके। इस बीच जिला प्रशासन ने अभियान को तेज करने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। डीएम शैलेन्द्र कुमार ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही मिशन मोड में एफआरके कार्य को फिर से शुरू किया जाएगा और सभी योग्य किसानों का कार्ड तैयार कराया जाएगा, ताकि कोई भी लाभुक किसान योजनाओं से वंचित न रहे। जिले के विभिन्न प्रखंडों में किसान रजिस्ट्रेशन की स्थिति अपेक्षा से काफी पीछे है। हलसी में 8,034 किसानों में से 3,228 (लगभग 40%), सूर्यगढ़ा में 18,522 में से केवल 3,706 (करीब 20%) किसानों का ही पंजीकरण हो पाया है। लखीसराय प्रखंड में 6,146 में से 1,315, पिपरिया में 2,888 में से 779, रामगढ़ चौक में 4,801 में से 1,584, चानन में 9,280 में से 2,033 और बड़हिया में 4,305 में से 1,439 किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। ये आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश प्रखंड लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे हैं। किसान रजिस्ट्रेशन की धीमी प्रगति को देखते हुए जिला प्रशासन अब इसे तेज करने की तैयारी में जुट गया है। डीएम शैलेन्द्र कुमार ने कहा है कि एक बार फिर मिशन मोड में एफआरके कार्य शुरू किया जाएगा और सभी पात्र किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया। किसान रजिस्ट्रेशन की धीमी प्रगति के पीछे सबसे बड़ी वजह जमाबंदी और आवश्यक दस्तावेजों की कमी मानी जा रही है। कई किसानों के पास भूमि से जुड़े सही कागजात उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनका पंजीकरण अटक रहा है। इसके अलावा ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीकी खामियां और नेटवर्क की समस्या भी कार्य में बाधा बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल जानकारी की कमी के कारण भी किसान इस प्रक्रिया को पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं। कई जगहों पर ऑपरेटरों की कमी और सर्वर स्लो रहने की समस्या भी सामने आई है। भास्कर न्यूज | लखीसराय| जिले में किसान रजिस्ट्रेशन की रफ्तार फिलहाल काफी धीमी बनी हुई है। जिले के करीब 54 हजार किसानों में से अब तक केवल 25 से 30 प्रतिशत किसानों का ही पंजीकरण हो पाया है, जिससे बड़ी संख्या में किसान अभी भी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। प्रखंड स्तर पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है, जहां अधिकांश जगहों पर रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 20 से 40 प्रतिशत के बीच ही सिमटा हुआ है। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, जमाबंदी, भूमि कागजात की कमी और तकनीकी दिक्कतें इस धीमी प्रगति के मुख्य कारण हैं। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक किसान को डिजिटल फार्मर आईडी से जोड़ना है, ताकि उन्हें पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लाभ मिल सके। इस बीच जिला प्रशासन ने अभियान को तेज करने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। डीएम शैलेन्द्र कुमार ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही मिशन मोड में एफआरके कार्य को फिर से शुरू किया जाएगा और सभी योग्य किसानों का कार्ड तैयार कराया जाएगा, ताकि कोई भी लाभुक किसान योजनाओं से वंचित न रहे। जिले के विभिन्न प्रखंडों में किसान रजिस्ट्रेशन की स्थिति अपेक्षा से काफी पीछे है। हलसी में 8,034 किसानों में से 3,228 (लगभग 40%), सूर्यगढ़ा में 18,522 में से केवल 3,706 (करीब 20%) किसानों का ही पंजीकरण हो पाया है। लखीसराय प्रखंड में 6,146 में से 1,315, पिपरिया में 2,888 में से 779, रामगढ़ चौक में 4,801 में से 1,584, चानन में 9,280 में से 2,033 और बड़हिया में 4,305 में से 1,439 किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। ये आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश प्रखंड लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे हैं। किसान रजिस्ट्रेशन की धीमी प्रगति को देखते हुए जिला प्रशासन अब इसे तेज करने की तैयारी में जुट गया है। डीएम शैलेन्द्र कुमार ने कहा है कि एक बार फिर मिशन मोड में एफआरके कार्य शुरू किया जाएगा और सभी पात्र किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया। किसान रजिस्ट्रेशन की धीमी प्रगति के पीछे सबसे बड़ी वजह जमाबंदी और आवश्यक दस्तावेजों की कमी मानी जा रही है। कई किसानों के पास भूमि से जुड़े सही कागजात उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनका पंजीकरण अटक रहा है। इसके अलावा ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीकी खामियां और नेटवर्क की समस्या भी कार्य में बाधा बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल जानकारी की कमी के कारण भी किसान इस प्रक्रिया को पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं। कई जगहों पर ऑपरेटरों की कमी और सर्वर स्लो रहने की समस्या भी सामने आई है।  

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