देवर-भाभी की 177 मिनट की फिल्म, 9 करोड़ था बजट, बॉक्स ऑफिस पर साबित हुई डिजास्टर

देवर-भाभी की 177 मिनट की फिल्म, 9 करोड़ था बजट, बॉक्स ऑफिस पर साबित हुई डिजास्टर

Bollywood Flop Movie: बॉलीवुड के गलियारों में अक्सर बड़ी फिल्मों और उनके भारी-भरकम बजट के चर्चे होते रहते हैं, लेकिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक फिल्म ऐसी भी रही जिसने अपनी भव्यता से सबको चौंकाया तो सही, पर बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी थी। ये फिल्म 1993 में आई थी और 177 मिनट लंबी इस फिल्म को बनाने में प्रोड्यूसर बोनी कपूर ने पानी की तरह पैसा भी बहाया था, लेकिन बेदम कहानी ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।

देवर-भाभी की जोड़ी भी हुई थी फ्लॉप (Bollywood Flop Movie)

बोनी कपूर ने 1987 में अनिल कपूर और श्रीदेवी को लेकर ‘मिस्टर इंडिया’ बनाई थी, जो ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। इसी सफलता को दोहराने के लिए उन्होंने दोबारा इसी जोड़ी पर दांव खेला। उन्हें उम्मीद थी कि अनिल कपूर और श्रीदेवी का करिश्मा एक बार फिर जादू करेगा और उन्होंने फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ बनाई। लेकिन दर्शकों को ये फिल्म बिल्कुल पसंद नहीं आई और ये फ्लॉप की कैटेगरी में चली गई।

Bollywood Flop Movie

अनाउंस के 6 साल बाद रिलीज हुई थी फिल्म (Roop Ki Rani Choron Ka Raja Release On 1993)

दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म की घोषणा ‘मिस्टर इंडिया’ की रिलीज वाले साल यानी 1987 में ही कर दी गई थी। शुरुआत में इसका निर्देशन शेखर कपूर कर रहे थे, जिन्होंने ‘मिस्टर इंडिया’ जैसी शानदार फिल्म दी थी। लेकिन कुछ वजहों से शेखर कपूर ने बीच में ही फिल्म छोड़ दी। इसके बाद डायरेक्शन की कमान सतीश कौशिक को सौंपी गई। सतीश कौशिक के लिए बतौर डायरेक्टर यह पहली फिल्म थी, लेकिन बदकिस्मती से यह उनके करियर की सबसे बड़ी ‘डिजास्टर’ साबित हुई।

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90 के दशक की सबसे महंगी फिल्म हुई थी फीसड्डी

उस दौर में जहां फिल्में चंद महीनों में बन जाती थीं, इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में 6 साल का लंबा वक्त लगा था। फिल्म का बजट करीब 9 करोड़ रुपये था, जो 90 के दशक के हिसाब से बहुत बड़ी रकम थी। महंगे सेट्स, शानदार कॉस्ट्यूम और बड़ी स्टार कास्ट होने के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर महज 3 करोड़ रुपये ही कमा सकी। इस फिल्म के कारण मेकर्स को करोड़ों का घाटा सहना पड़ा।

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सितारों की लंबी फौज भी नहीं बचा पाई फिल्म

फिल्म में अनिल कपूर और श्रीदेवी के अलावा अनुपम खेर, जैकी श्रॉफ, जॉनी लीवर, परेश रावल और बिंदू जैसे दिग्गज कलाकारों की पूरी फौज थी। अजीत वच्छानी, दलीप ताहिल और रजाक खान जैसे मंझे हुए अभिनेता भी फिल्म का हिस्सा थे। कलाकारों की एक्टिंग में कोई कमी नहीं थी, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और जरूरत से ज्यादा लंबी फिल्म दर्शकों को बांधने में नाकाम रही। आज जब भी बॉलीवुड की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्मों की बात होती है, तो ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ का नाम आता है।

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