पूर्णिया में आपदा बचाव मॉक ड्रिल की तैयारी:ट्रेनर ने बचाव कार्य के तरीके सिखाए, 14 मई को शिविर लगाया जाएगा

पूर्णिया में आपदा बचाव मॉक ड्रिल की तैयारी:ट्रेनर ने बचाव कार्य के तरीके सिखाए, 14 मई को शिविर लगाया जाएगा

पूर्णिया शहर के जिला स्कूल मैदान में नागरिक सुरक्षा द्वारा एक विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। यह शिविर आगामी 14 मई को होने वाली मॉक ड्रिल की तैयारी के लिए था। प्रशिक्षण में प्रशिक्षकों और स्वयंसेवकों को बचाव कार्य की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का मुख्य दायित्व ट्रेनर अखिलेश कुमार शर्मा ने संभाला। शिविर का उद्देश्य आपदा के समय लोगों को सुरक्षित निकालना, प्राथमिक सहायता प्रदान करना और त्वरित बचाव कार्य के व्यावहारिक तरीके सिखाना था। प्रशिक्षण में “बंबू ब्लैंकेट मेथड” का अभ्यास कराया गया। इस विधि में सिखाया गया कि स्ट्रेचर उपलब्ध न होने पर बांस और कंबल का उपयोग करके अस्थायी स्ट्रेचर कैसे बनाया जाए, ताकि घायल व्यक्ति को अस्पताल या एंबुलेंस तक पहुंचाया जा सके। इसके बाद “फायरमैन लिफ्ट” मेथड का प्रशिक्षण दिया गया। इस तकनीक में बताया गया कि दुर्घटनास्थल पर संसाधन न होने पर एक प्रशिक्षित स्वयंसेवक घायल व्यक्ति को अपने कंधे पर उठाकर सुरक्षित रूप से प्राथमिक उपचार केंद्र या एंबुलेंस तक कैसे पहुंचा सकता है। “येलींग मेथड” का भी अभ्यास कराया गया। इसमें सिखाया गया कि आपदा में फंसे व्यक्ति, जो बोलने में असमर्थ हो, कैसे आवाज या संकेत देकर मदद मांग सकता है। शिविर में आपदा प्रबंधन और बचाव से संबंधित कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां और व्यावहारिक अभ्यास भी शामिल थे। इस अवसर पर नागरिक सुरक्षा से जुड़े सदस्यों ने अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मीडिया के माध्यम से सरकार से मासिक मानदेय बढ़ाने की मांग की। प्रशिक्षण देने वालों में अखिलेश कुमार शर्मा के साथ दिलीप चौधरी, विक्रम दास, अशोक ऋषि, गणेश दास, पूजा कुमारी और मुस्कान कुमारी शामिल थे। प्रशिक्षण लेने वाले स्वयंसेवकों में पंकज कुमार, राजू साह, जूही साह, शिवानी कुमारी, मनीषा कुमारी, आशा, रूपा और निभा कुमारी उपस्थित थीं। पूर्णिया शहर के जिला स्कूल मैदान में नागरिक सुरक्षा द्वारा एक विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। यह शिविर आगामी 14 मई को होने वाली मॉक ड्रिल की तैयारी के लिए था। प्रशिक्षण में प्रशिक्षकों और स्वयंसेवकों को बचाव कार्य की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का मुख्य दायित्व ट्रेनर अखिलेश कुमार शर्मा ने संभाला। शिविर का उद्देश्य आपदा के समय लोगों को सुरक्षित निकालना, प्राथमिक सहायता प्रदान करना और त्वरित बचाव कार्य के व्यावहारिक तरीके सिखाना था। प्रशिक्षण में “बंबू ब्लैंकेट मेथड” का अभ्यास कराया गया। इस विधि में सिखाया गया कि स्ट्रेचर उपलब्ध न होने पर बांस और कंबल का उपयोग करके अस्थायी स्ट्रेचर कैसे बनाया जाए, ताकि घायल व्यक्ति को अस्पताल या एंबुलेंस तक पहुंचाया जा सके। इसके बाद “फायरमैन लिफ्ट” मेथड का प्रशिक्षण दिया गया। इस तकनीक में बताया गया कि दुर्घटनास्थल पर संसाधन न होने पर एक प्रशिक्षित स्वयंसेवक घायल व्यक्ति को अपने कंधे पर उठाकर सुरक्षित रूप से प्राथमिक उपचार केंद्र या एंबुलेंस तक कैसे पहुंचा सकता है। “येलींग मेथड” का भी अभ्यास कराया गया। इसमें सिखाया गया कि आपदा में फंसे व्यक्ति, जो बोलने में असमर्थ हो, कैसे आवाज या संकेत देकर मदद मांग सकता है। शिविर में आपदा प्रबंधन और बचाव से संबंधित कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां और व्यावहारिक अभ्यास भी शामिल थे। इस अवसर पर नागरिक सुरक्षा से जुड़े सदस्यों ने अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मीडिया के माध्यम से सरकार से मासिक मानदेय बढ़ाने की मांग की। प्रशिक्षण देने वालों में अखिलेश कुमार शर्मा के साथ दिलीप चौधरी, विक्रम दास, अशोक ऋषि, गणेश दास, पूजा कुमारी और मुस्कान कुमारी शामिल थे। प्रशिक्षण लेने वाले स्वयंसेवकों में पंकज कुमार, राजू साह, जूही साह, शिवानी कुमारी, मनीषा कुमारी, आशा, रूपा और निभा कुमारी उपस्थित थीं।  

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