मजदूर संगठनों ने 26,000 न्यूनतम वेतन की मांग की:जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर दमन रोकने और रिहाई की अपील

मजदूर संगठनों ने 26,000 न्यूनतम वेतन की मांग की:जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर दमन रोकने और रिहाई की अपील

जौनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में गुरुवार को उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स एसोसिएशन ने धरना प्रदर्शन किया। संगठन ने जिलाधिकारी को एक पत्र सौंपकर अपनी विभिन्न मांगें रखीं। जिला सचिव अजय चौरसिया ने बताया कि सरकारी कार्रवाई के अभाव में नियोक्ता अनुचित श्रम प्रथाएं अपना रहे हैं और श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नियोक्ता यूनियन नेताओं और श्रमिकों के लोकतांत्रिक तथा कानूनी विरोध के अधिकार को दबाने के लिए उनके खिलाफ झूठी पुलिस शिकायतें दर्ज कर रहे हैं। एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकारों द्वारा नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मजदूरों के संघर्षों के दमन की कड़ी निंदा की। उनकी प्रमुख मांगों में सभी गिरफ्तार मजदूरों और कार्यकर्ताओं की तत्काल व बिना शर्त रिहाई शामिल है। इसके अतिरिक्त, सभी झूठे मामलों को वापस लेने, दमन समाप्त करने और सभी अवैध हिरासतें खत्म करने की भी मांग की गई। संगठन ने ट्रेड यूनियनों के साथ तत्काल त्रिपक्षीय वार्ता और भारतीय श्रम सम्मेलन के शीघ्र आयोजन की अपील की।
उन्होंने पूर्ण वैधानिक लाभों के साथ प्रति माह 26,000 रुपये न्यूनतम मजदूरी लागू करने की भी मांग की। अन्य मांगों में सख्त 8 घंटे का कार्य दिवस, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करना, ठेका मजदूरों के साथ समान व्यवहार, सस्ती एलपीजी और ठेका श्रम व्यवस्था को समाप्त कर नियमितीकरण शामिल हैं। संगठन ने ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण बिक्री संवर्धन कर्मचारियों के दैनिक भत्ता/यात्रा भत्ते में वृद्धि के लिए नियोक्ताओं को आदेश देने की भी मांग की। उन्होंने ट्रेड यूनियनों और श्रमिकों के कानूनी तथा संवैधानिक अधिकारों पर हमले बंद करने का भी आह्वान किया।

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