जिस दिन हुआ जन्म उसी दिन गई जान: खाने के बाद कूलर चलाने गया था राकेश, बटन दबाते ही स्विच बोर्ड से चिपका

जिस दिन हुआ जन्म उसी दिन गई जान: खाने के बाद कूलर चलाने गया था राकेश, बटन दबाते ही स्विच बोर्ड से चिपका

Uttarakhand Accident News: हल्द्वानी में 14 साल के बच्चे की उसके जन्मदिन के दिन ही करंट लगने से मौत हो गई। रात के समय गर्मी लगने पर बच्चा जैसे ही कूलर का स्विच ऑन करने गया वह करंट की चपेट में आ गया और स्विच बोर्ड से चिपक गया। काफी देर तक जब बच्चा वापस नहीं लौटा तो परिजनों ने कमरे में जाकर देखा जहां उसकी हालत देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

बर्थडे के दिन ही छिन गई जिंदगी

मूल रूप से नैनीताल के हरीश ताल निवासी संतोष आर्या फॉरेस्ट रिसर्च सेंटर में दैनिक वेतनभोगी माली का काम करते हैं। गुरुवार देर शाम संतोष आर्या का 14 वर्षीय बेटा राकेश अपना जन्मदिन मनाने के बाद रात को खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहा था। गर्मी होने के कारण राकेश अपने कमरे में कूलर चलाने गया। जैसे ही उसने कूलर का बटन दबाया वह तेज करंट की चपेट में आ गया और स्विच बोर्ड से बुरी तरह चिपक गया।

घर में पसरा मातम

जब काफी देर तक कमरे से कूलर चलने की आवाज नहीं आई और राकेश भी लौटकर नहीं आया तो परिजन उसे ढूंढने लगे। जैसे ही परिवार के लोग राकेश के कमरे में पहूंचे तो वहां का नजारा देखकर चीख पड़े। उन्होंने तुरंत राकेश को बोर्ड से अलग किया और उसे लेकर पास के अस्पताल भागे। लेकिन करंट का झटका इतना तेज था कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही मासूम की जान जा चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

14 को जन्म और 14 को ही मौत

पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पिता संतोष आर्या बेसुध हालत में थे। उन्होंने रोते हुए बताया कि पहाड़ी कैलेंडर के हिसाब से ठीक 14 साल पहले 14 गते को ही राकेश का जन्म हुआ था और आज 14 गते के दिन ही उसकी जान चली गई। जिस दिन घर में जन्मदिन की खुशियां मनाई जा रही थीं उसी दिन बेटे का शव घर पहुंचने से पूरे इलाके का माहौल गमगीन हो गया।

पढ़ाई में होनहार था राकेश

राकेश एचएन इंटर कॉलेज में दसवीं कक्षा का स्टूडेंट था। वह पढ़ाई में बहुत होनहार था और उसे स्पोर्ट्स बाइक्स का भी बहुत शौक था। राकेश के परिवार में उसका एक बड़ा भाई भी है जो 12वीं कक्षा में पढ़ता है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू की। इस दर्दनाक हादसे के बाद फॉरेस्ट रिसर्च सेंटर परिसर में रहने वाले बाकी परिवारों में भी शोक और दहशत का माहौल है।

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