NEET Paper Leak: 8 मई की रात से 15 मई की गिरफ्तारी तक…राजस्थान SOG इस सीक्रेट रणनीति से पहुंची सरगना तक

NEET Paper Leak: 8 मई की रात से 15 मई की गिरफ्तारी तक…राजस्थान SOG इस सीक्रेट रणनीति से पहुंची सरगना तक

जयपुर: एक व्हाट्सएप फॉरवर्ड, कुछ संदिग्ध चैट और परीक्षा से पहले लीक हुए सवालों की सूचना, राजस्थान एसओजी ने इस मामले में पारंपरिक जांच पद्धति से अलग रास्ता चुना। टीम ने उन सैकड़ों परीक्षार्थियों के पीछे भागने के बजाय यह तय किया कि पेपर नीचे किन-किन लोगों तक पहुंचा, इसकी बजाय यह पता लगाया जाए कि ऊपर से इसे भेजने वाला कौन था। यही रणनीति आखिरकार राजस्थान के सबसे बड़े नीट पेपर लीक नेटवर्क के सरगना तक पहुंचने की वजह बनी।

मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया खंगाला…सरगना तक पहुंची एसओजी

8 मई: पहली सूचना और रातों-रात एक्शन

दो घंटे तक टीम ने सूचना की तस्दीक की। एडीजी विशाल बंसल, आईजी अजयपाल लांबा और एसपी कुंदन कंवरिया देर रात सीकर के लिए रवाना हो गए। इसी दौरान अलग-अलग पुलिस टीमें सक्रिय कर दी गईं। मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड की तकनीकी पड़ताल शुरू हुई।

9 मई: सरगना तक पहुंची एसओजी

जांच टीम जमवारामगढ़ निवासी दिनेश बिंवाल और मांगीलाल बिंवाल तक पहुंची, जिन्हें राजस्थान में पेपर लीक नेटवर्क का प्रमुख सरगना माना जा रहा है। 9 मई को दिनेश, मांगीलाल और विकास को हिरासत में लिया। दिनेश अपने बेटे ऋषि, भाई मांगीलाल और भतीजे विकास के साथ पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था।

13 मई: सीबीआई की एंट्री और पुणे कनेक्शन

मामला कई राज्यों तक फैलने के बाद जांच में सीबीआई की एंट्री हुई। सीबीआई ने शुभम खैरनार की निशानदेही पर 13 मई को पुणे निवासी मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी के बाद जांच सीधे उस स्तर तक पहुंच गई, जहां से पेपर तैयार और लीक किए जाने की आशंका थी।

15 मई: पेपर तैयार करने वालों तक पहुंची जांच

जांच एजेंसियों ने 15 मई को केमिस्ट्री के लेक्चरर प्रो. पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने में भूमिका निभाई। इसके साथ ही जांच पहली बार सीधे पेपर तैयार करने वाली समिति तक पहुंच गई।

जांच का टर्निंग पॉइंटः ‘पेपर किसने भेजा?’

एसओजी के आला अधिकारियों ने शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया कि जांच सोशल मीडिया पर पेपर पाने वालों की निचली कड़ी में नहीं उलझेगी। टीमों को निर्देश दिए गए कि हर संदिग्ध व्यक्ति से यह पता लगाया जाए कि उसे पेपर किसने भेजा। यानी जांच की दिशा नीचे से ऊपर की ओर रखी गई।

यही फैसला पूरी पड़ताल का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। जांच के दौरान करीब 167 परीक्षार्थियों और अन्य संदिग्धों से पूछताछ की गई। तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए करीब 20 लोगों की ‘ऊपरी कड़ी’ जोड़ी गई।

गुरुग्राम से नासिक तक खुलती गई कड़ियां

लीक पेपर गुरुग्राम निवासी यश यादव तक पहुंचा था। यश ने स्वीकार किया कि उसने यह पेपर नासिक के शुभम खैरनार से लिया था। इसके बाद जांच एजेंसियों ने डिजिटल चैट, ट्रांजेक्शन और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर अंतरराज्यीय कड़ियों को जोड़ना शुरू किया।

सैकड़ों परीक्षार्थियों तक पहुंच चुका था पेपर

जांच एजेंसियों के अनुसार, लीक हुआ प्रश्नपत्र सोशल मीडिया, निजी नेटवर्क और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए तेजी से फैलाया गया था। शुरुआती जांच में ही संकेत मिले कि पेपर सैकड़ों परीक्षार्थियों तक पहुंच चुका था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *