पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक योगदान को संरक्षित करने के उद्देश्य से “नीतीश आर्काइव” अभियान की शुरुआत की है। इसकी पहल जनता दल यूनाइटेड के विधान पार्षद और मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने की है। पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में नीरज कुमार ने कहा कि, यह केवल एक दस्तावेजी परियोजना नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक यात्रा को सहेजने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। आने वाली पीढ़ियों को यह जानने और समझने का अवसर मिलेगा कि किस तरह नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण सामाजिक और प्रशासनिक बदलाव किए।’ ‘नीतीशवाद’ को बताया सामाजिक न्याय और विकास का मॉडल प्रेस वार्ता के दौरान नीरज कुमार ने “नीतीशवाद” की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि, ‘यह सामाजिक न्याय, विकास, सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण और बिहार की अस्मिता पर आधारित एक समावेशी वैचारिक दृष्टि है। महात्मा गांधी, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, डॉ. राम मनोहर लोहिया और जननायक कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा को आधुनिक प्रशासनिक सोच और विकास मॉडल के साथ धरातल पर उतारने का नाम ही “नीतीशवाद” है। डिजिटल रूप में संरक्षित होंगे वीडियो, दस्तावेज और संस्मरण नीरज कुमार ने बताया कि, “नीतीश आर्काइव” के माध्यम से संसद, बिहार विधानमंडल, जनसभाओं और मीडिया संवादों से जुड़े पुराने वीडियो, ऐतिहासिक दस्तावेज, समाचार लेख, फोटोग्राफ और व्यक्तिगत संस्मरणों को डिजिटल रूप में संकलित किया जाएगा। इसके अलावा आम नागरिकों, पार्टी कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और विशेषज्ञों की व्यक्तिगत स्मृतियों को भी वीडियो डॉक्यूमेंटेशन के रूप में संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, इस आर्काइव में नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाएं, ऐतिहासिक फैसले और अप्रत्याशित कहानियां भी उपलब्ध रहेंगी। इससे शोधकर्ताओं, छात्रों, पत्रकारों और युवाओं को बिहार की राजनीति और प्रशासनिक बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।’ नौ महीने तक चलेगी ‘नीतीश आर्काइव यात्रा’ जदयू एमएलसी ने बताया कि, “नीतीश आर्काइव यात्रा” के अंतर्गत एक विशेष टीम अगले नौ महीनों तक बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा करेगी। इस दौरान नीतीश कुमार से जुड़ी महत्वपूर्ण स्मृतियां, फोटो, वीडियो, दस्तावेज और व्यक्तिगत अनुभव एकत्र किए जाएंगे। गांवों और कस्बों में ऐसे कई लोग हैं, जिनके पास नीतीश कुमार से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें, संस्मरण और अनुभव हैं। उन्होंने बताया कि, ‘इस अभियान के माध्यम से उन सभी जानकारियों को एक मंच पर लाकर सुरक्षित किया जाएगा ताकि बिहार का राजनीतिक इतिहास आने वाले समय में भी जीवित रह सके।’ एक मार्च 2027 से वेबसाइट पर उपलब्ध होगी सामग्री नीरज कुमार ने जानकारी दी कि “नीतीश आर्काइव” की सामग्री एक मार्च 2027 से वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। लोग वेबसाइट के माध्यम से वीडियो, दस्तावेज, लेख और संस्मरण पढ़ और देख सकेंगे। लोगों से सहयोग की अपील नीरज कुमार ने आम लोगों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बड़े नेताओं की महत्वपूर्ण स्मृतियां समय के साथ समाप्त हो गईं, लेकिन “नीतीश आर्काइव” का उद्देश्य इस ऐतिहासिक भूल को रोकना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जाति और धर्म से ऊपर उठकर समाज के हर वर्ग के लिए काम किया है। यही कारण है कि आज बिहार के हर क्षेत्र और हर वर्ग के लोग उनसे खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। इसी सोच के साथ उनके नाम पर यह आर्काइव तैयार किया जा रहा है। इन माध्यमों से साझा कर सकते हैं सामग्री “नीतीश आर्काइव” से जुड़ी सामग्री लोग ईमेल, व्हाट्सएप और वेबसाइट पोर्टल के माध्यम से साझा कर सकते हैं। इसके लिए ईमेल आईडी archivenitish@gmail.com, व्हाट्सएप नंबर 7261068964 और वेबसाइट nitisharchive.com जारी किया गया है। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस अभियान की मौजूदगी रहेगी। लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब के माध्यम से भी “नीतीश आर्काइव” से जुड़ सकेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक योगदान को संरक्षित करने के उद्देश्य से “नीतीश आर्काइव” अभियान की शुरुआत की है। इसकी पहल जनता दल यूनाइटेड के विधान पार्षद और मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने की है। पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में नीरज कुमार ने कहा कि, यह केवल एक दस्तावेजी परियोजना नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक यात्रा को सहेजने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। आने वाली पीढ़ियों को यह जानने और समझने का अवसर मिलेगा कि किस तरह नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण सामाजिक और प्रशासनिक बदलाव किए।’ ‘नीतीशवाद’ को बताया सामाजिक न्याय और विकास का मॉडल प्रेस वार्ता के दौरान नीरज कुमार ने “नीतीशवाद” की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि, ‘यह सामाजिक न्याय, विकास, सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण और बिहार की अस्मिता पर आधारित एक समावेशी वैचारिक दृष्टि है। महात्मा गांधी, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, डॉ. राम मनोहर लोहिया और जननायक कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा को आधुनिक प्रशासनिक सोच और विकास मॉडल के साथ धरातल पर उतारने का नाम ही “नीतीशवाद” है। डिजिटल रूप में संरक्षित होंगे वीडियो, दस्तावेज और संस्मरण नीरज कुमार ने बताया कि, “नीतीश आर्काइव” के माध्यम से संसद, बिहार विधानमंडल, जनसभाओं और मीडिया संवादों से जुड़े पुराने वीडियो, ऐतिहासिक दस्तावेज, समाचार लेख, फोटोग्राफ और व्यक्तिगत संस्मरणों को डिजिटल रूप में संकलित किया जाएगा। इसके अलावा आम नागरिकों, पार्टी कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और विशेषज्ञों की व्यक्तिगत स्मृतियों को भी वीडियो डॉक्यूमेंटेशन के रूप में संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, इस आर्काइव में नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाएं, ऐतिहासिक फैसले और अप्रत्याशित कहानियां भी उपलब्ध रहेंगी। इससे शोधकर्ताओं, छात्रों, पत्रकारों और युवाओं को बिहार की राजनीति और प्रशासनिक बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।’ नौ महीने तक चलेगी ‘नीतीश आर्काइव यात्रा’ जदयू एमएलसी ने बताया कि, “नीतीश आर्काइव यात्रा” के अंतर्गत एक विशेष टीम अगले नौ महीनों तक बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा करेगी। इस दौरान नीतीश कुमार से जुड़ी महत्वपूर्ण स्मृतियां, फोटो, वीडियो, दस्तावेज और व्यक्तिगत अनुभव एकत्र किए जाएंगे। गांवों और कस्बों में ऐसे कई लोग हैं, जिनके पास नीतीश कुमार से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें, संस्मरण और अनुभव हैं। उन्होंने बताया कि, ‘इस अभियान के माध्यम से उन सभी जानकारियों को एक मंच पर लाकर सुरक्षित किया जाएगा ताकि बिहार का राजनीतिक इतिहास आने वाले समय में भी जीवित रह सके।’ एक मार्च 2027 से वेबसाइट पर उपलब्ध होगी सामग्री नीरज कुमार ने जानकारी दी कि “नीतीश आर्काइव” की सामग्री एक मार्च 2027 से वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। लोग वेबसाइट के माध्यम से वीडियो, दस्तावेज, लेख और संस्मरण पढ़ और देख सकेंगे। लोगों से सहयोग की अपील नीरज कुमार ने आम लोगों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बड़े नेताओं की महत्वपूर्ण स्मृतियां समय के साथ समाप्त हो गईं, लेकिन “नीतीश आर्काइव” का उद्देश्य इस ऐतिहासिक भूल को रोकना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जाति और धर्म से ऊपर उठकर समाज के हर वर्ग के लिए काम किया है। यही कारण है कि आज बिहार के हर क्षेत्र और हर वर्ग के लोग उनसे खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। इसी सोच के साथ उनके नाम पर यह आर्काइव तैयार किया जा रहा है। इन माध्यमों से साझा कर सकते हैं सामग्री “नीतीश आर्काइव” से जुड़ी सामग्री लोग ईमेल, व्हाट्सएप और वेबसाइट पोर्टल के माध्यम से साझा कर सकते हैं। इसके लिए ईमेल आईडी archivenitish@gmail.com, व्हाट्सएप नंबर 7261068964 और वेबसाइट nitisharchive.com जारी किया गया है। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस अभियान की मौजूदगी रहेगी। लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब के माध्यम से भी “नीतीश आर्काइव” से जुड़ सकेंगे।


