सीटू ने श्रम संहिताओं के विरोध में प्रदर्शन किया:पुराने श्रम कानून बहाल करने की मांग पर गजट प्रतियां फूंकीं

सीटू ने श्रम संहिताओं के विरोध में प्रदर्शन किया:पुराने श्रम कानून बहाल करने की मांग पर गजट प्रतियां फूंकीं

बुलंदशहर में ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर सीटू कार्यकर्ताओं ने सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नई श्रम संहिताओं की अधिसूचना (गजट) की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया और विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड सुरेंद्र सिंह ने कहा कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने से मजदूरों का शोषण बढ़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देशी-विदेशी कंपनियों के मुनाफे को बढ़ाने के लिए श्रम कानूनों में बदलाव कर रही है। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि निजी क्षेत्र में ठेका मजदूरों से 8 घंटे के बजाय 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है, जबकि उन्हें मात्र 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। उन्होंने नोएडा और मानेसर में मजदूर आंदोलनों के दौरान गिरफ्तार किए गए श्रमिकों को तत्काल रिहा करने की मांग की। सुरेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि मजदूरों की आवाज को पुलिस बल के जरिए दबाना समस्याओं का समाधान नहीं है, बल्कि पुराने श्रम कानूनों को बहाल कर उन्हें सख्ती से लागू करना आवश्यक है। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये करने, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी कर समान काम के लिए समान वेतन देने तथा आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी घोषित करने की मांग भी उठाई। इस प्रदर्शन की अध्यक्षता तरुणा सिंह ने की। इस अवसर पर वीरेंद्र कुमार, रंजना, संजीव कुमार, प्रदीप सागर, सतेंद्र कुमार और निशा वर्मा सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।

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