POK में फिर भड़की हिंसा, प्रदर्शनकारियों पर दोबारा फायरिंग, आंसू गैस के गोले भी दागे गए

POK में फिर भड़की हिंसा, प्रदर्शनकारियों पर दोबारा फायरिंग, आंसू गैस के गोले भी दागे गए

POK Protest: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। 9 जून को हुई हिंसक झड़पों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद अब एक बार फिर प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं। अब खबर आ रही है कि विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने फिर फायरिंग की और आंसू गैस के गोले दागे।

बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में लोग जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर लगाए गए प्रतिबंध और हालिया कार्रवाई के विरोध में सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने स्थानीय प्रशासन और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कई वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘जालिमों जवाब दो, खून का हिसाब दो’ और ‘जब तक जनता तंग रहेगी, जंग रहेगी’ जैसे नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं।

9 जून की हिंसा के बाद फिर बढ़ा तनाव

गौरतलब है कि 9 जून को POK के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 200 लोग घायल हुए थे।

हिंसा की शुरुआत उस समय हुई थी जब JAAC से जुड़े एक सदस्य की मौत के बाद लोगों में गुस्सा भड़क गया। इसके बाद कई इलाकों में प्रदर्शन तेज हो गए और हालात नियंत्रण से बाहर होते चले गए।

JAAC पर प्रतिबंध बना विवाद की बड़ी वज

माना जा रहा है कि मौजूदा संकट की सबसे बड़ी वजह जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर लगाया गया प्रतिबंध है। संगठन लंबे समय से बिजली दरों, महंगाई, कर व्यवस्था और स्थानीय अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन करता रहा है। हाल ही में POK प्रशासन ने उसे गैरकानूनी घोषित कर दिया था, जिसके बाद विरोध प्रदर्शनों का दौर और तेज हो गया।

इसके अलावा विधानसभा चुनावों में शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों को लेकर भी लोगों में नाराजगी बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी इसे स्थानीय जनता के राजनीतिक अधिकारों के खिलाफ कदम मान रहे हैं।

लंबे समय से सुलग रहा है असंतोष

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा विरोध प्रदर्शन केवल एक संगठन पर कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं। पिछले कुछ महीनों से POK में महंगाई, बेरोजगारी, बिजली संकट और प्रशासनिक फैसलों को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ता रहा है। यही वजह है कि JAAC पर कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन तेजी से व्यापक जन आंदोलन का रूप लेते दिखाई दे रहे हैं।

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