Rajasthan Industrial Development : राजस्थान औद्योगिक विकास नीति-2026 को कुछ दिन पहले ही मंजूरी दी गई है। इसमें पश्चिमी राजस्थान के खाते में सर्कुलर इकोनॉमी आधारित उद्योगों के लिए नई संभावनाएं खुलती नजर आ रही है। नई नीति में ग्रीन इंडस्ट्री, संसाधनों के पुनर्चक्रण और पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी गई है। इससे जोधपुर, पाली, बालोतरा, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में नए निवेश का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।
नई नीति में पहली बार सर्कुलर इकोनॉमी को औद्योगिक विकास के प्रमुख स्तंभों में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट को दोबारा उपयोग में लाकर उसे संसाधन में बदलना है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि उद्योगों की उत्पादन लागत भी घटेगी। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में इसका सबसे बड़ा लाभ पचपदरा रिफाइनरी और उससे विकसित होने वाले पेट्रोकेमिकल क्लस्टर को मिल सकता है। रिफाइनरी आधारित उद्योगों में सब प्रोडक्ट और औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।
हर क्षेत्र में अलग विकास
नीति में डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, सेमीकंडक्टर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे हाईटेक क्षेत्रों को भी बढ़ावा दिया गया है। यह सभी राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों पर फोकस है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो पश्चिमी राजस्थान पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ हरित और सतत औद्योगिक विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।
नई औद्योगिक नीति-2026 की प्रमुख बातें
1- हाईटेक उद्योगों को पहली प्राथमिकता।
2- डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स को उद्योग का दर्जा।
3- सेमीकंडक्टर व डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस।
4- एमएसएमई और ओडीओपी को बढ़ावा।
5- ग्रीन इंडस्ट्री और सर्कुलर इकोनॉमी को प्रोत्साहन।
6- नए औद्योगिक पार्क और रीको क्षेत्रों का विकास।
पश्चिमी राजस्थान में कहां दिखेगा असर
1- पचपदरा रिफाइनरी आधारित पेट्रोकेमिकल उद्योग।
2- जोधपुर-पाली-बालोतरा में जल पुनर्चक्रण मॉडल।
3- जोधपुर फर्नीचर उद्योग में वेस्ट रीयूज।
4- खनन अपशिष्ट से निर्माण सामग्री।
5- सौर ऊर्जा और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग उद्योग।
नए अवसर पैदा होंगे
नई औद्योगिक विकास नीति-2026 में सर्कुलर इकोनॉमी को प्रमुख स्थान मिलने से पश्चिमी राजस्थान के उद्योगों के लिए नए अवसर बनेंगे। पचपदरा रिफाइनरी और उद्योगों में अपशिष्ट के पुनः उपयोग से निवेश बढ़ेगा, उत्पादन लागत घटेगी और क्षेत्र हरित औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा।
घनश्याम ओझा, राजस्थान प्रभारी, लद्यु उद्योग भारती
पर्यावरण संरक्षण
राजस्थान की नई औद्योगिक नीति पश्चिमी राजस्थान को सतत औद्योगिक विकास का नया मॉडल बना सकती है। सर्कुलर इकोनॉमी के जरिए कचरे को संसाधन में बदलने पर जोर रहेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
अनुराग लोहिया, अध्यक्ष, जोधपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
नवाचार पर फोकस
पचपदरा रिफाइनरी और जोधपुर-पाली औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के बीच सर्कुलर इकोनॉमी नई संभावनाएं लेकर आई है। जल पुनर्चक्रण, औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग और हरित तकनीकों को बढ़ावा मिलने से पश्चिमी राजस्थान निवेश, नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिकीकरण का मजबूत केंद्र बन सकता है।
महेश पुरोहित, एन्टरप्रेन्योर


