KGMU के पीडियाट्रिक विभाग में छह साल की बच्ची की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। गुस्साए परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। रोते-बिलखते परिजन कह रहे थे कि उनकी बच्ची पहले ठीक से बोलती थी, बैठती और उठती थी। करीब डेढ़ महीने से उसका इलाज चल रहा था। परिजनों का आरोप था कि बच्ची को वेंटिलेटर से हटाकर वार्ड में शिफ्ट किया गया और इसके बाद उसकी मौत हो गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में परिजन डॉक्टरों पर बच्ची की जान लेने का आरोप लगाते हुए अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। बच्ची की मौत के बाद करीब साढ़े चार घंटे तक विभाग में हंगामा होता रहा। इस दौरान दूसरे मरीजों का इलाज भी प्रभावित हुआ। घटना सोमवार सुबह की है। वेंटिलेटर से हटने के बाद वार्ड में किया था शिफ्ट जानकारी के मुताबिक, बाराबंकी निवासी आरोही को 27 सितंबर को KGMU में भर्ती कराया गया था। उसे GBS (गुइलेन-बैरे सिंड्रोम) था। डॉक्टरों के मुताबिक, इलाज के दौरान उसकी हालत में सुधार हो रहा था। 21 अक्टूबर से धीरे-धीरे वेंटिलेटर हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई और 23 अक्टूबर से वह पूरी तरह वेंटिलेटर से बाहर थी। मौत से एक दिन पहले उसे PICU से सेमी प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किया गया था। सोमवार सुबह अचानक उसे सांस लेने में परेशानी हुई। डॉक्टरों ने दो से तीन घंटे तक उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। सुबह 5 बजे तक ठीक थी बच्ची पीडियाट्रिक विभाग के डॉक्टर के मुताबिक, GBS में हाथ-पैर में पैरालिसिस के साथ सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है। आरोही को शुरुआत में वेंटिलेटर पर रखा गया था। उसके बाद बच्ची PICU में थी। इसके बाद उसे सेमी प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किया गया। यहां सक्शन, ऑक्सीजन और मॉनिटरिंग की व्यवस्था थी। डॉक्टर के मुताबिक, सोमवार सुबह 5 बजे तक बच्ची की हालत ठीक थी। सुबह 6 बजे नर्सिंग स्टाफ वाइटल मॉनिटर करने पहुंचा तो उसे सांस लेने में परेशानी मिली। सांस की नली में खाना जाने की आशंका इलाज करने वाले डॉक्टर ने आशंका जताई कि रात में खाना खिलाने के बाद बच्ची लेटी हुई थी। इस दौरान उसे उल्टी हुई होगी और खाने का कुछ हिस्सा सांस की नली में चला गया होगा। सुबह उसकी हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी मौत हो गई। हालांकि, मौत की वजह की अभी पुष्टि नहीं हुई है। जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से अभद्रता का आरोप बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। डॉक्टर के मुताबिक, सुबह करीब 7:30 बजे सबसे पहले PRO मौके पर पहुंचे। इसके बाद MS, प्रॉक्टर और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंच गए। डॉक्टरों का आरोप है कि परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के साथ गाली-गलौज और हाथापाई की। स्टाफ को काम करने से रोका और खींचतान भी की। डॉक्टरों ने प्रॉक्टर को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को भी परिजनों को समझाने में करीब दो घंटे लगे। सुबह करीब 10:30 बजे तक हंगामा चलता रहा। डॉक्टर के मुताबिक, बच्ची के माता-पिता के अलावा तीन-चार अन्य परिजन भी मौजूद थे। इनमें बच्ची के मामा के भी हंगामे में शामिल होने की बात कही गई।

