Bone Cancer Symptoms in Hindi: अक्सर हम शरीर में होने वाले दर्द को थकान, पुरानी चोट या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिसे आप मामूली ‘मोच’ समझकर पेनकिलर से दबा रहे हैं, वह शरीर के भीतर पनप रहे ‘बोन कैंसर’ (Osteosarcoma) का शुरुआती अलार्म हो सकता है? भारत में कैंसर के मामलों में हड्डियों का कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका पता अक्सर तब चलता है जब वह एडवांस स्टेज पर पहुंच जाती है।
रिसर्च का चौंकाने वाला खुलासा
‘Science direct‘ में प्रकाशित एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, बोन कैंसर के 60% मरीज शुरुआती दर्द को ‘स्पोर्ट्स इंजरी’ या ‘ग्रोइंग पेन’ समझकर इलाज में देरी करते हैं। शोध में पाया गया कि बोन कैंसर हड्डियों को भीतर से इतना खोखला कर देता है कि मामूली झटका लगने पर भी ‘पैथोलॉजिकल फ्रैक्चर’ हो सकता है। यह बीमारी ज्यादातर शरीर की लंबी हड्डियों जैसे, घुटने के पास की हड्डी, कूल्हे की हड्डी और कंधे के ऊपरी हिस्से को सबसे पहले निशाना बनाती है।

इन 3 अंगों में सूजन है ‘Red Flag’
डॉक्टरों के अनुसार, अगर आपके इन तीन अंगों में बिना किसी कारण सूजन दिख रही है, तो तुरंत जांच कराएं:
- घुटने के आसपास: यहां गांठ जैसा महसूस होना बोन ट्यूमर का सबसे आम संकेत है।
- कंधा और ऊपरी बांह: अगर हाथ उठाने में दर्द हो और वहां की त्वचा गर्म महसूस हो।
- कूल्हे और पेल्विक एरिया: यहां की सूजन को अक्सर लोग साइटिका या नसों का दर्द समझ लेते हैं।
एक्सपर्ट की राय: डॉक्टर ने चेताया
प्रसिद्ध ऑन्कोलॉजिस्ट और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. सुमित शर्मा बताते हैं “बोन कैंसर का दर्द आम दर्द से अलग होता है। अगर दर्द रात के समय बढ़ जाता है या आराम करने पर भी ठीक नहीं होता, तो यह खतरे की घंटी है। लोग सूजन पर गर्म पट्टी बांधते हैं या मालिश करवाते हैं, जो कैंसर की स्थिति में घातक हो सकता है। यदि मोच या सूजन 2 हफ्ते से ज्यादा बनी रहे, तो बिना देरी किए बायोप्सी या एमआरआई (MRI) करानी चाहिए।”
मोच और कैंसर के बीच कैसे पहचानें फर्क?
- मोच (Sprain): यह चोट लगने के तुरंत बाद होती है और आराम व बर्फ की सिकाई से 3-5 दिनों में ठीक होने लगती है।
- बोन कैंसर (Cancer): इसका दर्द धीरे-धीरे शुरू होता है और समय के साथ बढ़ता जाता है। इसमें वजन कम होना, रात में पसीना आना और हल्का बुखार जैसे लक्षण भी दिखते हैं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


