‘हमारी सेना है तैयार, किसी भी हमले का दिया जाएगा मुंहतोड़ जवाब’, ईरानी संसद के स्पीकर गालिबफ ने दी चेतावनी

‘हमारी सेना है तैयार, किसी भी हमले का दिया जाएगा मुंहतोड़ जवाब’, ईरानी संसद के स्पीकर गालिबफ ने दी चेतावनी

अमेरिका (United States of America) के 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर ईरान (Iran) के जवाब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। उन्होंने ईरान के जवाब को अस्वीकार्य बताते हुए इसे खारिज कर दिया और साथ ही इसे कचरा भी बताया। इतना ही नहीं, ट्रंप ने ईरान से सीज़फायर पर भी बड़ा बयान देते हुए कहा दिया कि ईरान से सीज़फायर बड़े लाइफ सपोर्ट पर है। ट्रंप की धमकी का ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ (MB Ghalibaf) ने जवाब दिया है।

“हमारी सेना है तैयार”

सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए गालिबफ ने लिखा, “हमारी सेना किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। गलत रणनीति और गलत फैसले हमेशा गलत नतीजों की ओर ले जाते हैं और हैं और पूरी दुनिया यह बात समझ चुकी है। हम हर विकल्प के लिए तैयार हैं और वो (अमेरिका और इज़रायल) हैरान रह जाएंगे।”

“अमेरिकी टैक्सदाताओं को भुगतना होगा खामियाजा”

गालिबफ ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “14 सूत्रीय प्रस्ताव में उल्लेखित ईरानी जनता के अधिकारों को स्वीकार करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। अन्य कोई भी दृष्टिकोण पूरी तरह से निरर्थक होगा। इससे एक के बाद एक असफलता के अलावा कुछ नहीं होगा। अमेरिका जितना ज़्यादा टालमटोल करेगा, उतना ही ज़्यादा अमेरिकी टैक्सदाताओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।”

ईरान की मांग सिर्फ अपने वैध अधिकारों के लिए

सोमवार को साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर ईरान के जवाब पर बात करते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmaeil Baghaei) ने कहा कि ईरान ने सिर्फ अपने लोगों के वैध अधिकारों की मांग की है। बघाई ने आगे कहा, “मिडिल ईस्ट में युद्ध समाप्त करना, अमेरिकी नेवी द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में और ईरानी जहाजों के खिलाफ की जा रही समुद्री डकैती (माकेबंदी) को रोकना, वर्षों से विदेशी बैंकों में अवरुद्ध ईरान के लोगों की संपत्तियों को मुक्त करना, होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करना और पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना कोई अतिरिक्त मांगें नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह से जायज़ हैं।”

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