Defence Minister Rajnath Singh on Middle East crisis: जर्मनी दौरे पर भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य-पूर्व में मौजूदा तनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। बुधवार को बर्लिन में भारतीय दूतावास में आयोजित एक भारतीय सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने लगातार संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण बनाए रखा है। साथ ही, पश्चिम एशिया संकट सहित वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में भारत की अधिक भूमिका की संभावना को भी खुला रखा है।
‘भारत ने कोशिश की है, हर चीज का समय होता है’
जब भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से पूछा गया, ‘क्या भारत का मध्य पूर्व संकट में शांति लाने में कोई रोल हो सकता है?’ इस पर उन्होंने कहा, ‘भारत ने कोशिश की है, लेकिन हर चीज का एक समय होता है। हो सकता है कि कल ऐसा समय आए जब भारत इसमें अपनी भूमिका निभाए और सफलता भी पाए। इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता।’
उन्होंने यह भी कहा, ‘प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से युद्ध समाप्त करने की अपील की है। हमारे प्रधानमंत्री का कूटनीतिक मामलों में बहुत संतुलित नजरिया है।’ उन्होंने भारतीय कूटनीति की सराहना करते हुए कहा कि इसके कारण कई भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार करने में सक्षम हुए।
उन्होंने कहा, ‘भारत जिस तरह से आगे बढ़ रहा है, आपने देखा ही होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी देश के जहाज आसानी से पार नहीं कर पा रहे थे। यदि किसी देश के 7–8 जहाज वहां से गुजर पाए, तो वह भारत ही था। ऐसा नहीं है कि अमेरिका या ईरान भारत को अपना दुश्मन मानते हैं। यह भारत का बहुत संतुलित दृष्टिकोण है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘जब प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति से मुलाकात की, तो उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा की। यहां तक कि जब उन्होंने ट्रंप से मुलाकात की, तब भी उन्होंने इस विषय पर बात की और कहा कि कोई समाधान निकाला जाना चाहिए।’
‘भारत-जर्मनी संबंध मजबूत हुए हैं’
इससे पहले, रक्षा मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘जर्मनी की यह मेरी पहली यात्रा है। मैं जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के निमंत्रण पर यहां आया हूं। मेरा मानना है कि यह अपने आप में एक उपलब्धि है। भारत और जर्मनी के बीच संबंध समय के साथ लगातार मजबूत हुए हैं। वर्ष 2026 हमारे लिए विशेष है, क्योंकि इस वर्ष जर्मनी के साथ हमारे औपचारिक राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। हमारे संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं।’
आर्थिक संबंधों का जिक्र करते हुए सिंह ने दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक जुड़ाव की गहराई और साझेदारी को मजबूत करने में उद्योग की भूमिका की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, ‘पिछले सात दशकों में जर्मनी के साथ हमारे संबंध हर क्षेत्र में मजबूत हुए हैं। आज जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं। जर्मनी की अग्रणी कंपनियां भारत के औद्योगिक विकास और ‘मेक इन इंडिया’ को गति प्रदान कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर, कई भारतीय कंपनियां भी जर्मनी में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।’


