ओपी राजभर बोले- सपा करा रही पंचायत चुनाव में देरी, हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया

ओपी राजभर बोले- सपा करा रही पंचायत चुनाव में देरी, हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सपा पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा है कि समाजवादी पार्टी पंचायत चुनाव में देरी करा रही है। उन्होंने दावा किया कि सपा के उकसावे पर हाईकोर्ट में मुकदमा दायर कर चुनाव की प्रक्रिया रोकी जा रही है।

राजभर ने 15 अप्रैल को बलिया के बेल्थरारोड (टंगुनिया) में पूर्व सांसद स्व. हरिनारायण राजभर की श्रद्धांजलि सभा के दौरान मीडिया से बातचीत में यह बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘चुनाव समय पर कराने की पूरी इच्छा है। मतपत्र पहले ही छप चुके हैं, लेकिन उच्च न्यायालय में लंबित याचिका के कारण प्रक्रिया अटकी हुई है। मामला न्यायाधीन है, कोर्ट का आदेश आने के बाद आगे बढ़ेगा।’ राजभर ने आगे आरोप लगाया कि ‘सपा के लोग हाईकोर्ट गए हैं’ और अखिलेश यादव के इशारे पर एक मुस्लिम व्यक्ति ने याचिका दायर की है।

किसने दायर की है याचिका

हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन ने दायर की है। इसमें समय पर चुनाव कराने की मांग की गई है, न कि देरी की। मार्च 2026 में कोर्ट ने SEC को 25 मार्च तक जवाब देने को कहा था। 8 अप्रैल को सुनवाई टली और 16 अप्रैल को कोर्ट ने सख्त सवाल पूछे। राजभर ने इस याचिका को सपा प्रेरित बताया, जबकि याचिका का उद्देश्य देरी रोकना है।

सरकार की तैयारी क्या है?

सरकार का दावा, मतपत्र छप चुके, SIR (वोटर लिस्ट संशोधन) प्रक्रिया पूरी हो चुकी। लेकिन मुख्य अड़चन पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण- 2022 वाले आयोग की समय सीमा समाप्त। नया आयोग + जिलेवार डेटा + रोटेशन रोस्टर बाकी। कोर्ट का दबाव – समय पर चुनाव न होने पर संवैधानिक उल्लंघन।

सपा का कहना सरकार डर से टाल रही चुनाव

सपा ने राजभर और सरकार पर पलटवार किया। सपा नेताओं का कहना है कि ‘सरकार सपा के डर से चुनाव टाल रही है। OBC आयोग जानबूझकर नहीं बना रही।’

कुछ प्वाइंट्स में समझे

  • कोई चुनाव तारीख घोषित नहीं।
  • कोर्ट का फैसला आने के बाद ही SEC नोटिफिकेशन जारी कर सकेगा।
  • अगर कोर्ट ने सख्त आदेश दिया तो मई 2026 में संभव।
  • देरी हुई तो 2027 विधानसभा के बाद टल सकता है (कुछ अनुमान)।

राजभर का यह बयान UP की सियासत को गर्म कर गया है। अब सबकी नजर 22 अप्रैल को हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। फैसला चाहे जो भी हो, लाखों ग्रामीण प्रतिनिधियों और उम्मीदवारों की किस्मत इससे तय होगी।

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