अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने रविवार को दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस के दिन यहां आशुतोष कॉलेज में तृणमूल कांग्रेस समर्थित गुंडों ने उसके सदस्यों पर हमला किया, उनके झंडे और बैनर फाड़ दिए, पथराव किया तथा दो छात्रों की डंडों से पिटाई की। छात्र संगठन ने कहा कि उसके कार्यकर्ताओं ने भवानीपुर पुलिस थाने में विरोध दर्ज कराया और छात्रों मानस कुंडू तथा सौपर्णी सेन पर हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। तृणमूल की युवा नेता उपासना चौधरी ने इससे पहले आरोप लगाया था कि स्वतंत्रता दिवस की सुबह कॉलेज में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रवेश करने से रोकते हुए अभाविप के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया।
छात्र संगठन ने कहा कि किसी शैक्षणिक संस्थान में बाहरी राजनीतिक तत्वों को लाना और स्वतंत्रता दिवस के दिन हिंसा करना छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। संगठन ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल छात्रों पर राजनीतिक वर्चस्व कायम करने या उनके खिलाफ हिंसा के बहाने के तौर पर नहीं किया जा सकता। अभाविप की दक्षिण बंगाल इकाई के सचिव नीलकंठ भट्टाचार्य ने कहा कि यह हमला ‘‘तृणमूल की राजनीतिक असहिष्णुता और हताशा का स्पष्ट प्रतिबिंब’’ है।
उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि स्वतंत्रता दिवस पर एक शैक्षणिक परिसर को हिंसा के केंद्र में बदल दिया गया। भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘तृणमूल को बताना चाहिए कि छात्रों पर हमला करने के लिए बाहरी लोगों को कॉलेज में क्यों लाया गया। शैक्षणिक परिसर राजनीतिक बाहुबल दिखाने की जगह नहीं हैं।
पश्चिम बंगाल के छात्र डर और हिंसा की राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगे।’’
तृणमूल की युवा नेता उपासना चौधरी ने इससे पहले आरोप लगाया था कि स्वतंत्रता दिवस की सुबह कॉलेज में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रवेश करने से रोकते हुए अभाविप कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया था। पार्टी की आईटी प्रकोष्ठ की प्रभारी और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े की नेता चौधरी ने दावा किया कि उन पर अंडे फेंके गए और आरोप लगाया कि सुरक्षा कर्मियों द्वारा पहचान पत्रों की जांच किए बिना बाहरी लोगों को कॉलेज परिसर में प्रवेश दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें और तृणमूल के अन्य कार्यकर्ताओं को प्रवेश द्वार पर एकत्र होने से रोक दिया, जिसके बाद कहासुनी हुई।
इसी दौरान उनके साथ मारपीट की गई और उन पर अंडे फेंके गए। चौधरी ने आरोप लगाया था, ‘‘अंडे फेंकने की घटना के पीछे आरएसएस से जुड़े अभाविप के सदस्य थे। पुलिस उनका समर्थन कर रही थी।


