बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सोमवार रात पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
बिहार में नई सरकार के गठन के बाद से बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं हैं। पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की नाराजगी पार्टी के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। उन्होंने ज़मीन पर मेहनत और लंबा संघर्ष किया है, और हाल ही में ‘कमांडर’ (पार्टी नेतृत्व) के फैसले पर बयान देकर अपनी नाराजगी भी जाहिर कर दी है। शुरुआत में तो पार्टी ने इस मुद्दे को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन अब अंदरूनी समर्थन बढ़ने से उसकी चिंता बढ़ गई है। जो नेता अब तक पर्दे के पीछे रहकर अपनी बात रखते थे, वे अब खुलकर सामने आने लगे हैं। इसी बीच, सोमवार को प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी की विजय कुमार सिन्हा से मुलाकात ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। हालांकि, पार्टी इस मुलाकात को संगठनात्मक मुद्दा और आरा-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव से जुड़ा बता रही है।
बीजेपी में खींचतान
नई सरकार के गठन के साथ ही चर्चा है कि पार्टी विजय कुमार सिन्हा की जगह प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी को मंत्री बनाने और संगठन में बदलाव करने की तैयारी में है। इस फैसले को लेकर पार्टी के भीतर दो तरह की राय सामने आ रही है। एक वर्ग का मानना है कि अब पार्टी को ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत और कायस्थ (लाला) समाज की जरूरत नहीं है। ‘यूजीसी’ की चर्चा करते हुए इस वर्ग का कहना है कि पार्टी को उनका वोट केवल सत्ता तक पहुंचने के लिए चाहिए, लेकिन सत्ता में भागीदारी और सम्मान को लेकर गंभीरता नहीं दिखती।
वहीं, दूसरा वर्ग मानता है कि सम्राट सरकार में विजय कुमार सिन्हा डिप्टी सीएम का पद चाहते हैं। हालांकि, गठबंधन की स्थिति ऐसी है कि दोनों डिप्टी सीएम पद जदयू के खाते में हैं। ऐसे में विजय सिन्हा को संगठन में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है। मामले के तूल पकड़ने के बाद सोमवार रात बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विजय कुमार सिन्हा से मुलाकात कर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने विजय सिन्हा को उनकी पसंद से मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष चुनने का प्रस्ताव भी दिया है। माना जा रहा है कि पार्टी मंत्रिमंडल विस्तार से पहले इस मुद्दे का समाधान निकाल लेना चाहती है।


