ईरान युद्ध और होर्मुज रूट बंद होने से यूरोप और एशिया में जेट फ्यूल की भारी कमी होने वाली है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, यूरोप के पास अब सिर्फ 6 हफ्ते का तेल बचा है। अगर सप्लाई जल्द शुरू नहीं हुई, तो गर्मियों की छुट्टियों के सीजन में फ्लाइट्स रद्द होंगी और टिकट के दाम बढ़ेंगे। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के डायरेक्टर फातिह बिरोल ने एक इंटरव्यू में बताया कि ग्लोबल इकोनॉमी अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। यूरोप के कुछ देशों के पास आमतौर पर कई महीनों का जेट फ्यूल स्टॉक होता है, लेकिन युद्ध की वजह से अब यह तेजी से घट रहा है। आईईए की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप के कई देशों में अब 20 दिन से भी कम का फ्यूल स्टॉक रह गया है। अगर यह 23 दिन से नीचे गिरता है, तो एयरपोर्ट्स पर फ्यूल की फिजिकल कमी दिखने लगेगी, जिससे फ्लाइट्स बड़े पैमाने पर रद्द करनी पड़ेंगी। होर्मुज रूट बंद होने से मुसीबत बढ़ी यूरोप अपनी जरूरत का करीब 20 से 25% जेट फ्यूल आयात करता है। इसमें से 40% हिस्सा होर्मुज रूट के रास्ते आता है। अर्गस मीडिया के मुताबिक, जब से ईरान युद्ध शुरू हुआ है, इस रास्ते से एक भी फ्यूल शिप नहीं निकला है। दुनिया में हर दिन 1 करोड़ से 1.5 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई इस रास्ते के बंद होने से रुकी हुई है। एयरलाइंस पर बोझ बढ़ा, खर्च में 30% हिस्सा फ्यूल का इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के अनुसार, किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च में जेट फ्यूल की हिस्सेदारी 30% होती है। युद्ध शुरू होने के बाद से जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। इसका सीधा असर एयरलाइंस के मुनाफे पर पड़ रहा है। यही वजह है कि एयरलाइंस ने अब इसका बोझ यात्रियों पर डालना शुरू कर दिया है। कई कंपनियों ने टिकट के दाम बढ़ाने के साथ-साथ बैगेज फीस और अन्य एड-ऑन सर्विस के चार्ज बढ़ा दिए हैं। कई एयरलाइंस ने फ्लाइट्स में की कटौती फ्यूल की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण एयरलाइंस ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं… अमेरिका से मदद, लेकिन एशिया-पैसिफिक को ज्यादा खतरा एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मिडिल ईस्ट के तेल पर सबसे ज्यादा निर्भरता एशिया-पैसिफिक देशों की है, इसके बाद यूरोप आता है। अमेरिका एक बड़ा तेल उत्पादक है, इसलिए वहां फ्यूल की कमी का संकट कम है। यूरोप की मदद के लिए अमेरिका ने अप्रैल में अपनी सप्लाई 6 गुना बढ़ाकर 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन कर दी है, लेकिन यह पूरी कमी को भरने के लिए काफी नहीं है। यात्रियों के लिए क्या बदलेगा? सिर्फ टिकट महंगे होना ही एकमात्र समस्या नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यात्रियों को अब लंबी दूरी के रूट्स (जो फ्यूल बचाने के लिए बदले जाएंगे), कम फ्लाइट ऑप्शंस और आखिरी समय में शेड्यूल बदलने जैसी दिक्कतों के लिए तैयार रहना चाहिए। गर्मियों के पीक सीजन में सस्ती टिकट मिलना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। क्या है होर्मुज रूट? यह ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है क्योंकि खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई, कुवैत) से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल और एलएनजी इसी रास्ते से होकर पूरी दुनिया में जाता है। ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया की घरेलू उड़ानें ₹899 तक महंगी: नया किराया 8 अप्रैल से लागू होगा, जेट फ्यूल के दाम बढ़ना वजह एअर इंडिया ने घरेलू उड़ानों के लिए फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है। इससे हवाई सफर महंगा हो जाएगा। ग्लोबल मार्केट में विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में आई तेजी के बाद एयरलाइन ने यह फैसला लिया है। नई दरें कल यानी 8 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। एयरलाइन के मुताबिक, जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी होने से लागत बढ़ गई है। विमान ईंधन की औसत कीमत 195.19 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जो फरवरी के अंत में 99.40 डॉलर थी। इससे पहले इंडिगो ने भी फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया था। पूरी खबर पढ़ें…
ईरान युद्ध के कारण यूरोप में जेट फ्यूल का संकट:6 हफ्ते का स्टॉक बचा; दुनियाभर में रद्द हो सकती हैं फ्लाइट्स, हवाई सफर महंगा होगा


