मुजफ्फरपुर के सदर थाना क्षेत्र के पताही रूप गांव में पुतुल हत्याकांड हुआ था। ये मामला अब मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है। पीड़ित परिवार ने मानवाधिकार वकील एस.के. झा के जरिए बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। बता दें कि पिछले 14 मार्च को पताही रूप गांव निवासी पुतुल कुमार की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक की पत्नी चंचल देवी ने सदर थाने में वकीलों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। कहा- सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस का रवैया इस मामले में उदासीन रहा है। हत्या के इस मामले में अब तक केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी हो पाई है, जबकि अन्य आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। पीड़ित परिवार के अनुसार, आरोपी की ओर से उन पर लगातार मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसा न करने पर परिवार सहित सामूहिक नरसंहार की धमकी भी दी जा रही है। परिवार लगातार पुलिस से अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गुहार लगा रहा है, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला है। उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच आवश्यक इसी वजह से पीड़ित परिवार ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा के माध्यम से बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में याचिकाएं दर्ज कराई हैं। वकील झा ने बताया कि यह मामला अतिसंवेदनशील और मानवाधिकार उल्लंघन की गंभीर श्रेणी का है, जिसकी उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच आवश्यक है। आयोग से आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को आवश्यक आदेश देने की भी मांग की गई है। मुजफ्फरपुर के सदर थाना क्षेत्र के पताही रूप गांव में पुतुल हत्याकांड हुआ था। ये मामला अब मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है। पीड़ित परिवार ने मानवाधिकार वकील एस.के. झा के जरिए बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। बता दें कि पिछले 14 मार्च को पताही रूप गांव निवासी पुतुल कुमार की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक की पत्नी चंचल देवी ने सदर थाने में वकीलों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। कहा- सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस का रवैया इस मामले में उदासीन रहा है। हत्या के इस मामले में अब तक केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी हो पाई है, जबकि अन्य आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। पीड़ित परिवार के अनुसार, आरोपी की ओर से उन पर लगातार मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसा न करने पर परिवार सहित सामूहिक नरसंहार की धमकी भी दी जा रही है। परिवार लगातार पुलिस से अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गुहार लगा रहा है, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला है। उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच आवश्यक इसी वजह से पीड़ित परिवार ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा के माध्यम से बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में याचिकाएं दर्ज कराई हैं। वकील झा ने बताया कि यह मामला अतिसंवेदनशील और मानवाधिकार उल्लंघन की गंभीर श्रेणी का है, जिसकी उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच आवश्यक है। आयोग से आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को आवश्यक आदेश देने की भी मांग की गई है।


