भास्कर न्यूज | बाड़मेर बाड़मेर मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य की कार्यप्रणाली और मैस टेंडर में कथित भ्रष्टाचार को लेकर विवाद गहरा गया है। छात्रसंघ यूनियन के सभी पदाधिकारियों ने बुधवार को एकजुट होकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद बुधवार को कॉलेज प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मैस शुरू की है और नया टेंडर अपलोड किया है। हालांकि छात्रसंघ के इस्तीफे ने कॉलेज की अंदरूनी राजनीति और भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। यूनियन पदाधिकारी दिलीप कुमार ने कहा कि कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं (भोजन, पानी) और छात्रों की समस्याओं के समाधान की जगह प्रशासन अपनी मनमर्जी थोप रहा है। संवाद के सारे रास्ते बंद होने के बाद इस्तीफा ही एकमात्र विकल्प बचा था। हम पर ऐसी फर्मों को टेंडर देने का दबाव बनाया गया जो छात्रों के हित में नहीं थीं। जब हमने विरोध किया, तो हमें जिम्मेदारियों को निभाने में बाधाएं पैदा की गई। हमें कॉलेज से रेस्टिकेट करने की धमकियां दी गई। पहले बैंच की यूनियन ने रिधु कैटर्स को मैस का टेंडर जारी किया जो दो साल अच्छी तरह से चला। इसके बाद जन हितकारी सीमान्त संस्थान को 2 लाख सिक्योरिटी राशि जमा कराने के बाद नाश्ते के 35, सुबह व शाम खाने के 50-50 रुपए में टेंडर जारी किए गए। फर्म बीच में ही छोड़कर चली गई। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने इमरजेंसी व नए टेंडर में देरी का हवाला देकर यूनियन पर दबाव बनाते हुए चहेती फर्म गणेशा एसोशिएशन की एंट्री करवाई। 5 अप्रैल को महज 20,500 रुपए किराए पर टेंडर दिया गया। नाश्ता 45 रुपए और खाना 120 रुपए (दोनों समय) तय हुआ। लेकिन गुणवत्ता और मैनेजमेंट ऐसा रहा कि 23 से 25 अप्रैल को कर्मचारी भाग गए। मैस बंद होने से स्टूडेंट्स को बाहर ढाबों पर जाना पड़ा। हद तो तब हो गई जब शाम 7:30 बजे कॉलेज प्रशासन ने गेट बंद कर दिए गए, जिससे खाना खाकर लौटने वाले छात्रों को भारी परेशानी हुई।


